मध्य प्रदेश में 968 थानों में से 627 के परिसीमन का काम लगभग पूरा

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भोपाल। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर लगभग डेढ़ माह तक चली कवायद के बाद प्रदेश के कुल 968 थानों में से 627 थानों के परिसीमन का काम लगभग पूरा हो चुका है। इनमें से इंदौर देहात और भोपाल देहात सहित 57 जिले ऐसे हैं, जिनमें 37 जिलों में परिसीमन की अधिसूचना जारी भी हो चुकी है, बचे 20 की अगले माह जारी होने की उम्मीद है।

परिसमीन के साथ थानों की सीमाएं बदलने का आमजन को यह लाभ होगा कि उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। परिसीमन में उनके गांव या कस्बे को पास के थाने में जोड़ा जा रहा है। इसके लिए हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनी है। नए सिरे से सीमाएं निर्धारित करने में इस बात का ध्यान रखा गया है कि थानों का क्षेत्र, अपराध, आबादी लगभग बराबर हो। इससे थानों में अपराधों का दबाव भी लगभग समान रहेगा।
थानों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने के लिए 20 वर्ष से कोशिश चल रही थी। गृह विभाग ने अक्टूबर 2004 में नए सिरे से सीमाएं निर्धारित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक अमल नहीं हो पाया था। मात्र उन्हीं थानों की सीमाएं बदली जा रही थीं, जो नए जिले बनने से प्रभावित हो रहे थे। इसके अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद भोपाल और इंदौर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के थानों की सीमाएं बदली थीं। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने तीन जनवरी को इसके लिए फिर निर्देश जारी किया। इसके बाद कार्यवाही तेज हुई।

अब यह चुनौती
– जो गांव या कस्बे दूसरे थाने में जुड़े हैं, वहां हुए अपराध का रिकार्ड अलग कर दूसरे थानों में भेजना होगा।

– आम व्यक्ति को भी यह बताना होगा कि कौन सा गांव या कस्बा अब किस थाना क्षेत्र में आ गया है।

– थानों में हर गांव की एक डायरी होती है, उसका स्थानांतरण करना होगा।

– हर थाना क्षेत्र में घटित होने वाले अपराध के आंकड़े भी बदल जाएंगे।

– अब इस बात पर बहस चल रही है कि पहले हुए अपराध का आंकड़ा भी नए थाना क्षेत्र में जुड़ेगा या नए अपराध का।

– पहले से जिन प्रकरणों में विवेचना चल रही है, उन्हें बीच में दूसरे थानों में स्थानांतरित करने से जांच प्रक्रिया में विलंब हो सकता है।

– कई थानों की सीमा पुनर्निर्धारण में सहमति ही नहीं बन पा रही है। इसमें भोपाल शहर के थाने भी शामिल हैं।

– पुलिस आयुक्त व्यवस्था वाले भोपाल और इंदौर शहर में थानों की सीमाएं बदलने के साथ ही जोन की सीमा भी बदलेगी, जिससे नई सीमा बनाने में मुश्किल आ रही है।

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