गोर गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती

“गोर गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती” उल्लास के साथ यह लोकगीत गूंजे ,गणगौर कार्यक्रम पशुपतिनाथ मंदिर में मारवाड़ी अग्रवाल समाज की महिलाओं के द्वारा किए गए सामूहिक गणगौर कार्यक्रम में भगवान शिव पार्वती के रूप में पूजन किया गया उल्लेखनीय है की गणगौर एक सामूहिक कार्यक्रम इसमें स्त्रियों को सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है इस अवसर पर महिलाओं में सुहाग की सामग्री लेकर तथा विभिन्न लोकगीत गायन किया, भारतीय सनातन सभ्यता में अखण्ड सुहाग का प्रतीक गणगौर के पूजन और व्रत का अपना एक अलग ही स्थान है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह त्योहार स्त्रियों के लिए अखण्ड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व है। वास्तव में गणगौर पूजन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का दिन है। चूंकि मां पार्वती ने भी अखण्ड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी और उसी तप के प्रताप से भगवान शिव को पाया। इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को तथा पार्वती जी ने समस्त स्त्री जाति को सौभाग्य का वरदान दिया था। शास्त्रों के अनुसार तभी से इस व्रत को करने की प्रथा आरम्भ हुई।विवाह योग्य कन्याएं शिव जैसे भावी पति को पाने के लिए पूर्ण श्रद्धा भक्ति से यह पूजन करती हैं। वहीं सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, मंगल कामना और परिवार के साथ सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यह त्योहार महिलाओं के साधारण दैनिक जीवन को एक अलग रंग और जीवंतता देता है। इसके अलावा गणगौर पूजा सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है,जो सामाजिक एकता, साझा, संवेदनशीलता और भाईचारे को बढ़ावा देती है।
