रिटायर्ड बैंककर्मी के सुसाइड की इनसाइड स्टोरी:रस्सी का फंदा टूटा तो गमछे से लगाई फांसी; सूदखोर कर रहा था परेशान

जबलपुर के रोंसरा गांव में रिटायर्ड बैंककर्मी रामगोपाल रैकवार (66) ने 2 अप्रैल को फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था। पहली बार रस्सी का फंदा बनाया जो टूट गया तो गमछे का फंदा बनाकर लटक गए।
डेढ़ साल पहले रामगोपाल रैकवार ने पास के गांव नुनसर के गन्नू महाराज से 25 हजार रुपए 20 फीसदी ब्याज पर लिए थे। हर महीने वह गन्नू को 5 हजार रुपए ब्याज के चुकाता रहा। 2 माह से ब्याज नहीं देने पर गन्नू ने रामगोपाल को घर पर आकर धमकाया था। डेढ़ साल के अंदर रामगोपाल 5 हजार रुपए महीने के हिसाब से 90 हजार ब्याज दे चुका था। इसके बाद भी नकद 25 हजार और 2 माह का 10 हजार रुपए ब्याज मांग रहा था।
नुनसर पुलिस चौकी में पदस्थ डीएल झारिया ने बताया कि रामगोपाल के परिवार ने गन्नू महाराज पर सूदखोरी का आरोप लगाया है। रामगोपाल के सुसाइड करने के बाद से गन्नू महाराज फरार है।
दैनिक भास्कर ने सूदखोरी और सुसाइड मामले की रोंसरा गांव जाकर पड़ताल की। पढ़िए यह रिपोर्ट…
रामगोपाल ने सुसाइड नोट में क्या लिखा

जानिए, रामगोपाल ने क्यों और किन कारणों से किया सुसाइड
जबलपुर से 25 किलोमीटर दूर पाटन तहसील के ग्राम रोंसरा में रहने वाले रामगोपाल ने घर से 500 मीटर दूरी पर अपने बगीचे में फांसी लगा ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें नुनसर गांव में रहने वाले गन्नू महाराज नाम के व्यक्ति पर पैसों को लेकर परेशान करने की बात लिखी है।
सुसाइड नोट के आधार पर नुनसर पुलिस चौकी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। सुसाइड नोट को जांच के लिए सागर लैब भिजवाया गया है।
पुलिस का कहना है कि परिजन के बयान दर्ज किए जा रहे थे। गन्नू महाराज की भी तलाश की जा रही है। सुसाइड नोट के आधार पर रामगोपाल ने 25 हजार रुपए 20 प्रतिशत ब्याज पर गन्नू से लिए थे, हर माह ब्याज भी दे रहे थे। बीते 2 माह से पेंशन बंद होने के कारण ब्याज नहीं दिया तो गन्नू ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।

बेटा बोला- पेंशन आते ही गन्नू घर आ जाता था
रामगोपाल के बेटे शैलेंद्र ने बताया कि 1 तारीख को पिताजी की पेंशन आती थी तो गन्नू घर आ जाया करता था। थोड़ी देर पिताजी के साथ बैठने के बाद वह चला जाता था। रामगोपाल ने अपने दोनों बेटों से कभी यह जिक्र नहीं किया कि गन्नू से उन्होंने 20 प्रतिशत ब्याज में रुपए लिए हैं।

पत्नी ने पूछा तो कहा- थोड़ा परेशान हूं
रामगोपाल की पत्नी रुक्मिणी हार्ट की मरीज हैं। परिवार के लोग उनसे ज्यादा बात शेयर नहीं करते। रामगोपाल शराब पीया करते थे। वे कुछ दिनों से परेशान दिखने लगे तो पत्नी ने उनसे वजह पूछी, इस पर रामगोपाल का कहना था कि कुछ नहीं बस थोड़ा परेशान हूं। 2 अप्रैल को रामगोपाल सुबह करीब 4 बजे उठे, खुद चाय बनाई, फिर 9 बजे तक टीवी देखी। थोड़ी देर बाद जब गन्नू घर आए तो वो उठकर बाहर आ गए। गन्नू को देखते ही वो परेशान हो गए।
रुक्मिणी ने कहा, गन्नू पति से तेज आवाज में बात करने लगे। वो बोल रहा था कि 2 माह से ब्याज के पैसे नहीं मिले हैं। अब अगर पैसे नहीं मिले तो अच्छा नहीं होगा। इसके बाद छोटा बेटा राहुल आ गया। पति सामने बैठे थे तो दोनों से गन्नू महाराज बात करने लगा। मेरी तबीयत खराब थी, तो मैं अंदर वाले कमरे में जाकर लेट गई।

10 मिनट का बोलकर गए, फिर नहीं लौटे: राहुल
रामगोपाल के बेटे राहुल ने बताया कि गन्नू आधे घंटे तक घर पर बैठा रहा। वह ऊंची आवाज में बात कर रहा था। कुछ देर बाद पिता जी ने गन्नू से कहा कि आप बैठो में 10 मिनट में आ रहा हूं। इतना बोलकर चप्पल पहनी और घर के पीछे वाले खेत पर चले गए। काफी देर तक गन्नू ने इंतजार किया और जाते-जाते 4-6 लड़के लेकर आने की धमकी देकर गया। पिता फिर घर नहीं लौटे।

दो बार लगाई थी रामगोपाल ने फांसी
रामगोपाल दिनभर गांव के बाहर घूमते रहे। शाम करीब 7 बजे जब अंधेरा हुआ तो वे अपने बगीचे गए। उन्होंने तांत की रस्सी से अमरूद के पेड़ पर फंदा बनाया और उसमें लटक गए, पर रस्सी टूट गई, जिसके कारण रामगोपाल नीचे गिर गए। रामगोपाल ने दूसरी बार अपने गमछे से फंदा बनाया और फांसी लगा ली।

जहां सुसाइड किया, उसी जगह अंतिम संस्कार
रामगोपाल रैकवार ने बगीचे में जहां सुसाइड किया, वहीं उसका अंतिम संस्कार किया गया। रामगोपाल के बेटे शैंलेंद्र ने बताया कि यह पुश्तैनी बगीचा है। दादा-दादी के देहांत के बाद यहीं पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था। शैलेंद्र का कहना है कि हमें डर लग रहा है कहीं सूदखोर गन्नू हम लोगों को रुपए के लिए परेशान न करे।
