भाजपाई बेरियो ने नाथ की दाल नही गलने दी। (श्याम चौरसिया)

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पूर्व cm कमलनाथ पूरे 10 दिन सनसनी फैलाने,अटकलों का बाजार गर्म करने के बाद आखिर केशरिया होने की बजाय कांग्रेस में ही टिके रहने के लिए राजी हो गए।
नाथ के पाला बदल बीजेपी में छलांग लगाने से कांग्रेस और राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की फजियत तो होती ही साथ ही प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगताओर राजा दिग्गी के दबाब की राजनीति,गुटबाजी भी बेपर्दा होती।
सबसे ज्यादा झटका राहुल की न्याय यात्रा को लगता।
भले ही नाथ अभी रुक गए हो। मगर पिछले 10 दिनों में जबलपुर,धार, दमोह, उज्जैन, सहित 07 जिलों में सेकड़ो कांग्रेसी बीजेपी की चिलम भरने पहुच गए।ये सिलसिला अभी थमा नही है।जारी है।
असल मे 10,जनपद ओर खुद राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष पटवारी को 06 दशक पुराने वफादार नाथ को हर कीमत पर रोकने की हिदायत दे,चेता दिया। 10,जनपद के सख्त तेवरों की खबर नाथ को लगते ही नाथ अपने पैर पसार पटवारी को पटरी पर ले आए।इसके लिए पूर्व काबीना मन्त्री सज्जन सिह वर्मा को तैनात किया बताते। वर्मा ने अपने से जूनियर पटवारी के सामने कुछ शर्तें रखी। और शर्त मानते ही नाथ के तेवर ढीले पड़ गए।
असल मे 10,जनपद यहां भी गच्चा खा गया। सुरागिए मुस्तेद होते तो 10 जनपद को ये खबर जरूर देते कि कमलनाथ एंड टीम को बीजेपी का प्रदेश नेतृत्व कबूल नही कर रहा है । न प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, न पूर्व cm शिवराज सिंह चौहान न केंद्रीय मंत्री ज्योति रादित्य सिंधिया, न काबीना मन्त्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अन्य नेता नाथ के आने से बीजेपी का कोई फायदा आंक,तोल रहे थे। उल्टे भारी नुकसान,फजियत,जग हसाई की संभावना लगने लगी थी।
सिंधिया तो नाथ की प्रताड़ना की ही देन भाजपा को है।भला सिंधिया नाथ के दिए घावों,कटु वचनों को भूल सकते है? सिंधिया क्या कोई भी भाजपाई नही भूल सकता। सिंधिया नाथ के व्यवसायिक आचरण,प्रवर्तियो से खासे परिचित है।यदि नाथ उन्ही आचरणों को बीजेपी में जीते तो बीजेपी की तमाम शुचिता,गरिमा, मर्यादा,आदर्श, मूल्यों का जनाजा निकलने में देर नही लगती। सिंधिया के इस तर्क ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को नाथ के लिए कपाट न खोलने के लिए मजबूर कर दिया।
यदि बीजेपी के इस निर्णय का सुराग 10,जनपद को लग जाता तो 10 जनपद नाथ को मानने की बजाय अधर में लटका मिसाल पेश कर सकता था।इस मिसाल के दूरगामी फायदे कांग्रेस को मिलते ओर कांग्रेस से कूदने वालों के ताते में कमी आ सकती थी।
10 दिन चले राजनेतिक धमाल ने नाथ की निष्ठा को संदिग्ध तो कर ही दिया। इंद्रा जी के तीसरे पुत्र नाथ पर शायद की कोई पहले की तरह आंख मूंद भरोसा कर सकेगा।

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