भोपाल आरटीओ कार्यालय में मेरा अनुभव 

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भोपाल आरटीओ कार्यालय में मेरा अनुभव

कुछ दिनों पहले मैंने ग्रुप पर एक पोस्ट डाली थी जिसमें आरटीओ संबंधित कुछ सवाल किए थे। असली में मैं अपने परिचित का ऑनलाइन लाइसेंस रिन्यूअल के लिए डाला था और यह जानना चाहता था की लाइसेंस रिन्यूअल अपने आप हो जाएगा कि आरटीओ जाना पड़ेगा। काफी सदस्यों ने बहुत सारे सुझाव दिए सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। कुछ जवाब आरटीओ को लेकर एकदम नेगेटिव थे कि वहां बिना एजेंट के कोई काम ही नहीं हो सकता है। ( उस पोस्ट की लिंक https://www.facebook.com/share/p/cW3uD6AVZ7FJ9wM3/?mibextid=oFDknk )

 

लेकिन कुछ सदस्यों ने अपना अनुभव साझा किया और बताया की ऑनलाइन अप्लाई करने के बाद आरटीओ में डॉक्यूमेंट वेरीफाई के लिए जाना पड़ता है, और कार्य हो जाता है।

मैंने उनकी बात का पालन किया और अगले ही दिन आरटीओ सारे डॉक्यूमेंट के ओरिजिनल और कॉपी और आवेदन का प्रिंट आउट लेकर गया। इसके पहले भी मैं कई बार आरटीओ के कार्य स्वयं कर चुका हूं इसलिए मुझे उम्मीद थी कि काम हो तो जाएगा लेकिन शायद आरटीओ के चक्कर एक से ज्यादा लगाने पड़ेंगे। में आश्चर्यचकित तब रह गया जब लाइसेंस शाखा में एक सज्जन यादव जी मिले और उन्होंने मुझे डॉक्यूमेंट एंट्री कर कहां कैसे वेरीफाई करना है कहां क्या करना है सब समझा दिया। आप लोगों को आश्चर्य होगा की मात्रा 45 मिनट बाद रिन्यूड लाइसेंस का कार्ड मेरे हाथ में था। इस दौरान मेरे साथ जो परिचित गए थे वह भी आश्चर्यचकित हो गए कि ऐसा तो कभी अपन ने सुना ही नहीं था। बिना एक भी रुपए ऊपर से दिए या टेबल के नीचे से दिए मात्र 45 मिनट में आरटीओ में काम होना एक सुखद आश्चर्य ही था।

मैं आप लोगों को एक बात बताना चाहूंगा, मेरा पहला लाइसेंस 1989 में बना था जब आरटीओ कलेक्ट्रेट के सामने हुआ करता था। तब मेरे में नई-नई जवानी का जोश था , 18 वर्ष की आयु थी एमपी नगर से आरटीओ तक बस और बट सूअर में चला जाया करता था और तब भी मैंने अपना लर्निंग और फिर परमानेंट लाइसेंस ऐसे ही बनवा लिया था। उन दिनों तो ड्राइविंग टेस्ट भी नहीं हुआ करता था। जब ड्राइविंग की टेस्ट चालू हुए तो अपने परिवार के सदस्यों के ड्राइविंग टेस्ट भी नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन में ले जाकर स्वयं ही करवाया करता था। हो तो तब भी काम स्वयं से हो जाता था लेकिन इतनी सुविधा से नहीं, दो-तीन चक्कर तो लगते ही पढ़ते थे।

चूंकि मेरा पहला लाइसेंस 1989 का है और उसके बाद मोटर अधिनियम बदला, मुझे 2014 तक हर 5 साल में अपना लाइसेंस रिन्यूअल कराना पड़ता था। मेरे ओरिजिनल लाइसेंस बनने के कुछ दिन बाद ही नया कानून आया था जिससे मेरे अधिकांश मित्रो के लाइसेंस 20 साल के लिए बन गए थे।

अब जब मैंने देखा कि परिचित का लाइसेंस इतनी आसानी से रिनुअल हो गया तो मेरा भी एक बहुत पुराना काम जिसमें मेरे नाम में कुछ सुधार होना था मैंने सोचा कर ही लिया जाए। मेरे लाइसेंस के नाम और आधार कार्ड के नाम में एक अक्षर का अंतर था जिसके कारण हाल ही में डीजी लॉकर में लाईसेंस डाउनलोड नही हों पा रहा था।

मैंने नाम सुधार के लिए भी ऑनलाइन आवेदन किया और उससे संबंधित सारी कार्यवाही पूरी की उसके बाद आज मैं दोपहर 1: 35 मिनट पर आरटीओ पहुंचा आप आश्चर्य करेंगे लेकिन ठीक 2:00 बजे मेरा नाम सुधार के साथ में नया कार्ड मेरे हाथ में था। लाइसेंस शाखा के यादव जी को मैं धन्यवाद व्यक्तिगत रूप से नहीं दे सका लेकिन उनके साथ-साथ ही आरटीओ के समस्त कर्मचारियों को मैं हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूं की पब्लिक के लिए आप इतनी सुविधा जो चालू की हैं वह बहुत अच्छी हैं और कृपया इसे ऐसे ही सुविधाजनक बनाए रखिएगा।

कृपया चुनाव के माहोल में इस पोस्ट को राजनैतिक रंग ना दें, हर सरकार ने सुविधाएं बढ़ाई हैं और सब ने पब्लिक ले लिया कुछ न कुछ किया है।

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