झोला छाप ख़बरी उद्यानिकी विभाग के पास कोई योजना नहीं है, अब किसान कब तक योजनाओं में उलझता रहेगा ….?राजेन्द्र सिंह जादौन

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एक तरफ मध्यप्रदेश में किसान है तो दूरी तरफ योजनाओं का अद्भुत संगम और कागज़ के टुकड़ों में घूमती किसानों की ज़िंदगियां। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र एवम उत्पादन में वृद्धि करने एवम संतुलित आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग के अधीन उद्यानिकी विभाग की संरचना की गई ।

इस विभाग का मुख्य उद्देश्य उद्यानिकी के क्षेत्र में विस्तार हेतु योजनाओं को आधुनिक युग की आवश्यकताओ के अनुरूप तीव्रगामी, समयानुकूल, रुचिकर, आकर्षक तथा वृहद कृषक समूह एवं गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले खेतिहर एवं भूमिहीन मजदूरों के लिए उपयोगी बनाने के लिए कई मसौदे तैयार कर उन्हें किसानों को राहत देने का काम सौंपा गया । लेक़िन शायद मध्यप्रदेश में किसानों के हालात कभी सुधर नही सकते ।

बैतूल जिले के कुकरू में किसानों की रुचि कॉफ़ी उत्पादन में है इस उत्पादन को बढ़ावा देने किसान तैयार हैं पर सरकार के उद्यानिकी विभाग के पास ना तो कोई योजना है न कोई मसौदा तैयार है । इधर जिला पंचायत और वनविभाग के अधिकारी किसानों की मदद करने कई योजनाओं से इस फसल का गणित बिठाने में लगे है ।

उधर कुकरू के किसान अपने बगल की सीमा में लगे महाराष्ट्र के अमरावती जिले की चिकलदार के किसानों की उन्नति देख कर उनसे कॉफी की खेती के गुण सिख रहे है, क्योंकि कॉफी के पौधे से उत्पन्न चेरी की क़ीमत 800से1000 रुपये किलो से शुरु होती है । महाराष्ट्र सरकार ने इस खेती के लिए किसानों को कई योजना दे रखी है लेक़िन मध्यप्रदेश सरकार के पास पिछले 60 सालों से कुकरू के किसानों के लिए कॉफ़ी उगाने की कोई योजना नही है ।

इसधर मध्यप्रदेश के कुकरू से ले जाये गए कॉफी के पौधों से महाराष्ट्र का किसान धनवान है और मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे बेहतरीन काफी देने वाला कुकरू 44 हैक्टेयर से सुकड़ कर 12 हेक्टेयर का रह गया। इसका मुख्य कारण है कि मध्यप्रदेश सरकार के “उदासीन” उद्यानिकी विभाग के पास काफ़ी की खेती के लिए कोई योजना ही नहीं है ….?

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