साइबर जालसाजी को लेकर एडवाइजरी जारी:इन तरीकों को अपनाकर ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं आप

हेलो मैं, दिल्ली पुलिस से डीएसपी बोल रहा हूं… आपका बेटा ड्रग की तस्करी में गिरफ्तार किया गया है। आप आवाज से सज्जन लग रहे हैं, आपके बेटे को केस में आरोपी बनाया तो उसका करियर खराब हो जाएगा। उसे केस से बचाना चाहते हैं तो …लाख रुपए देना होंगे। जी हां कुछ इसी तरह के कॉल कर साइबर जालसाज उन लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिनके बच्चे शहर से बाहर से पढ़ाई अथवा नौकरी कर रहे हैं। इस प्रकार की ठगी के मामलों को लगातार बड़ता देख राज्य साइबर पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी को समझकर आम लोग साइबर जालसाजी का शिकार होने से बच सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ दिनों के भीतर प्रदेश के विभिन्न जिलों से राज्य साइबर कार्यालय भोपाल में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। लग-भग सभी शिकायतों में बताया गया कि उनके बच्चे बाहर रहकर नौकरी करते हैं अथवा पढ़ाई करते हैं। अज्ञात मोबाइल नंबरों से उन्हें कॉल कर धमकाया गया कि उनका बच्चा रेप, चोरी और मर्डर जैसे कैस में पकड़ा गया है। उसे बचाना चाहते हैं तो कुछ रकम का इंतेजाम कर लें। अधिकांश प्रकरणों में लोगों ने डर के कारण साइबर जालसाजों ने ऑन लाइन रकम को ट्रांसफर कर दिया।
ऐसे देते हैं वारदात को अंजाम
एडवाइजरी में साइबर सेल ने बताया कि अपराधी कॉल या व्हाट्सएप कॉल के जरिए करते हैं संपर्क। जिसमें अधिकांश कॉल +92(पाकिस्तानी) नÌबर या किसी अन्य देश के नंबर(+91 के अलावा) से आते हैं। कॉलर आपको कॉल करके डराएगा और कहेगा कि आपके PAN / AADHAR कार्ड का उपयोग करके पार्सल भेजा गया है, जिसमें (नार्कोटिक्स) नशीली सामग्री पाई गई हैं। इसके अलावा जालसाज NCB/CBI/ED/NIA आदी एजेंनसी के अधिकारी के नाम से बदल-बदल कर कभी कॉल, कभी व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं और कहते हैं कि आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा है,जिसमें (नार्कोटिक्स) नशीली सामग्री पाई गई हैं। ऐसे मामसों मे अपराधी कभी आपको कोर्ट फीस या जमानत देने के नाम से मांग की करते हैं।
वीडियो कॉल पर दिखाते हैं फर्जी नोटिस और करते हैं रुम अरेस्ट
पहले अपराधी वीडियो कॉल के जरिए आपको पुलिस अधिकारी से बात करने को कहता हैं और फिर कॉल पर रहते हुए फर्जी नोटिस दिखाते हैं। जिसमें आपको डिजिटल अरेस्ट करते हुए घर में ही रहने को कहा जाता है और कहते हैं कि स्वयं को किसी कमरे में बंद करलें जिसमें किसी को भी अंदर न आने दिया जाए। इस दौरान कैमरे के सामने आपसे कुछ सवाल पूछे जाएंगे । कमरे में कोई आया तो आप दोंनो को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। धीरे-धीरे आपको और ज्यादा डराया जाता है और आपके निजी बैंक खाते तथा अन्य इंनवेस्टमेंट की जानकारी ले ली जाती हैं। अंत में यह कहकर की शायद आपको गलत फंसा लिया गया है। आप जांच पूरी होने तक अपना पैसा आरबीआई/भारत सरकार के खाते में जमा करवा दें । जे जांच पूरी होने के बाद आपको लौटा दिया जायेगा। इस पूरी जानकारी के दौरान आपको न ही किसी से संपर्क करने का मौका दिया जाता है, न ही बाहर जाने दिया जाता है। इस प्रकार आपसे मोटी रकम ले ली जाती हैं।
ठगी से बचने ते लिए ऐसे बर्ते ऐहतियात…
1. अनजान नंबर खासकर जो +92 से शुरु होते हैं , से आने वाले कॉल, व्हाट्सएप कॉल/वीडियो कॉल, टेलीग्राम कॉल न उठाएं। 2. भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई नियम नहीं है। अतः किसी के कहने पर या डर से खुद को कहीं बंद न करें। 3. अपनी निजी जानकारी जैसे बैंक खाते संबंधी, आधार आदि को किसी के साथ साझा न करें। 4. कोई भी संस्था आपसे आपका निजी पैसा किसी भी शासकीय खाते में जमा करने या सुरक्षित करने की सलाह नही देता। अतः कभी भी अपना पैसा किसी अनजान खाते में ट्रांसफर न करें। 5. यदि आपके साथ कोई सायबर अपराध घटित होता है, तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या www.cybercrime.gov.in या Cyber Crime Help Line (Toll Free) नÌबर 1930 पर दर्ज करें।
