गड्ढों से परेशान पीडब्ल्यूडी अपनाएगा एनएचएआई फार्मूला
सड़कों के गड्ढों को लेकर हो रही किरकिरी से परेशान लोक निर्माण विभाग अब मेंटेनेंस के लिए एनएचएआई का फॉर्मूला अपनाएगा। इस फार्मूले में सड़कों का सुधार समय-समय पर होता रहेगा और इससे लोगों को गड्ढों से निजात मिलती रहेगी।
प्रदेश के पुल और सड़क निर्माण प्रमुख अभियंता और एमपीआरडीसी के एमडी को इस व्यवस्था के आधार पर सड़कों का ब्यौरा भेजने के लिए कहा गया है ताकि सरकार सड़कों को शार्ट टर्म और परफार्मेंस बेस्ड कैटेगरी में शामिल कर उसकी मॉनिटरिंग करा सके।
लोक निर्माण विभाग के द्वारा इसको लेकर आज जारी निर्देश में कहा गया है कि सड़कों की मरम्मत के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एसटीएमसी (शार्ट टर्म मेंटेनेंस कांट्रैक्ट) और पीबीएमसी (परफार्मेंस बेस्ड मेंटेनेंस कांट्रेक्ट) में काम कराया जाता है। एमपी की सड़कों के मामले में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग सुखवीर सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था के बाद सड़कें टूटने और गड्ढे होने पर त्वरित मेंटेनेंस होगा तो लोगों को परेशानी से निजात मिलेगी। इसके लिए प्रदेश भर में इन कैटेगरी वाली सड़कों की सूची तैयार कर 31 जुलाई तक विभाग को सूचना देने को कहा है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि यह व्यवस्था लगातार प्रभावी होने के बाद सड़कों के खराब होने पर ठेकेदार तुरंत सुधार का काम कराएंगे और सड़कों की क्वालिटी भी सुधरेगी।
सड़कों को लेकर यह जानकारी मांगी सरकार ने
- सड़क की वर्तमान स्थिति कैसी है।
- पहले किस तरह का काम हुआ है, नई सड़क बनी है या उसका मजबूती करण हुआ है या फिर नवीनीकरण हुआ है।
- भविष्य में सड़क निर्माण की कार्ययोजना क्या है।
क्या है एसटीएमसी
- शार्ट टर्म मेंटेनेंस कांट्रेक्ट में ऐसे रोड चुने जाते हैं, जिसमें एक साल की समय सीमा के बाद नए निर्माण, चौड़ीकरण या दोबारा निर्माण प्रस्तावित हो।
- इस कैटेगरी में आने वाली सड़कों का पॉट होल क्रैक्स और रूट्स सुधार कार्य होंगे।
- सीमेंट कांक्रीट रो में जॉइंट रिपेयर, क्रैक रिपेयर, टेक्स्चर सुधार किया जाएगा।
- शोल्डर रिपेयर कार्य होगा।
- जंगल क्लियरेंस होगा।
- पुल और पुलिया मरम्मत की जाएगी।
- साइन बोर्ड, किमी स्टोन, रोड मार्किंग तथा क्रैश बैरियर के काम होंगे।
पीबीएमसी में यह व्यवस्था होगी लागू
- इसमें ऐसी सड़कों को शामिल किया जाएगा, जिसमें 3 साल से पांच साल की अवधि में चौड़ीकरण, दोबारा निर्माण की योजना न हो।
- इस सिस्टम में तीन तरह के काम होते हैं, पहला प्राइमरी मरम्मत, दूसरा पीरियाडिक मेंटेनेंस और तीसरा रूटीन मेंटेनेंस।
प्राइमरी मेंटेनेंस में होगा यह काम
- होल क्रैक्स और रूट्स सुधार होता है
- सीमेंट कांक्रीट रोड में जॉइंट रिपेयर, क्रैक रिपेयर, टेक्स्चर सुधार होता है
- शोल्डर रिपेयर कार्य
- जंगल क्लियरेंस कार्य
- पुल या पुलिया मरम्मत
- साइन बोर्ड, किमी स्टोन, रोड मार्किंग तथा क्रैश बैरियर का काम
पीरियाडिक मेंटेनेंस में ये काम होंगे
- प्रोफाइल करेक्शन कोर्स
- डीबीएम, बीसी पैच वर्क
- प्राइम कोट, टेक कोट
- बीसी रिन्युवल
- पुल पुलियों पर वियरिंग कोट
- पुलों पर बियरिंग और एक्सपांशन जॉइंट्स बदलने का काम
रूटीन मेंटेनेंस में यह सिस्टम होगा प्रभावी
प्राइमरी मेंटेनेंस और पीरियाडिक मेंटेनेंस के कामों को पूरा करने के बाद ठेकेदार शेष अवधि में रूटीन मेंटेनेंस के काम करेंगे। इससे हायर कैटेगरी की सर्विस लेवल कंडीशन बनेगी।
