करुणामूर्ति भगवान आशुतोष, भूतभावन श्री मृत्युञ्जय महादेव, भगवान पारदेश्वर और भगवान दत्तात्रेय के नित्य अनुग्रह से अभिसिंचित, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की आचार्यपीठ

0
Spread the love

करुणामूर्ति भगवान आशुतोष, भूतभावन श्री मृत्युञ्जय महादेव, भगवान पारदेश्वर और भगवान दत्तात्रेय के नित्य अनुग्रह से अभिसिंचित, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की आचार्यपीठ – श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में आज भव्यता और भक्तिभाव से परिपूर्ण “पाटोत्सव एवं प्रकाशोत्सव” समारोह का आयोजन हुआ।

यह दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक इतिहास की एक दिव्य पुनर्स्मृति है, जब श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” का अविर्भाव दिवस (कार्तिक पूर्णिमा – प्रकाशोत्सव) और पूज्य गुरुदेव के सद्संकल्प से स्थापित विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था “प्रभु प्रेमी संघ” का स्थापना दिवस “पाटोत्सव” एक साथ आलोकित हुआ।

प्रातःकालीन कार्यक्रम !
श्री मृत्युञ्जय मण्डपम् में प्रातःकाल “पूज्य आचार्यश्री जी” ने देश-विदेश से पधारे असंख्य श्रद्धालु साधकों को सनातन धर्म की दिव्य पद्धति से “गुरु-मंत्र दीक्षा प्रदान किया”। यह दीक्षा संस्कार एक ऐसा दिव्य क्षण है, जब साधक के जीवन में गुरुतत्त्व का प्रकाश जागृत होता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ !
इस अवसर पर “स्वामी अवधेशानन्द पब्लिक स्कूल”, चम्पावत (उत्तराखण्ड) के विद्यार्थियों ने देशभक्ति, संस्कृति और सनातन मूल्यों से ओतप्रोत विविध मनोहारी प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।

सेवा का नया अध्याय !
श्री हरिहर आश्रम प्रांगण में “पूज्य आचार्यश्री जी” के पावन सान्निध्य में “एनसिएंट हेरिटेज फाउंडेशन” द्वारा संचालित “स्वामी अवधेशानन्द पॉलीक्लिनिक – दंत एवं नेत्र चिकित्सा सेवा” का शुभारम्भ हुआ। यह सेवा-प्रकल्प श्रीमती रामकुँवर बंशीलाल जी धनोतिया के पुण्यस्मरण में धनोतिया परिवार (मनासा, इन्दौर) द्वारा समर्पित किया गया; जो “सेवा ही साधना” के आदर्श का साकार रूप है।

सायंकालीन सांस्कृतिक सत्र में देश की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका आदरणीया श्रीमती रिद्धिमा धवन जी ने अपने सुरों की साधना से भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण निर्मित किया।

“पूज्य आचार्यश्री” का आशीर्वचन !
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में “पूज्य आचार्यश्री जी” ने कहा कि हरिद्वार की यह पावन धरती, जहाँ भगवान दक्षेश्वर, मृत्युञ्जय महादेव और पारदेश्वर विराजमान हैं, वह केवल तीर्थ नहीं एक जीवन्त आध्यात्मिक ऊर्जा-केन्द्र है। आज का यह दिवस मेरे जीवन की तीन अनन्त स्मृतियों का साक्षी है – गृहत्याग, गुरुदर्शन और संन्यास; तीनों ही कार्तिक पूर्णिमा को घटित हुए। यही दिवस प्रभु प्रेमी संघ के उद्भव का भी है।” उन्होंने कहा कि “गुरु मौन में ही सब कुछ कह देते हैं। वेद स्वयं भगवान हैं, और भगवान स्वयं वेदव्यास बनकर प्रकट हुए। भगवद्पाद आदिगुरु शंकराचार्य जी ने जब अद्वैत ज्ञान का प्रकाश फैलाया, तब संसार में शास्त्र और साधना का संतुलन स्थापित हुआ। इसीलिए कहा गया “गुरु न होते जगत में, तो जल मरता संसार।’”

“पूज्य आचार्यश्री जी” ने “ईश्वरो गुरुरात्मेति मूर्तिभेदविभागिने…” श्लोक का उद्धरण कर कहा कि ईश्वर, गुरु और आत्मा ये तीन नहीं, एक ही तत्त्व हैं। जैसे आकाश सबमें व्याप्त है, वैसे ही चैतन्य सबमें व्यापी है।” हम सब अमृतस्य पुत्राः हैं; अमरता और असीम शक्ति हमारे भीतर ही निहित है। यही आत्मबोध साधना का सार है।”

श्रद्धेय अतिथि एवं साधक समूह की उपस्थिति !
इस पावन अवसर पर महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी श्री अखिलेश्वरानन्द गिरि जी, पूज्या महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी ललितानन्द गिरि जी, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी, भारत माता मन्दिर – समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव श्री आई. डी. शास्त्री जी, भारत जनहित ट्रस्ट, प्रभु प्रेमी संघ चैरिटेबल ट्रस्ट, एंसीएन्ट हेरिटेज फाउंडेशन, अवधेशानन्दजी मिशन (USA तथा भारत) के प्रमुख न्यासीगण तथा श्री हरिहर आश्रम के प्रबंधक पूज्य स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी नित्यानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी सोमदेव गिरि जी, पूज्य स्वामी प्रशान्त गिरि जी, पूज्य स्वामी कल्याणानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी श्री रामानन्द जी एवं पूज्य स्वामी श्री रामात्मानन्द गिरि जी सहित देश-विदेश के अनेक साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

समापन विचार !
यह पाटोत्सव – प्रकाशोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संन्यास, सेवा और सद्गुरुतत्त्व के संगम का दिव्य प्रतीक है। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी “पूज्य आचार्यश्री जी” के पावन सान्निध्य में हरिद्वार ने पुनः अनुभव किया कि प्रकाश से प्रेम, प्रेम से सेवा और सेवा से साधना की अविरल धारा जीवन का उद्धार करती है !

#AvdheshanandG_Quotes
#प्रभु_प्रेमी_संघ #स्थापना_दिवस
#PrabhuPremiSangh
#प्रकाशोत्सव #पाटोत्सव
#हरिहर_आश्रम #AvdheshanandG_Mission
#स्वामी_अवधेशानन्द_गिरि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/lokvarta/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481