यूपी पुलिस पेपर लीक के मास्टरमाइंड का एमपी कनेक्शन:2010 में इंजीनियरिंग करने भोपाल आया था; यहीं से ऑपरेट करता था गिरोह

उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पिछले दिनों यूपी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के जिस मास्टरमाइंड राजीव नयन मिश्रा को गिरफ्तार किया है, उसका एमपी से गहरा नाता है। 2 अप्रैल को जब यूपी पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तब वह भोपाल से ही नोएडा पहुंचा था। एसटीएफ के मुताबिक राजीव पिछले 14 साल से भोपाल में रहकर पेपर लीक के गिरोह को ऑपरेट कर रहा था।
राजीव ने एसटीएफ को बताया कि उसने अपने गिरोह की मदद से रीवा के एक रिसॉर्ट में 300 लोगों को यूपी पुलिस भर्ती का पर्चा, परीक्षा से 2 दिन पहले 16 फरवरी को ही पढ़ाया था। 18 फरवरी को जब परीक्षा हुई तो हूबहू यही प्रश्न आए थे। इसके एवज में गिरोह ने प्रत्येक परीक्षार्थी से 7 से 8 लाख रुपए लिए थे। पेपर लीक का खुलासा होने के बाद यूपी सरकार ने परीक्षा निरस्त कर दी थी।
साल 2023 में मप्र में संविदा स्वास्थ्य भर्ती परीक्षा का पेपर भी राजीव लीक करवा चुका है। इस मामले में उसे जेल की सजा भी हो चुकी है। यूपी एसटीएफ के एसपी राजकुमार मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि राजीव की संपत्ति की भी जांच की जा रही है। उसका भोपाल के जेके रोड स्थित भारत नगर में एक मकान है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

2010 में इंजीनियरिंग करने भोपाल आया था, पेपर लीक गिरोह से जुड़ गया
पुलिस के मुताबिक राजीव नयन मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अमोरा गांव का रहने वाला है। माता-पिता की मौत के बाद उसके मामा ने उसे पढ़ाया-लिखाया। 2010 में वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल आया था।
उसने सत्य साईं यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में बी टेक किया है। यहां वह कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आया जो पैसे लेकर भोपाल के तकनीकी और प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिला कराते थे। इसमें बिहार के मधुबनी का रहने वाला सुभाष प्रकाश और अतुल वत्स हैं।
राजीव भी दोनों के साथ पार्टनर के रूप में शामिल हो गया। इंजीनियरिंग करने के बाद उसने नौकरी करने की जगह पैसे लेकर एडमिशन दिलाने के काम को अपना कॅरियर बना लिया। उसने भोपाल में ही करियर एंड प्लेसमेंट कंसल्टेंसी का काम शुरू किया।

2019 के बाद 6 राज्यों में फैला पेपर लीक गिरोह का नेटवर्क
पुलिस अफसरों के मुताबिक वर्ष 2019 में राजीव नयन मिश्रा की मुलाकात भोपाल के ही तरुणेश अजारिया से हुई। तरुणेश पैसे लेकर भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं का पेपर लीक कराने का गिरोह ऑपरेट करता था। इन दोनों से प्रयागराज के परानीपुर गांव का राहुल मिश्रा भी जुड़ गया। अतुल वत्स ने राजीव की मुलाकात बिहार के डॉ. शरद से कराई।
डॉ. शरद भी पेपर लीक गिरोह ऑपरेट करता था। डॉ. शरद ने गौतम बुद्धनगर-नोएडा के रवि अत्री से राजीव की मुलाकात कराई। इस नेटवर्क की वजह से राजीव नयन का दायरा मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार और झारखंड तक फैल गया था।
यूपी-TET पेपर लीक का पहला मामला, जिसमें गिरफ्तार हुआ
नवंबर 2021 में उत्तर प्रदेश अध्यापक पात्रता परीक्षा-TET का पेपर लीक हो गया था। इस मामले में यूपी की कौशांबी पुलिस ने जुलाई 2022 में पहली बार राजीव नयन मिश्रा को लखनऊ से पकड़ा था। केस की पड़ताल में सामने आया कि TET का पेपर संतोष चौरसिया ने लीक कर राजीव नयन को दिया था।
उसने परीक्षार्थियों से लाखों रुपया लेकर पेपर उन्हें टेलीग्राम के जरिए उपलब्ध कराया। बाद में इन परीक्षार्थियों में से किसी ने इसे वॉट्सएप पर शेयर किया और परीक्षा से ठीक एक रात पहले पेपर लीक हो गया। हंगामा मचा तो परीक्षा रद्द कर दी गई। कुछ महीने जेल में रहने के बाद राजीव जमानत पर रिहा हो गया।

NHM भर्ती पेपर लीक में ग्वालियर पुलिस ने पकड़ा
तरुणेश अजारिया और राजीव नयन मिश्रा की जोड़ी ने 2023 में फिर बड़ा खेल किया। इस गिरोह ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्टाफ नर्स की संविदा भर्ती के लिए हो रही परीक्षा का पेपर लीक कर दिया। इसके लिए इन लोगों ने ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली कंपनी एमईएल के कर्मचारियों से साठगांठ की।
कंपनी के रविंद्र ठाकुर और दीपक मेवाड़े ने सर्वर का लॉगइन और पासवर्ड एक पुराने कर्मचारी चिराग अग्रवाल को दिया था। चिराग ने पासवर्ड के जरिए प्रश्नपत्र को डिकोड कर उसे पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड कर लिया। पुलिस ने बताया इसके लिए राजीव की चिराग से 50 लाख रुपए में डील हुई थी।
राजीव नयन और तरुणेश के गिरोह ने परीक्षार्थियों को 50-50 हजार रुपए में यह पर्चा बेचा था। ग्वालियर में पेपर लीक का खुलासा हुआ था। भोपाल क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच के बाद राजीव और तरुणेश सहित दूसरे आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

यूपी पुलिस आरक्षक भर्ती का पेपर कैसे लीक किया
- यूपी पुलिस भर्ती पेपर की छपाई अहमदाबाद की प्रिंटिंग प्रेस में हुई। पेपर छपने के बाद इन्हें यूपी भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (TCI ) को ठेका दिया गया। TCI में काम करने वाले शिवम गिरि और रोहित पांडे की पेपर लीक करने वाले गिरोह से साठगांठ हो गई। TCI में पहले काम कर चुका प्रयागराज का अभिषेक भी इस गैंग में था। अभिषेक ने शिवम और रोहित से संपर्क किया और पेपर आउट कराने के बदले उन्हें पैसे देने का ऑफर दिया।
- 2 फरवरी को TCI कंपनी के दोनों कर्मचारी शिवम और रोहित ने अभिषेक को फोन कर बताया कि पेपर प्रिंट होकर ट्रांसपोर्ट कंपनी में आ चुके हैं। दोनों ने सील्ड पेपर बॉक्स के फोटो खींचकर अभिषेक को भेजे। इसके बाद अभिषेक, पटना के डॉक्टर शुभम मंडल और अन्य लोगों के साथ 5 फरवरी को अहमदाबाद पहुंचा।
- डॉक्टर शुभम मंडल और TCI के दोनों कर्मचारी ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम में गए, जहां पेपर रखे हुए थे। कर्मचारी एक बॉक्स को उठाकर ऐसी जगह पर ले गए, जहां CCTV कैमरे की कवरेज नहीं थी। उन्होंने उस बॉक्स को पीछे की तरफ से तोड़ा, क्योंकि आगे की तरफ सील लगी हुई थी। इसके बाद 18 फरवरी को होने वाले पेपर के 2 सेट निकाले। मोबाइल से उनकी फोटो खींच ली। इसी तरह 8 फरवरी को भी एक बॉक्स तोड़ा गया और पेपर का फोटो खींचा गया।
- इस काम के बदले शिवम को 3 लाख और रोहित को ढाई लाख रुपए दिए गए। कुछ पैसे बाद में देने की बात भी तय हुई। STF ने रोहित पांडेय निवासी मिर्जापुर, शिवम गिरि निवासी भदोही और अभिषेक शुक्ला निवासी प्रयागराज को गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा पटना के डॉक्टर शुभम मंडल को भी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था।
टेलीग्राम की बजाय इस बार पेपर लीक का नया तरीका निकाला
सोशल मीडिया टेलीग्राम और वाट्सएप पर पेपर बांट कर फंस चुके इस गिरोह ने इस बार लोगों तक पेपर पहुंचाने का नया तरीका खोजा। इसके लिए 5 से 8 लाख रुपए लेकर लोगों को रीवा और गुरुग्राम बुलाया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 300 लोगों को रीवा के शिव महाशक्ति रिसॉर्ट में बुलाकर पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा का लीक पेपर बांटा गया।
उन्हें वह पेपर पढ़कर उसका जवाब रटने को कहा गया था। परीक्षार्थियों ने इसे नंबरिंग के हिसाब से लिख लिया था। गुरुग्राम के रिसॉर्ट में मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े लोगों को बुलाकर ऐसे ही पर्चा पढ़ाया गया। यूपी एसटीएफ ने गुरुग्राम के रिसॉर्ट संचालक को इस मामले में गिरफ्तार भी किया है।

भोपाल के भारत नगर में ठिकाना, एक रेलवे अधिकारी की बेटी भी साथ
यूपी एसटीएफ ने राजीव नयन मिश्रा का ठिकाना भोपाल के जेके रोड स्थित भारत नगर के मकान नंबर 97 को बताया है। बताया गया कि मिश्रा शादीशुदा है और उसकी पत्नी प्रयागराज के गांव में ही रहती है।
पिछले 10 सालों से राजीव भोपाल में रह रहा था। उसके साथ एक रेलवे अधिकारी की बेटी रह रही है। एसटीएफ को उसकी भी तलाश है। उससे पूछताछ के बाद उसकी भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
भास्कर ने जब इस पते ही पड़ताल की तो किसी मकान पर 97 नंबर लिखा नहीं मिला। भारत नगर गृह निर्माण सोसाइटी के कार्यालय से लगी गली में मकान नंबर 96 के बाद एक नया बना मकान जरूर था, जिस पर कोई नंबर या नेम प्लेट नहीं था।
आसपास के लोगों ने बताया, इस मकान में 30-35 साल उम्र का एक पुरुष और एक महिला रहते हैं, लेकिन 4 – 5 दिनों से वे लोग नजर नहीं आए। हालांकि, एक महिला ने बताया कि इस मकान से 2 लोग कार लेकर दोपहर में बाहर निकले थे।

राजीव की शादी में चमक-दमक देखकर दंग रह गया था इलाका
प्रयागराज के मौजा क्षेत्र के स्थानीय पत्रकार नीरज मिश्रा बताते हैं कि राजीव नयन मिश्रा का गांव अमौरा यहां से थोड़ी दूर है। उसके पिता सामान्य किसान थे। लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत हो गया। एक साल के भीतर उसकी मां की भी मृत्यु हो गई थी। तब राजीव और उसकी बहन बहुत छोटे थे।
परिवार में कोई नहीं था तो दोनों को उसके मामा अपने घर धरमपुर लेकर चले गए। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई यहीं प्रयागराज में ही हुई। बाद में वह भोपाल चला गया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि 2021 में राजीव की शादी हुई थी। उसके तिलक समारोह में हुआ भारी खर्च और चकाचौंध देखकर पूरा इलाका दंग रह गया था।
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ कुछ दिनों तक प्रयागराज के नैनी में रहता रहा। वहां वह मेडिकल इक्यिपमेंट्स की आपूर्ति का काम कर रहा था। बाद में कहीं चला गया। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने कई परीक्षाओं के पेपर लीक कर करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई। पुलिस की जांच में राजीव नयन के पास से भोपाल, नोएडा, लखनऊ में कई करोड़ की संपत्ति का खुलासा हुआ है।
