मुसद्दी भइया की चौपाल! का रडुअन के राम अलग हैं ?

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बहुत दिन से तबियत ढीली ढाली चल रही है।गला खराब है इसलिए फोन का इस्तेमाल भी ज्यादा नही कर रहा हूं।इसके चलते मुसद्दी भइया से भी बात नही की।क्योंकि एक तो वे आवाज सुनते ही जान जाते कि कुछ गड़बड़ है,दूसरे बिना पूछे फ़ोन पर ही जूता परेड कर देते।इसलिए बात टलती रही।
लेकिन आज अचानक भरी दोपहर में भइया का फोन आ गया।गला साफ करके पालागन किया।हमेशा की तरह झंडा बुलंद रहने और जूता पुजते रहने का आशीर्वाद मिला।भइया कुछ कह पाते उससे पहले मैंने ही सवाल दाग दिया – भइया सब ठीक तो है।आप अचानक दोपहर में याद कर रहे हैं। मुसद्दी भइया ने बीच में ही रोक दिया।वे बोले लो सुकुल दद्दा से बात करो। जे लपकू ठाकुर अजुध्या घूम के आए हैं।इन्होंने आते ही चौपाल पर सबकी बोलती बंद कर रखी है।इनके सवाल का जवाब किसी के पास नही है।आज तो अपने सुकुल दद्दा भी पानी मांग गए हैं। वे चाहते हैं कि लपकू ठाकुर के सवाल का जवाब तुम या तो खुद या फिर अपने ज्ञानी दोस्तों की मदद से दो।कुछ भी करो लेकिन ये लौंझड़ खत्म कराओ।
इतना कह कर मुसद्दी भइया ने फोन सुकुल दद्दा को पकड़ा दिया।मेरे पालागन को अनसुना करते हुए दद्दा ने अचानक अंग्रेजी में बात शुरू कर दी।आपको पता ही है कि सुकुल दद्दा अंग्रेजों के जमाने के मेट्रिक पास हैं।रेलवे में अंग्रेजों के साथ मुलाजमत की है इसलिए आज भी मूड में आने पर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं।दद्दा जीवन के आठ दशक पार कर चुके हैं। उखरा के “मान्य” हैं।इसलिए उन्हें गांव में सबसे ऊपर माना जाता है।
लेकिन दद्दा ने जैसे ही कहा कि.. दिस लपकू हैज बिकम ए प्राब्लम फॉर इंटायर चौपाल।दो ही इज आस्किंग ए वेरी वैलिड क्विश्चन.. वी आर अनेबल टू आंसर! यू जस्ट लिशिन टू हिम एंड सॉल्व दिस प्राब्लम।
दद्दा की बात सुन कर मेरी समझ में आ गया कि समस्या क्या है और दद्दा अंग्रेजी क्यों बोल रहे हैं। मैंने भी बिना कोई सवाल किए दद्दा से कहा – आप लपकू ठाकुर को फोन दीजिए।मैं उनसे बात करता हूं।
लपकू ठाकुर की बात सुनने से पहले यह जान लीजिए कि उनका असली नाम ठाकुर लटूरी प्रसाद सिंह है।पढ़े लिखे हैं।सरकारी मुलाजिम रहे हैं।उन्हें अपना नाम कभी पसंद नहीं रहा।एक बार सनद में चढ़ गया तो फिर कौन लिखा पढ़ी करके बदलवाए।इसलिए उन्होंने नाम को छोटा करके एल पी एस चौहान कर लिया।लेकिन गांव में वे एलपीएस चौहान से कब लपकू ठाकुर हो गए, किसी को याद नहीं।उम्र के अंतिम चरण में उन्होंने भी अपने इस नाम के साथ सामंजस्य बैठा लिया है।
खैर दद्दा ने जैसे ही फोन लपकू ठाकुर को दिया वैसे ही उन्होंने बोलना शुरू कर दिया।शुद्ध उच्चारण और लय में ठाकुर साहब ऐसे बोल रहे थे जैसे सामने टेली प्रॉम्पटर लगा हो।
उन्होंने कहा – लल्ला हम दो दिन पहले अजुध्या गए थे!राम जी के दर्शन करने!हम पहले भी गए थे!तंबू में बैठे राम लला को भी हमने देखा था!लेकिन इस बार एक बात मेरी समझ में नहीं आई!राम जी अकेले क्यों खड़े हैं!
हमने पूरी जिंदगी में भगवान राम को अकेले नही देखा!न तो गांव की रामलीला में न फर्रुखाबाद के राम मंदिर में।जहां कही भी देखे वहां राम जी सीता जी ,लक्ष्मण जी और हनुमान जी के साथ ही विराजे हैं!रामलीला में भी बचपन में उन्हें तीनों भाइयों के साथ,ऋषि विश्वमित्र के साथ जाते समय भाई लक्ष्मण के साथ और वनवास को जाते समय सीता माता और लक्ष्मण के साथ दिखाया जाता है।
राम हमने कभी अकेले नही देखे!लेकिन अरबों रुपए की लागत से अजुध्या में बन रहे राम मंदिर राम लला अकेले खड़े हैं!ऐसा क्यों!
यही नहीं हमने निर्माणाधीन मंदिर में लगाए गए स्तंभ भी देखे और उन पर उकेरी गई प्रतिमाएं भी देखीं!हमें यह देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ कि राम जी के मंदिर में देवताओं के ऊपर नृत्य मुद्रा में अप्सराएं दिखाई गईं हैं!हमने ये तो सुना है कि देवताओं के राजा इंद्र के दरबार में अप्सराएं नृत्य करती थीं।लेकिन देवता नीचे और अप्सरा ऊपर ,ऐसा तो न कहीं देखा और न कभी सुना!
चूंकि हमारा फोन जमा करा लिया गया था इसलिए हम वहां की फोटो तो नही खींच पाए!लेकिन हमने सब कुछ अपनी पकी आंखों से देखा साफ साफ है!साथ गए लोगों से भी बात की।सबने यही कहा कि राम जी अकेले तो कभी नहीं देखे!
लपकू ठाकुर अपनी रौ में बहे जा रहे थे!
हमने वहां कुछ लोगों से भी पूछा कि राम जी अकेले क्यों हैं!किसी ने कोई संतोष जनक उत्तर नहीं दिया। हां अजुध्या के लोग यह जरूर कह रहे थे कि हमारे राम इतने काले तो नही थे जितने जे राम हैं!
हां… सरयू के तट पर एक मठिया में एक साधू बाबा ने जरूर एक बात कही!हमारे सवाल पर उन्होंने कहा – जैसा यजमान वैसा भगवान!भगवान को लाने का दावा करने वाले देश के “चक्रवर्ती सम्राट” भी अकेले हैं और प्रदेश के उनके सेनापति भी अकेले!जब वे अकेले तो उनके भगवान सबके साथ कैसे हो सकते हैं?इसलिए दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालो!दर्शन हो गए अब घर जाओ!ज्यादा अजुध्या घूमोगे तो न जाने कितने सवाल मन में आयेंगे!
मैंने साधू बाबा से कहा भी कि बाबा स्वयंभू चक्रवर्ती सम्राट तो अपनी मर्जी से अकेले हैं।इस पर बाबा जी ने मुझे डांट दिया!वे बोले छोटा मुंह बड़ी बात मत करो!उम्र निकल गई पर अकल नही आई!मैंने उन्हें टोका और कहा कि बाबा मैं पढ़ा लिखा हूं। सरकारी मुलाजमत की है।अभी भी अखबार पढ़ता हूं।टीवी पर खबरें भी देखता सुनता हूं।घर में चौथी पीढ़ी को देख लिया है।आप ऐसे क्यों कह रहे हो।
इस पर बाबा ने जोर का ठहाका लगाया और कहा – तो फिर तुमने यह भी सुना होगा कि राम आ गए अब कृष्ण को लायेंगे!तुम संसारी लोग कुछ समझते नही हो!अरे सम्राट जितना राम को मानते हैं उतना ही कृष्ण को भी मानते हैं। हां राम की मर्यादाओं से ज्यादा कृष्ण की लीलाओं का अनुसरण करते हैं..समझे..।अब मेरा दिमाग मत खाओ कुछ अपनी अकल भी लगाओ। नही समझ आ रहा तो घर लौट जाओ!यह कहा कर साधू बाबा ने हमें भगा दिया।
उखरा आकर मैंने यह बात पहले मुसद्दी पंडित से पूछी!अतिबल,अनोखे,रामदीन,बल्लू,गंगादीन और सरजू और न जाने कितने जनन के सामने जा बात पूछी। पर कोई हमारी बात का उत्तर ही नही दे रहा।हमने सुकुल दद्दा के दरबार में भी अपनी फरियाद रखी। कइयों बार पूछी।हमें लग रहा है कि हमारे सवाल से सुकुल दद्दा नरभसा गए हैं।इसलिए तुम्हें लगवा दिया।
अब लल्ला तुम्हीं बताओ कि अजुध्या में राम जी अकेले क्यों हैं! भरत,लक्ष्मण,शत्रुघ्न,सीता मैया और हनुमान जी कहां गए?राम जी राजा दशरथ ने जब वनवास दिया था तब भी सीता मैया और लक्ष्मण जी साथ थे।फिर अब क्यों नहीं?क्या खरबों की लागत से बने मंदिर में इन सबको राम जी से अलग रखा जाएगा!या फिर अब राम भी अलग अलग होंगे!रडुओं के अलग और गृहस्थों के अलग! अब तुम्हीं बताओ कि सच्चाई क्या है!
यह कहते कहते लपकू ठाकुर उर्फ लटूरी प्रसाद सिंह चौहान ने फोन मुसद्दी भइया के हाथ में दे दिया। भइया ने हंसते हुए कहा – सुन ली लपकू ठाकुर की बात।इन्होंने सुकुल दद्दा कच्चे कर दिए।इनकी शंका का समाधान तुम कराओ।तुम्हारे तो दोस्त बहुत ज्ञानी हैं।
इसके साथ ही भइया ने फोन काट दिया।सब आप ही बताओ कि लपकू ठाकुर के सवाल का जवाब क्या है?
अरुण दीक्षित
24 फरबरी 24

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