कॉलोनियों के पार्क पर कब्जे:कहीं कम्युनिटी हॉल तो कहीं निजी घर बना लिया, कहीं लगा दिया ताला, रहवासी परेशान

शहर की कॉलोनियों में छोटे-छोटे पार्क हैं। गर्मी के दिनों में लोग इन पार्कों में टहलना पसंद करते हैं। कॉलोनियों में जहां अब खेलने के मैदान कम हो गए हैं, वहां यह पार्क ही बच्चों के खेल का सहारा है। लेकिन शहर में कम से कम 50 कॉलोनियों में पार्कों पर अलग-अलग तरह के कब्जे हैं। कहीं कम्युनिटी हॉल बन गए हैं तो कहीं कुछ लोगों ने निजी घर बना लिए हैं। पार्क में सामाजिक और धार्मिक समारोह करने के नाम पर कुछ लोगों ने मेन गेट पर ताला डाल दिया है। इन समारोह के आयोजकों की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति भीतर नहीं जा सकता।
कई पार्क ऐसे हैं, जहां बदमाशों ने घेराव कर अपना रहने का ठिकाना बना लिया है। पार्क में ही उनके द्वारा वाहन खड़े करे जाते हैं। कई मौकों पर पार्क में बदमाश शराब पार्टी भी करते हैं। उनके खिलाफ यदि कोई रहवासी आवाज उठाने की कोशिश करता है तो डरा-धमका कर बैठा दिया जाता है। ऐसे में कॉलोनी के रहवासी भी डर के कारण अपनी आवाज नहीं उठा पाते हैं। ज्यादातर कॉलोनियों का रखरखाव अब रहवासियों की समितियां करती हैं, इसलिए नगर निगम और अन्य एजेंसी ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करतीं।
केस-1: ई-8 त्रिलंगा कॉलोनी में कब्जा कर जाली से घेर लिया
ई-8 त्रिलंगा कॉलोनी के पार्क पर एक व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है। उसने पार्क के आधे हिस्से को जाली से घेर रखा है। साथ ही पार्क की जमीन पर ही अपना घर बना लिया है और गाड़ी खड़ी कर रखी है। त्रिलंगा सोसाइटी रहवासी संघ के अध्यक्ष केसी जैन ने बताया कि पार्क पर यह कब्जा पिछले 32 सालों से है। पार्क को 1992 में त्रिलंगा रहवासी संघ को दे दिया था।
केस-2: कोटरा में शीतला माता मंदिर
कोटरा में शीतला माता मंदिर रहवासी पार्क में कब्जा है। यहां कम्युनिटी हॉल का निर्माण किया गया था। जिसके बाद पिछले लगभग 2 साल से यहां पर एक व्यक्ति ने कब्जा कर रखा है। उसने कम्यूनिटी हॉल में जिम खोल रखा है। साथ ही हॉल में रखे उद्यान शाखा के सामान को भी बाहर कर चुका है।
केस-3: पार्क के गेट पर लगा है ताला
गुलमोहर की जी-2 कॉलोनी के मेजर अजय प्रसाद पार्क में कब्जा हो रखा है। पार्क के गेट पर पूरे समय ताला लगा रहता है। कब्जा करने वालों ने पार्क के अंदर स्टेज बनवा रखी है। जहां बैठकें होती हैं।
समाधान – रहवासी समितियों को अधिकार संपन्न बनाएं, समस्याएं हल हो जाएंगी
सभी कॉलोनियों में दस फीसदी स्पेस ओपन रखना होता है। शहर में पुरानी कॉलोनियों में ज्यादातर बिल्डर ने पार्क के नाम से यह ओपन स्पेस छोड़ दिए। इनमें से कुछ पर कब्जे हो गए। कई जगहों पर रहवासियों ने पार्क बनाए, लेकिन विवाद की स्थितियां बनी रहीं। वास्तव में मप्र मे रहवासी समितियों को अधिक अधिकार नहीं हैं। यह समितियां सफाई और पानी सप्लाई के काम भी ठीक से नहीं कर पा रहीं हैं। प्रकोष्ठ अधिनियम पारित हो गया, लेकिन अब तक ठीक से लागू नहीं हो पाया। यदि इस व्यवस्था को ठीक किया जाए तो प्रशासन की मदद से इन कब्जों को हटाया जा सकता है।
-हरीश भावनानी, पूर्व संयोजक, भोपाल सिटीजंस फोरम
