दिल्ली की नई मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना की विवादित बयानबाजी ! डॉ आर के पालीवाल

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वैसे उन्हें आम आदमी पार्टी ने विधायकों द्वारा सर्व सम्मति से चुनी हुई दिल्ली की मुख्यमंत्री घोषित किया है लेकिन सब जानते हैं कि वे अरविंद केजरीवाल की पसंद हैं। उन्होंने जेल में रहते हुए उन्हें ही पंद्रह अगस्त पर अपनी जगह झंडा फहराने के लिए नामित किया था और केजरीवाल के जेल में बंद रहने के दौरान वे ही अधिकांश महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रही थी। उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के फैसले को सार्वजनिक करते हुए खुद अरविंद केजरीवाल का यह बयान कि वे आगामी चुनाव तक कुछ महीने इस पद पर रहेंगी और दोबारा जीतने पर वे ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इस बात को दिल्ली के दूसरे मंत्री सौरभ भारद्वाज ने और अच्छे से यह कहकर समझा दिया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल थे और वही फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे।इसीलिए भाजपा आदि विपक्षी दल आतिशी को प्रॉक्सी मुख्यमंत्री और खड़ाऊ मुख्यमंत्री कह रहे हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने भी अपने विधायकों से मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार छीन लिया और केंद्रीय हाई कमान अपने ऐसे कठपुतली मुख्यमंत्री चुनता है जिन्हें कोई मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं मानता। इसलिए भाजपा और कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों को भी यह नैतिक अधिकार नहीं है कि वे दूसरे दलों की तानाशाही प्रवृति पर उंगली उठाएं।
अपने मुख्यमंत्री बनने के बाद आतिशी का यह बयान भी आया है कि अरविंद केजरीवाल बहुत महान जनसेवक और त्यागी हैं क्योंकि वे आयकर विभाग के कमिश्नर की नौकरी छोड़कर आए हैं जहां वे सात पुश्तों की कमाई कर सकते थे। उनका यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, बचकाना,हास्यास्पद और झूठ का पुलिंदा है। इस बयान के लिए आयकर विभाग के मेरे जैसे बहुत से अधिकारी और उनकी एसोसिएशन मानहानि का मुकदमा दायर कर सकते हैं। हमारे यहां न्याय इतना महंगा और कछुआ गति से चलता है कि समान्यत: लोग कोर्ट कचहरी परिसर में जाने से कतराते हैं इसीलिए आतिशी और अरविन्द केजरीवाल जैसे बड़बोले नेता कुछ भी ऊलजुलूल बयान देते रहते हैं। दरअसल आतिशी का यह बयान एक तरह से अरविंद केजरीवाल के उसी पुराने बयान की पुनरावृति है जिसमें उन्होंने खुद को महान साबित करने के लिए कहा था कि मुझे संपति बनानी होती तो मैं आयकर की नौकरी छोड़कर नहीं आता जिसमें इंस्पेक्टर भी करोड़ों कमा लेता है जबकि मैं तो कमिश्नर था। सच्चाई यह है कि अरविंद केजरीवाल ने कमिश्नर पद पर पहुंचने के काफी पहले विभाग छोड़ दिया था। उनकी पत्नि सुनीता केजरीवाल जरुर कमिश्नर पद तक पहुंची थी।
आतिशी को यह खुलासा करना चाहिए कि वे आयकर विभाग के जिन उच्च अधिकारियों को बदनाम कर अपने नेता अरविंद केजरीवाल को महान साबित करना चाहती हैं वे उनके नाम का खुलासा करें और यह भी बताएं कि आयकर विभाग में सात पुश्तों की कमाई की सूचना उन्हें किससे मिली है। आयकर विभाग में बहुत से उच्च अधिकारियों ने अपना पूरा जीवन काले धन वालों को पकड़ने में लगाया है। उन पर एक वाहियात हवाई आरोप लगाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। आतिशी जिस दल से आती हैं वह देश का ऐसा इकलौता राष्ट्रीय दल है जिसका मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और एक ताकतवर केबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन एक साथ तिहाड़ जेल में बंद थे। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भले ही लंबी जेल काटकर बेल पर बाहर आ गए लेकिन किसी भी न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त नहीं किया है। ऐसे में अपने नेताओं के गिरेबान में झांकने के बजाय आयकर विभाग के अधिकारियों को नाहक बदनाम करना मंत्री और मुख्यमंत्री जैसा उच्च संवैधानिक पद संभाल रहे व्यक्ति के लिए अमर्यादित आचरण है। आतिशी को अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

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