भोपाल की सड़कों पर अंधेरा

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राजधानी की सड़कों पर रात के समय निकलना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। जगह-जगह पसरा अंधेरा आम लोगों के लिए डर और खतरे का कारण बनता जा रहा है। हाल ही में पिपलानी इलाके में अंधेरे का फायदा उठाकर एक मनचले द्वारा तीन युवतियों पर हमला किए जाने की घटना ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है।

जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम न तो मौजूदा स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को दुरुस्त कर पा रहा है और न ही नई स्ट्रीट लाइटें लगाने में सफल हो पा रहा है। शहर में लगी करीब 65 हजार स्ट्रीट लाइटों में से लगभग 20 हजार बंद हैं।

इनमें से 15 हजार स्ट्रीट लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के विकास कार्यों के चलते बंद हैं, जबकि रोजाना अलग-अलग इलाकों में औसतन 5 हजार स्ट्रीट लाइट तकनीकी या अन्य कारणों से बंद रहती हैं।

यह आंकड़ा कुल स्ट्रीट लाइट का करीब 23 फीसदी है। चिंताजनक स्थिति यह भी है कि शहर के 40 फीसदी इलाके में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था ही नहीं है। यदि इन सभी आंकड़ों को जोड़ा जाए तो राजधानी का लगभग 63 फीसदी क्षेत्र अंधेरे में डूबा हुआ है।

वीआईपी इलाकों में भी अंधेरा…

अंधेरी सड़कों से गुजरने पर मजबूर हजारों लोग जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट नहीं है, उनमें अरेरा हिल्स जैसे वीआईपी इलाके भी शामिल हैं, जहां केंद्र और राज्य सरकार के महत्वपूर्ण कार्यालय हैं। वहीं मालवीय नगर, रोशनपुरा, पुलिस कंट्रोल रूम से एमपी नगर की ओर आने-जाने वाले हजारों लोग इन अंधेरी सड़कों से गुजरने को मजबूर हैं। तस्वीर: अरेरा हिल्स में बीएसएनएल से ग्रीन मेडाेस तक जाने वाली सड़क की।

हर माह औसतन 400 शिकायतें शहर में स्ट्रीट लाइट बंद होने को लेकर हर महीने औसतन 400 शिकायतें दर्ज होती हैं। बरसात के मौसम में यह संख्या और बढ़ जाती है। पिछले महीने जनवरी में 359 शिकायतें दर्ज की गईं। नगर निगम का दावा है कि शिकायतों का निराकरण 3 से 4 दिनों में कर दिया जाता है, हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति इससे अलग नजर आती है।

संसाधनों की कमी भी बड़ी बाधा निगम अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों के निराकरण में देरी का एक बड़ा कारण संसाधनों की कमी है। शहर के 21 जोनों के लिए केवल 16 वाहन उपलब्ध हैं। एक वाहन में तीन कर्मचारी और अधिकारी होते हैं। आवश्यकता को देखते हुए कम से कम 10 और वाहन तथा 30 से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी और अधिकारियों की जरूरत है।

भदभदा से अयोध्या नगर तक असर भदभदा से जवाहर चौक, पुल बोगदा से पिपलानी, गांधी नगर के आशाराम चौराहा से लेकर अयोध्या नगर थाना क्षेत्र तक मेट्रो और एनएचएआई के काम के कारण स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। इन क्षेत्रों में लगे स्ट्रीट लाइट पोल तक निकाल दिए हैं। इससे पहले सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो निर्माण के दौरान भी यही स्थिति थी।

टेंडर में एजेंसियों की रुचि नहीं पूरे शहर को पर्याप्त रोशनी देने के लिए करीब 30 हजार से ज्यादा नई एलईडी स्ट्रीट लाइटों की जरूरत है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, पिछले एक साल में इसके लिए कई बार टेंडर जारी किए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी टेंडर में एजेंसियों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई है। इस वजह से टेंडर अटका हुआ है।

अरेरा हिल्स के लिए सर्वे कराएंगे

मेट्रो और एनएचएआई से हमने कहा है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था करें। जिन इलाकों में स्ट्रीट लाइट नेटवर्क नहीं है, वहां नेटवर्क के लिए प्रयास जारी हैं। अरेरा हिल्स इलाके में तात्कालिक व्यवस्था क्या हो सकती है, उस पर निर्णय के लिए एक-दो दिन में सर्वे कराएंगे। –आरआर जारोलिया, एसई, नगर निगम

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