नींद की दवा देकर बनाए भय्यू महाराज

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मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने भय्यूजी महाराज सुसाइड केस में जाना कि पहली पत्नी माधवी की मौत के बाद शिष्या पलक उनके नजदीक आने की कोशिश करती है। लेकिन वे आयुषी शर्मा से दूसरी शादी कर लेते हैं। पलक को झटका लगता है।

इधर, महाराज की दूसरी शादी से बेटी कुहू खुश नहीं थी। उसने महाराज को शादी के लिए मना कर दिया था। कुहू के भविष्य को लेकर महाराज चिंतित रहते थे। उन्होंने बातचीत के लिए कुहू को पुणे से इंदौर बुलाया था।

अगले दिन कुहू इंदौर के लिए निकल भी चुकी थी। वो रास्ते में थी, तभी उसे खबर दी गई कि महाराज ने घर में खुद को गोली मार ली है। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने जांच की और सुसाइड मानकर केस की फाइल बंद करने की तैयारी भी कर ली, तभी महाराज के वकील को एक फोन आया। यहां से पुलिस को केस में नया सुराग मिला और पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

भय्यूजी महाराज की मौत आत्महत्या के कारण हुई थी, लेकिन उन्होंने ये कदम क्यों उठाया, ये अब भी रहस्य था। पुलिस इसी गुत्थी को सुलझाने में जुटी थी।
भय्यूजी महाराज की मौत आत्महत्या के कारण हुई थी, लेकिन उन्होंने ये कदम क्यों उठाया, ये अब भी रहस्य था। पुलिस इसी गुत्थी को सुलझाने में जुटी थी।

5 करोड़ की डिमांड का फोन आया भय्यूजी महाराज की मौत के बाद जांच अधिकारी मनोज रत्नाकर ने महाराज की सगी बहनें, पत्नी आयुषी, बेटी कुहू, प्रमुख सेवादार विनायक, गुरूबंधु, डॉक्टर, ड्राइवर और नौकर के बयान लिए थे।

धमकाने वाला कोई और नहीं, महाराज का ड्राइवर रह चुका कैलाश पाटिल निकला। पुलिस ने उसे उठाया और उससे पूछताछ की तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने महाराज के सेवादार विनायक दुधाले, ड्राइवर शरद देशमुख और शिष्या पलक पौराणिक के गठजोड़ का खुलासा किया।

पुलिस ने शरद, विनायक और पलक के बयान लिए। पता चला कि तीनों मिलकर महाराज को आत्महत्या के लिए उकसा रहे थे। यहां से केस में नया मोड़ आ गया।

मीटिंग में तय किया था कि कुछ नहीं बताना पुलिस ने महाराज की पत्नी आयुषी से दोबारा बातचीत की। तब आयुषी ने बताया कि गुरुजी द्वारा आत्महत्या करने के 4-5 दिन बाद ट्रस्ट के सभी लोगों और घर के लोगों ने मीटिंग में मिलकर इस संबंध में चर्चा की थी। तय किया था कि गुरुजी के सम्मान को देखते हुए कोई भी ऐसी बात जो उनके सम्मान को प्रभावित करती हो या ट्रस्ट को प्रभावित करती हो, वह बाहर नहीं बताई जाएगी।

पत्नी आयुषी ने पुलिस की दोबारा पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें बताईं।
पत्नी आयुषी ने पुलिस की दोबारा पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें बताईं।

आयुषी ने पलक, शरद और विनायक के बारे में सब कुछ बताया

1. पलक 24 घंटे गुरुजी (भय्यू महाराज) के घर में रहती थी। महाराज का बाथरूम, बेडरूम, कपबोर्ड बिना गुरुजी की मर्जी के शेयर करती थी। गुरुजी की पहली पत्नी माधवी के समय से वो रह रही थी। माधवी के निधन के कुछ दिन बाद ही बड़ी ननद ने पलक के चाल-चलन को लेकर गुरुजी से कहा था कि यह लड़की ठीक नहीं है। इसे घर से निकाल दो। गुरुजी उनकी बात सुन रहे थे कि इतने में विनायक और शरद ने विरोध करते हुए बड़ी ननद का मुंह बंद करा दिया। उस समय गुरुजी ने बड़ी ननद से कहा था-

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अक्का, मैं फंस गया हूं। मैं खुद इन सबसे बाहर निकलना चाहता हूं। मैं कुछ समय बाद इस लड़की को बाहर निकाल दूंगा। मैं खुद बहुत परेशान हूं।

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2. पैसों का व्यवहार विनायक ही करता था। गुरुजी को किससे मिलना है, किससे नहीं मिलना है यह सब पलक, शरद और विनायक ही डिसाइड करते थे। कई बार उनके अनुयायी, मां-बहनें 8-8 दिन तक गुरुजी से न तो बात कर पाती थी, न मिल पाती थीं।

जब भी गुरुजी की बहनें फोन करती थीं तो विनायक, शरद, पलक जवाब देते थे कि गुरुजी सोए हैं। साधना में हैं, चिढ़े हुए हैं, बीमार हैं, अभी बात नहीं कर पाएंगे। कई बार बहनों और मां के पूछने पर कि भैया आप बात क्यों नहीं करते तो गुरुजी बोलते थे कि अक्का, आप सबका पूरा अधिकार है। मैं इन सबके बीच फंस गया हूं। मैं खुद इन सबसे बाहर निकलना चाहता हूं।

पलक ने ही शरद और विनायक के साथ मिलकर महाराज पर दबाव बनाना शुरू किया था।
पलक ने ही शरद और विनायक के साथ मिलकर महाराज पर दबाव बनाना शुरू किया था।

3. कई बार विनायक खाली चेकबुक पर गुरुजी से साइन करवाता था। गुरुजी ने मुझसे कहा था कि जब वह साइन करवाए तो उसे टोकना। एक बार ऐसा ही हुआ। विनायक गुरुजी से खाली चेकबुक पर साइन करवा रहा था। तब मैंने टोका कि विनायक पहले चेकबुक भर लिया करो। उसके बाद साइन कराया करो। इतना बोलने पर उसने गुरुजी के हाथ से चेकबुक छीन ली और बाहर निकल गया। गुरुजी विनायक के पीछे गए, लेकिन उसने बात नहीं की। गुरुजी अंदर आए तो उनसे पूछा कि क्या हुआ तो बोले-

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वह मुझे बहुत परेशान कर रहा है। मेरी कुछ चीजों को लेकर पलक मुझे बार-बार डराती और धमकाती है। शरद के माध्यम से मुझे बार-बार अकेला पाकर धमकाती है।

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4. पलक बार-बार गुरुजी से पैसे ऐंठती थी। गुरुजी ने बताया कि पलक के पिता फ्रॉड किस्म के व्यक्ति हैं। बेईमान हैं। इस वजह से वो नौकरी से सस्पेंड हुए। मगर बार-बार दबावपूर्वक आश्रम का चार्ज सौंपने के लिए कहते हैं। मजबूरीवश चार्ज दे भी दिया था। गुरुपूर्णिमा से पहले आश्रम के कार्यक्रम के लिए चंदा इकट्‌ठा होता था। पलक के पिता द्वारा फर्जी रसीद कट्‌टे बनवाकर रुपए इकट्‌ठा कर लिए गए थे।

ये बात जब गुरुजी को पता चली तो उन्होंने पलक को फोन कर कहा- आपके पिता ने इस तरह की हरकत की है। पलक ने कहा- मेरे पिता आश्रम आना बंद कर देंगे, लेकिन अब डेढ़ लाख की जगह ढाई लाख रुपए देना शुरू करो।

पलक से गुरुजी ने विनती की कि अब मेरे पास और पैसा नहीं है। मैं इतना पैसा आपको कहां से दूंगा। तब पलक ने कहा- ठीक है। आप अपनी पत्नी को घर से निकालो और मुझसे शादी करो।

भय्यूजी महाराज की आत्महत्या के मामले में इन तीनों को ही आरोपी बनाया गया।
भय्यूजी महाराज की आत्महत्या के मामले में इन तीनों को ही आरोपी बनाया गया।

5. 30 अप्रैल 2017 को पलक गुरुजी के घर शादी तुड़वाने के लिए आई थी। बड़ी ननद मधुमती पाटिल और ननद के पति प्रदीप पाटिल वहां मौजूद थे। पलक ने उनसे कहा- आप ये शादी नहीं करा सकते। ये सिर्फ मुझसे शादी कर सकते हैं। अगर यह शादी हुई तो मैं इस इंसान को बर्बाद कर दूंगी। पलक को ननद ने बाहर निकाला। विनायक और शरद पलक को बाहर लेकर गए। शरद झूठ बोलकर एक महीने तक पलक के घर पर ही रुका रहा।

गुरुजी को कब कौन-सी दवा देना है, यह काम विनायक, शरद और पलक करते थे। तीनों दवाइयों के रैपर हटाकर खुली दवा पॉलीथिन के अंदर रखते थे। हर 8 दिन में गुरुजी को दो इंजेक्शन लगते थे। जब मैं विनायक से पूछती थी कि यह किस चीज का इंजेक्शन है तो वह हमेशा यह बोलकर चुप करा देता था कि ये रूटीन इंजेक्शन है देना पड़ेगा। आप अपना काम करो, मुझे मेरा काम करने दो। पलक का अक्सर शरद के मोबाइल पर फोन आता था। उस समय अगर वह रूम में रहती थी तो शरद गुरुजी को बाथरूम में ले जाकर जबरदस्ती पलक से बात करवाता था।

तीनों ने महाराज के वीडियो-फोटो बनाकर ब्लैकमेल किया भय्यूजी महाराज की बहन अनुराधा ने बताया- पलक पहले मम्मी की सेवा करती थी। बाद में उसका एटीट्यूड थोड़ा अलग हो गया। वो अन्य चीजों पर ध्यान देने लगी। पलक, शरद, विनायक तीनों मिलकर भैया को दवाई देने का काम करते थे। भैया की दूसरी शादी की बात जब तीनों को पता चली तो इन लोगों ने साजिश शुरू कर दी।

इन वीडियो-फोटो को दिखाकर तीनों महाराज को ब्लैकमेल करने लगे थे। इन्हें वायरल करने की धमकी देने लगे। इस वजह से महाराज डिप्रेशन में आ गए।

पुलिस ने 19 जनवरी 2019 को विनायक, पलक और शरद को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 का केस दर्ज किया गया था।

सुसाइड के एक दिन पहले क्या हुआ… आयुषी ने बताया कि सुसाइड के एक दिन पहले 11 जून 2018 को गुरुजी जब घर वापस आए तो वे काफी परेशान थे। शांत और एकदम चुप बैठे थे। कुछ बोल नहीं रहे थे। इतने में विनायक आया और गुरुजी से अकेले में बात करने का कहकर उन्हें बाथरूम में लेकर गया। गुरुजी लौटकर आए तो और ज्यादा परेशान दिखे। गुरुजी से पूछा कि विनायक ने क्या बात की तो उन्होंने कहा-

आरोपी के वकील ने कहा-पारिवारिक तनाव में आत्महत्या की कोर्ट में आरोपियों की तरफ से वकील ने कहा- महाराज पहले से ही डिप्रेशन में थे। अवसाद का कारण बेटी कुहू, पत्नी आयुषी के बीच अत्यधिक मतभेद होना था। महाराज ने पारिवारिक तनाव के कारण आत्महत्या की है।

इस संबंध में गवाह प्रवीण, शशि देशमुख, शरद सेवलकर के बयान कोर्ट में कराए गए। उन्होंने कुहू और आयुषी के बीच मतभेदों की पुष्टि की। बताया कि महाराज की शादी के बाद कुहू और आयुषी के बीच झगड़े होते रहते थे। दोनों एक-दूसरे को पसंद नहीं करती थी। कुहू, आयुषी की शादी को स्वीकार नहीं करती थी। दोनों के झगड़ों के कारण तनाव का वातावरण बनता रहता था। इसी वजह से महाराज को टेंशन रहती थी और वे बीमार रहने लगे।

कोर्ट ने पत्नी-बेटी के मतभेद में सुसाइड का तर्क खारिज किया कोर्ट ने माना कि भय्यूजी महाराज की पत्नी आयुषी और बेटी कुहू के बीच आपसी मतभेद थे, लेकिन क्या ये मतभेद ही आत्महत्या के लिए पर्याप्त कारण था? भय्यू महाराज ने आयुषी से दूसरी शादी की थी, जिससे उनकी एक बेटी धारा हुई। पहली पत्नी की बेटी कुहू ने महाराज की दूसरी शादी को स्वीकार नहीं किया था।

इस वजह से कुहू और आयुषी में भले ही झगड़ा रहा हो, लेकिन आत्महत्या के लिए सिर्फ यही वजह नहीं हो सकती, क्योंकि पारिवारिक कलह के चलते व्यक्ति के पास अंतिम विकल्प के रूप में सिर्फ आत्महत्या ही आखिरी रास्ता नहीं रहता।

कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रकार के पारिवारिक कलह में समय के साथ सुधार की गुंजाइश रहती है। मगर इसके उलट जो पद प्रतिष्ठा भय्यूजी महाराज द्वारा अर्जित की गई थी, यदि उस पर किसी प्रकार का दाग या कलंक लग जाता या उनकी किसी कारण से बदनामी होत तो महाराज को अपयश का सामना करना पड़ता। ये कारण पारिवारिक कलह की तुलना में आत्महत्या के लिए अधिक वाजिब लगता है।

कोर्ट ने 28 जनवरी 2022 को तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 6 साल की सजा सुनाई।

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