बड़े मीडिया समूह पर यादव सरकार की टेढ़ी नजर.!

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो साला कार्यकाल में नुमाइशी विज्ञापनों के मार्फ़त मीडिया को जमकर उपकृत किया है.जनता को पीने का पानी,इलाज के लिए सुविधायुक्त सरकारी अस्पताल और भावी पीढ़ी के लिए अच्छे स्कूलों/उनके भवनों पर ध्यान देने के बजाए उनकी सरकार अन्य फिजूलखर्चियों और महँगी विज्ञापनबाजी में जनता का पैसा लुटाने में व्यस्त है.तभी सरकार का जितना बजट है,उससे ज्यादा कर्ज का बोझ है.इधर प्रदेश के सबसे बड़े और देश के प्रमुख अख़बार दैनिक भास्कर से उनकी सरकार के विज्ञापन नदारद नजर आ रहे हैं.खजुराहों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के वार्षिक नृत्य समारोह का उनकी और मोदीजी की तस्वीरों से सज्जित आधा पेज विज्ञापन आज देश प्रदेश के अख़बारों में बिराजमान है,बस दैनिक भास्कर को छोड़..?
दो दिन पहले ग्वालियर में आयोजित किसान सम्मलेन आदि कार्यक्रमों का मोहन और मोदी के फोटो से लैस पूरे पेज का विज्ञापन दैनिक भास्कर को छोड़ अन्य अख़बारों में पहले पेज पर छपा.हमें लगा की चूँकि आयोजन ग्वालियर में हुआ इसलिए भास्कर के वहां के संस्करण में तो यह जरूर छपा होगा.पर वहां भी विज्ञापन नदारद रहा और अगले दिन मुख्यमंत्री का कवरेज भी.?इसका मतलब तो यह हुआ की विज्ञापनों की बारिश के एवज में सरकार जिस रिटर्न की उम्मीद करती है उस पर दैनिक भास्कर खरा नहीं उतर रहा है.? दैनिक भास्कर को लेकर यह सोच दुर्भाग्यपूर्ण और नादानी भरी ही लगती है.इसलिए और ज्यादा क्योंकि विज्ञापनदाता विभाग जनसंपर्क मुख्यमंत्री के अधीन ही है.
दैनिक भास्कर जिस शिखर पर है वहां विज्ञापन उसके पास खुद आते हैं,उन्हें लेने नहीं जाना पड़ता.इसलिए उसके साथ ऐसा अदूरदर्शी और अहंकारी सुलूक क्या गुल खिलाता है यह देखना दिलचस्प होगा.इधर बंसल समूह के एक विशाल विज्ञापन ने भी ध्यान खींचा है.यह विज्ञापन जिस हयात पैलेस के बारे में है,वह क्या बला है.? कहाँ है.?, इसकी जानकारी विज्ञापन नहीं देता.! बस मोहन यादव के फोटो से सज्जित यह विज्ञापन सिर्फ हयात के लांच होने की सूचना भर देता है.मजे की बात यह की हयात के लांच होने की खबर अगले दिन किसी अख़बार में पढ़ने को नहीं मिलती,ना खबरों के पेज पर और ना बिजनेस में पेज पर..? बता दें की हयात पैलेस हबीबगंज स्टेशन पर,जहाँ बंसल समूह हर तरफ छाया है,एक होटल है.
