अजनार को वापस सदानीरा में बदलने का बीड़ा प्रेस क्लब ने उठाया। (जगदीश रघुवंशी/श्याम चोरसिया)
जनसंख्या विस्फोट ओर नल-जल क्रांति ने कभी सदानीरा रही अजनार नदी को नाले में बदल पर्यावरण का संकट खड़ा कर दिया। पिछले 35 सालों में अजनार नाले को वापस सदानीरा नदी में बदलने के अनेक टोने टोटके हुए। मगर हर टोने टोटके में जनहित से ज्यादा स्वहित होने से वे फुस्सा साबित हो गए।सबसे बड़ा टोटका 1998-99 में 96 लाख से अधिक फूँक कर अजनार नदी में मई जून में नाव तेराकर आंखों में धूल झोंकी गयी थी। इस छल, प्रपंच से खफा ब्यावरा ने तत्कालीन cm दिग्गविजय सिंह के अजनार भृमण, प्रवास के दौरान ब्यावरा बन्द रख कर करारा जबाब दिया था। इस नोटकी से ब्यावरा का विश्वास सत्ता और प्रशासन से उठ गया। फिर इसी तरह का प्रयास 2011-12 में भी हुआ था। मगर काफी हाथ पैर मारने के बाबजूद ब्यावरा भामाशाह बनने से कतरा गया।
इस दौरान शासन स्तर पर सरोवर-घरोवर सहित अन्य योजनाओं को आकार दिया। मगर उन तमाम योजनाओं का दम जन संख्या विस्फ़ोट, अतिक्रमणों, बढ़ते प्रेस्टिसाइड के चलन, नदी,नालों,कुए जैसी अमूल्य विरासतों के महत्व को नजरअंदाज करने से निकल गया।कठोर सरकारी नियम कायदे ओर विभागीय तालमेल न होना भी जम्मेदार रहा।
पर तत्कालीन sdm sc वर्मा इस मामले में अपवाद रहे।उनमें अजनार को जीवित करने का जनून था।नतीजन 2008-9 में उन्होंने अपने प्रभाव,कद का प्रयोग करते हुए अजनार में जेसीबी,पोकलैंड मशीनें, डंपर उतार दिए। 40-42 दिनों में किल्लेवाला घाट से लेकर अंजलीलाल मंदिर तक लगभग 01 मीटर गहरी खुदाई करवा डाली। मटेरियल बिना रॉयल्टी के सड़क ठेकेदारों से उठवा दिया।डंपर,जेसीबी भी ठेकेदारों की थी। न हल्दी लगी न चुना। रंग चोखा। इसके लिए उन्होंने ब्यावरा को कोई तकलीफ नही दी। उनके इस हिमालयीन अभियान को जनप्रतिनिधियों से अधिक जनता का सहयोग मिला था। अल सुबह लोग अजनार से लोहा लेने पहुच जाते थे। श्री वर्मा भी अफसरी घाट पर रख एक आम नागरिक की तरह तगारिया फेंकते थे।
2013 से लय ओर ताल ऐसी टूटी कि फिर किसी sdm या कलेक्टर ने रुचि नही ली।
अजनार की बदहाली से भावी पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल प्रतीत नही होता है। यही गत नरसिंहगढ के बड़े-छोटे तालाब, तलेन, खिलचीपुर- गाडगंगा, सारंगपुर- कालीसिंध, कुरावर-पीलूखेड़ी- पार्वती नदियों सहित अन्य नदी,नालों की है। सेप्टिक टैंक में बदल चुके ये जल स्त्रोतअपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ रहे है।
असल मे इन जलस्रोतों का बंटाधार निस्तार का जहरीला पानी उलीचने वाले नालों,नालियों ने किया है।यदि निस्तार का पानी उलीचने वाले 04 नालों का रुख मोड़ दिया जाए तो नरसिंहगढ का सरोवर वापस चकाचक हो सकता है। इसी तरह से अजनार को गंदे नाले में बदलने के जिम्मेदार 08 निस्तारी नालियों/नालों का तकनीकी समाधान कर दिया जाए तो अजनार को राहत मिल सकती है।असल मे इसे नागरिकों ने ही विशाल सेप्टिक टैंक में बदल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
आरएसएस की प्रेरणा से प्रेस क्लब ने अब अजनार शुद्धिकरण/ गहरीकरण का बीड़ा उठाया है। प्रेस क्लब अब प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी की मोहन यादव सरकार के दोनों मंत्रियो, जिला प्रशासन के सहयोग से मार्च अंत मे भगीरथी जंग छेड़ देगी। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। प्रेस क्लब सदस्यों ने अपने अनुभव,प्रभाव, कद,संपर्कों का लाभ इस भगीरथी लक्ष्य की प्राप्ति में होमना तय किया है।सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल में अजनार के गर्भ को जेसीबी,पोकलैंड मशीनें भेदती दिख सकती है ।
