कांग्रेस की खोज-गुना राव यागवेन्द्र से ठुकवाया खम्ब-( श्याम चौरासिया)

भारत की चुनिंदा हाट लोकसभा सीटो में एक गुना-शिवपुरी में बीजेपी के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कांग्रेस ने राव यागवेन्द्र सिह यादव को उतार दिया। राव अशोकनगर-मुंगावली में लोकप्रिय है। जनाधर तो है मगर व्यापक,विश्वशनीय कम होने से गुना,चंदेरी,शिवपुरी,पिछोर, करैरा, पोहरी,कोलारस, ईसागढ़, में चमत्कार दिखा पाएंगे,संदेह है। ठीक इसके विपरीत कांग्रेस के टिकिट पर 2019 में बीजेपी के केपी यादव से हारे सिंधिया 2024 में बीजेपी की सांस्कृतिक राष्टवाद की सुनामी के सारथी है। बीजेपी ने मौजूदा सांसद केपी यादव को किनारे लगा सिंधिया के हवाले फिर से गुना की शाही विरासत कर दी।
असल मे गुना-शिवपुरी में पार्टी कम जय विलास पैलेस ज्यादा लड़ता है।
2019 सिंधिया सांस्कृतिक राष्टवाद की चलती सुनामी में बीजेपी के केपी सिंह यादव के हाथों खेत रहे थे। सिंधिया जैसे राजनीति के चतुर खिलाड़ी को अहसास हो गया कि अजय महल पर सांस्कृतिक राष्टवाद भारी पड़ा। यदि कांग्रेस के खूंटे से बंधे रहे तो सांस्कृतिक राष्टवाद महल की कीर्ति को धूमिल कर सकता है।वजह।विचार हीन, दिशा हीन कांग्रेस अपने कर्मो से सर्वत्र नकारी जा रही है।विश्वास और कुशल नेतृत्व का संकट कांग्रेस को डूबा रहा है।
कांग्रेस के नक्कार खाने ने सिंधिया के जन हितेषी वचनों को नही सुना।तब सिंधिया भी सांस्कृतिक राष्टवाद के सारथी बन भारत पर छा गए। गुना की भी यही दरकार थी।
अंचल की रग रग में सिंधिया राज घराने के जन कल्याण,रचनात्मक सद्कर्म रचे बसे है। शिक्षा, चिकित्सा,रेल, संचार,सिचाई सहित अन्य मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में जय विलास पैलेस के योगदान को अंचल याद रखे हुए है।
केंद्रीय मंत्री बनने के बाबजूद सिंधिया लगातार गुना शिवपुरी के फेरे ले जनता के दुख दर्द दूर करते रहे।इससे उनका ग्राफ, रुतबा ऊंचा होता चला गया।
उसी ग्राफ,रुतबे की वजह से कांग्रेस को सिंधिया के तोड़ का प्रत्याशी खोजने में पसीना आ गया था। सीनियर नेता अरुण यादव पर दांव लगाने की मंशा का विरोध जम कर होने पर कांग्रेस ने स्थानीय राव यागवेन्द्र सिह पर अंतिम दाव लगाया। इस फैसले से कांग्रेसियो में उत्साह तो है। मगर आम जन राव से ज्यादा महाराज पर फिदा लगते है। इस लिहाज से राव का सिक्का चल पाने की उम्मीद ज्यादा नही लगती।
सिंधिया ने अपने जनाधर को विधानसभा चुनावो में भी साबित किया। शिवपुरी, पिछोर, कोलारस, पोहरी,गुना,चंदेरी, मुंगावली आदि सीट बीजेपी के खाते में दर्ज करवा कांग्रेस के मुगालते दूर कर दिए। केपी सिंह,गोविंद सिंह जैसे दिग्गज, अजय कांग्रेसी नेता भी बुरी तरह चित्त हो गए।
गुना राजा दिग्गविजय सिंह का घरु जिला है। राजा दिग्गी हर स्तर पर सिंधिया को खो देने मे महारथ रखते है। राजशाही काल मे राजा दिग्गी की रियासत राघोगढ़ महाराज सिंधिया की ताबेदार थी।शायद इसी टीस की वजह से सिंधिया राजा दिग्गी को फूटी आंख नही सुहाते।
पूर्व काबीना मंत्री राजा दिग्गी के चिरंजीव जयवर्धन सिंह ने पहली खेप में ही सिंधिया पर बाहरी होने का ठप्पा चस्पा करके चुनावी इरादे,रणनीति जाहिर कर दी। यानी गुना-शिवपुरी को सींचने वाले कर्मयोगी सिंधिया को बाहरी ओर राव को जमीनी बता कर जंग लड़ी जाएगी।
बेदाग सिंधिया के खिलाफ अन्य कोई मुद्दा है,नही।
सिंधिया के पक्ष में pm मोदी, योगी, मंत्री अमित शाह जैसी हस्तियां रैली कर सकती है तो राव को मुकाबले में लाने के लिए राहुल गांधी,कमलनाथ,राजा दिग्गी, पायलट, आदि रैलियों कर सकते है।
