जब रक्षक ही भक्षक बन जायें
जब रक्षक ही भक्षक बन जायें
इंदौर में एक ही परिवार के 8 लोग घर में आग लगने से झुलस कर मर गये ? क्या हुआ ? कुछ नहीं हुआ ! मीडिया का कहना है कि फायर ब्रिगेड 1 घंटे बाद आई ? तो क्या हुआ ? ऐसा तो होता ही रहता है ! ऐसा ही है मतलब फायर ब्रिगेड विभाग कोई सुबह 4 बजे आग बुझाने की गारंटी थोड़े ही लेता है ? ये हिंदुस्तानी भी कभी भी आग लगा लेते हैं और दोष प्रशासन को देते हैं , टाइम देख के तो आग लगाओ ? सुबह 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक कितना अच्छा समय होता है, सब जग रहे होते हैं, पड़ोसी ही बुझा देते आग, हमको परेशान होने की जरूरत ही नहीं पड़ती ? फायर ब्रिगेड वाले भले ही 8 लोगों की जिंदगियां खाक होने के 1 घंटे बाद आये , लेकिन आये तो ना ? क्या ये उपलब्धि कम हैं ? शर्म नहीं आती करोड़ों रुपए की अग्नि शमन गाड़ियों और संसाधनों से लेस अग्नि शमन विभाग पर दोष लगाते ? हर महीने लाखों रुपए कि तनख्वाह पाने वाले दर्जनों प्रशिक्षित अग्नि शमन कर्मचारियों पर लांछन लगाते ? धिक्कार है तुम पर मीडिया वालों, क्यों हो गये ना चुप ? बोटी जो मुँह में ठूंस दी गयी है I
निकम्मा प्रशासन कभी कार की चार्जिंग को कारण बताता रहा, कभी दरवाजों पर डिजिटल लॉक होने की बात करता रहा और इंदौर की जनता को भ्रमित करता रहा लेकिन सच्चाई सामने आई कि MPEB के बिजली के खंबों में लटके वॉयरों में ही शॉर्ट सर्किट हुआ था , भारत की जनता मरती रहेगी और प्रशासनिक तंत्र यूं ही लापरवाही, भृष्टाचार, लालच, अहंकार, कमीनेपन का नंंगा नाच नाचता रहेगा ? इंदौर में ही भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से 35 लोग मर गये ? क्या हुआ ? सिर्फ निलंबन ? इस सामूहिक नरसंहार करने वालों के साथ क्यों नरमाई बरती जा रही है ? क्या मिली भगत है ? लाखों रुपए की तनख्वाह पाते सरकारी कर्मचारी प्रदेश के निर्दोष लोगों की जान के दुश्मन बन गये हैं लेकिन किसी भी जिम्मेदार की आँखों में शर्म तक नहीं ? कल एक जनता के दुलारे जनप्रतिनिधि कह रहे थे कि गाय के माँस को खरीदने – बेचने वाले को नहीं बख्शेंगे ? तो क्या भागीरथपुरा में मरने वाले जानवर से बदतर हैं ? इंसान की कीमत अब पशुओं से कमतर हो गयी ? क्यों नहीं भागीरथपुरा के दोषियों पर NSA लगाते ? क्यों नहीं इंदौर में एक परिवार के 8 लोगों की मौत के दोषियों को जेल में डाल देते ? बेईमानों को विधि नहीं, डंडा चाहिए ?
शहपुरा में 3 साल पुराना बना पुल टूट गया, सैकड़ों करोड़ों रुपए डूब गये, 3 लोग कीड़े – मकोड़ों की तरह मर गये, क्या हुआ, कुछ नहीं ? इंदौर के एम वाय अस्पताल में 2 दुधमुहेँ बच्चों को चूहे कुतर गये, क्या हुआ, कुछ नहीं ? छिंदवाड़ा में 35 बच्चे मर गये, क्या हुआ, कुछ नहीं ? कोई सरकारी जिम्मेदार अधिकारी को कोई सजा मिली ? अगर मध्य प्रदेश का सरकारी तंत्र जनता को महफूज़ रख पाने में ऐसे ही अक्षम रहा तो वो दिन दूर नहीं की जब सारे सक्षम लोग मध्य प्रदेश से भाग जायेंगे और कोई भी मध्य प्रदेश आने का जोखिम क्यों लेगा ? अभ्युदय मध्य प्रदेश के सारे नारे भागीरथपुरा नरसंहार , छिंदवाड़ा जनसंहार , इंदौर अग्निकांड और टूटते पुलों की भेंट चढ़ जायेंगे I ग्लोबल इनवेस्टर मीट और रीजनल इनवेस्टर मीट सिर्फ कागजों पर ही रह जायेगी ?
लेकिन शर्म की बात है कि जनता ये सब क्यों सहने को मजबूर है ? जो सरकारी तंत्र जनता को साफ पीने का पानी, बिना मिलावट दवाई , साफ हवा और खाना पकाने की गैस तक मुहैया नहीं करवा पा रहा हो तो जनता क्यों इन सरकारी निकम्मों के हर जुल्म , गुलामों की तरह सहने को तैयार बैठी है ? जनता को हर मोर्चे पर स्वयँ पहल करनी होगी, कोई और तुम्हे और तुम्हारे बच्चों को बुनियादी सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है तो छीन लो इन बेईमानों से उनके अधिकार जो अधिकार तुमने ही तो इन्हे सौंपे हैं ?
नमस्कार
राजेंद्र सोनी
संपादक, लेखक , चिंतक
मुक्ति की उड़ान ( निष्पक्ष सत्य के लिये उत्कृष्ट पत्रिका ) , भोपाल
Email : muktikiudaan@gmail.com
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