जम्मू भाजपा दफ्तर में टिकट कटने वालों का हंगामा

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जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सोमवार को कैंडिडेट्स की 3 लिस्ट जारी की। पहली लिस्ट सुबह 10 बजे आई। इसमें 3 फेज के 44 कैंडिडेट्स के नाम थे, लेकिन इसे थोड़ी ही देर में डिलीट कर दिया।

इस लिस्ट के आते ही जम्मू भाजपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन शुरू हो गया था। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी ने पैराशूट प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना अपने केबिन में चले गए और दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद बाहर निकले और कहा- परेशान ना हों, सभी से पर्सनली बात करूंगा।

बात हाईकमान तक पहुंची। पहली लिस्ट जारी होने के 2 घंटे बाद 12 बजे एक और लिस्ट आई, इसमें सिर्फ फर्स्ट फेज के 15 कैंडिडेट्स के नाम थे। रविंद्र रैना ने कहा, “अभी फोकस 18 सितंबर को होने वाली फर्स्ट फेज की वोटिंग पर है। मैं हर कार्यकर्ता से पर्सनली बात करूंगा।”

इसके बाद 2 बजकर 45 मिनट पर एक और लिस्ट आई। इसमें सिर्फ एक नाम था। कोंकरनाग से चौधरी रोशन हुसैन के नाम की घोषणा की गई थी।

जम्मू-कश्मीर की 90 सीटों के लिए 18 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच 3 चरणों में मतदान होंगे। नतीजे 4 अक्टूबर 2024 को आएंगे। जीत के लिए बहुमत का आंकड़ा 46 है।

25 अगस्त को भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी। इसमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई।
25 अगस्त को भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी। इसमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई।

लिस्ट और हंगामे से जुड़ी 2 और बातें

1. पहली लिस्ट को पार्टी प्रवक्ता ने टाइपिंग एरर बताया था
पहली लिस्ट जारी होने के बाद डिलीट कर दी गई थी। दैनिक भास्कर ने इस पर जम्मू-कश्मीर के मीडिया प्रभारी सज्जाद से सवाल किया। उन्होंने बताया कि 44 उम्मीदवारों की सूची टाइपिंग एरर के कारण रद्द की गई है।

2. ओमी खजूरिया को टिकट नहीं मिला, सपोर्ट बोले- इस्तीफा देंगे
जम्मू दफ्तर में ओमी खजुरिया के नाम के नारे लगे, जिनका नाम पहली लिस्ट में नहीं था। वे जम्मू उत्तर से चुनाव लड़ते आए हैं, यहां कांग्रेस से भाजपा में आए शाम लाल शर्मा को टिकट दिया गया था। इसी लिस्ट को पार्टी ने रोक दिया है।

भाजपा ने सुबह 44 नाम जारी किए थे, 15 रिपीट किए, 29 रोके

भाजपा ने ये लिस्ट सुबह 10 बजे जारी की थी। दो घंटे बाद इसे वापस ले लिया था।
भाजपा ने ये लिस्ट सुबह 10 बजे जारी की थी। दो घंटे बाद इसे वापस ले लिया था।

मोदी-शाह समेत 40 स्टार प्रचारक बनाए

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की है। लिस्ट में शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और स्मृति ईरानी का भी नाम है।

पार्टी नेराष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह और शाजिया इल्मी को मीडिया कोऑर्डिनेटर अपॉइंट किया है। पंजाब के मीडिया कोऑर्डिनेटर विनीत जोशी भी जम्मू-कश्मीर की टीम का हिस्सा होंगे।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव: भाजपा से पहले 3 पार्टियां जारी कर चुकीं लिस्ट

  • डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी : जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) ने विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट 25 अगस्त को जारी की। लिस्ट में 13 नामों का ऐलान किया गया है। पार्टी ने गांदरबल में नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने कैसर सुल्तान गनई को उतारा है। वहीं, पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी को डोडा पूर्व और राज्य के पूर्व एडवोकेट जनरल असलम गनी को भद्रवाह से प्रत्याशी बनाया है।
  • आम आदमी पार्टी (AAP) : AAP की पहली लिस्ट जारी हो गई है। सात उम्मीदवारों के नाम हैं। पार्टी ने पुलवामा से फैयाज अहमद सोफी, राजपुरा से मुद्दसिर हुसैन, देवसर से शेख फिदा हुसैन, डोरू से मोहसिन शफकत मीर, डोडा से मेहराज दीन मलिक, डोडा वेस्ट से यासिर शफी मट्टो और बनिहाल से मुदास्सिर अजमत मीर को टिकट दिया है।
  • बैन जमात-ए-इस्लामी पार्टी: जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता 7 सीटों पर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। गुलाम कादिर वानी के नेतृत्व वाली पार्टी को 2019 में केंद्र सरकार ने UAPA एक्ट 1967 के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित कर बैन कर दिया था। इस साल फरवरी में प्रतिबंध 5 साल बढ़ा दिया गया। पार्टी कुलगाम, देवसर, अनंतनाग-बिजबेहरा, शोपियां-ज़ैनपोरा, पुलवामा, राजपोरा और त्राल सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

2014 में हुए थे आखिरी विधानसभा चुनाव
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब BJP और PDP ने गठबंधन सरकार बनाई थी। 2018 में गठबंधन टूटने के बाद सरकार गिर गई थी। इसके बाद राज्य में 6 महीने तक राज्यपाल शासन (उस समय जम्मू-कश्मीर संविधान के अनुसार) रहा। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।

राष्ट्रपति शासन के बीच ही 2019 के लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें BJP भारी बहुमत के साथ केंद्र में लौटी। इसके बाद 5 अगस्त 2019 को BJP सरकार ने आर्टिकल-370 खत्म करके राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। इस तरह जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।

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