धन्धे के जनसंपर्कीय माध्यम? -प्रकाश कुमार सक्सेना

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कई धन्धेबाज पत्रकार फिलहाल परेशान चल रहे हैं। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के साथ चाय की चुस्कियों के साथ ही अपनी और उन अधिकारियों की अवैध दुकानों को चलाने में विगत वर्ष से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के वर्तमान में प्रमुख सचिव राघवेन्द्र सिंह जो पहले प्रमुख सचिव व आयुक्त जनसंपर्क थे, के कार्यकाल तक संगठित भ्रष्टाचार पूरे शबाब पर था। ब्लैकमेलर व दलाली और धंधों में लिप्त पत्रकार काफी खुश थे। संचालक रहे आशुतोष अपने निज सहायक सहित अन्य कर्मचारियों की पत्नियों के नाम से निकलने वाले पत्र-पत्रिकाओं पर खुलकर मेहरबान रहे। राघवेन्द्रसिंह के हटने के बाद आये मनीषसिंह ने जनसम्पर्क विभाग में चल रहे बहुत से घोटालों पर रोक भी लगाई और कई भुगतान भी रोक दिये। उन्होंने जनसंपर्क संचालनालय द्वारा संपादित होने वाले क्षेत्र प्रचार व फिल्म जैसे बहुत से कार्य म.प्र. माध्यम में स्थानान्तरित कर दिये। ऐसा नहीं कि म.प्र. माध्यम में घोटाले नहीं होते, बस वहां चाय की चुस्कियों के साथ हर किसी की एन्ट्री नहीं होती। अब हाल ये है कि जनसंपर्क विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों के पास उतना काम ही नहीं बचा। बजट म.प्र. माध्यम को दे दिया गया, इसलिये अधिकारी व ये धंधेबाज पत्रकार काफी दुखी हैं।

ऐसा नहीं है कि सब ही दुखी हों। बंटी बबलियों की जोड़ी मस्का मार नीति के सहारे लाखों पीटने में सफल हैं। वैसे यू ट्यूब चैनल्स किसी शासकीय विभाग में पंजीकृत तो नहीं होते थे लेकिन जनसंपर्क विभाग में नियम-कायदे कानून को मानने की कोई बाध्यता है भी नहीं। ऐसे ही एक यू ट्यूब चैनल का यह नियमित धंधा है कि वह हर वर्ष ऐसे लोगों को पुरस्कार देता है जिनसे या तो सीधे कोई लाभ मिलता है या उस व्यक्ति के पद का कोई लाभ लिया जा सकता हो। संविधान निर्माताओं ने ऐसे ही शासकीय पदों के दुरुपयोग को रोकने के लिये कई कानून भी बनाये हैं लेकिन जनसंपर्क विभाग ऐसे कानूनों को मानता ही नहीं है। म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी लोकसेवक शासन की अनुमति के बिना न तो किसी अभिनन्दन पत्र या बिदाई मान पत्र ग्रहण करेगा, कोई प्रशंसा पत्र स्वीकार करेगा और न यह अपने सम्मान में या किसी अन्य शासकीय सेवक के सम्मान में आयोजित किसी सभा या सत्कार समारोह में शामिल होगा। लेकिन जनसम्पर्क विभाग के अधिकारी अपनी प्रशंसा और सम्मान की भूख में ऐसा कोई भी कानून या नियम मानने को तैयार नहीं हैं। इस वर्ष भी ऐसे सम्मानों का बाकायदा प्रचार चल रहा है और ये अधिकारी प्रतिवर्ष ऐसे सम्मान प्राप्त कर नियमों को धता बता रहे हैं।

इन नियम-कानूनों का मकसद भ्रष्टाचार को रोकना है ताकि कोई भी पुरस्कारों की इस रिश्वत का अनुचित लाभ उठाकर शासकीय प्रलाभों का अनुचित लाभ न उठा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राघवेन्द्रसिंह से उनके प्रमुख सचिव व आयुक्त जनसंपर्क रहते सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत चल रहे संगठित भ्रष्टाचार की शिकायतें लगभग दो वर्ष पूर्व की गई थीं लेकिन इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय तक को गुमराह किया गया।

तो फिलहाल ऐसे ही तत्व मोहन सरकार पर हावी हैं जिनके कारण शिवराज सरकार की अराजक छवि बनी थी। हाँ, चाय की चुस्कियों पर जनसंपर्क के धन में बंदरबांट करने वाले परेशान हैं, क्योंकि वो काम और उनका बजट फिलहाल माध्यम में शिफ्ट हो गया है।
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