जीडी में संविलियन की मांग:‘चाकरी’ के खिलाफ 270 ट्रेड आरक्षक हाई कोर्ट पहुंचे

अफसरों की ‘चाकरी’ (अर्दली व्यवस्था) के विरोध में मप्र पुलिस के 270 सिपाही-हवलदारों ने जबलपुर हाई कोर्ट की शरण ली है। मप्र में ऐसा पहली बार हुआ है, जब ट्रेड आरक्षक कैडर यानी कुक, नाई, धोबी, मोची, स्वीपर जैसे पुलिसकर्मियों ने सरकारी आदेशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मप्र पुलिस में ऐसे ट्रेड आरक्षक कैडर के 5500 पुलिसकर्मी हैं, जो आरक्षक जीडी (जनरल ड्यूटी) में संविलियन की मांग कर रहे हैं। जबलपुर हाई कोर्ट में इन 270 पुलिसकर्मियों ने सामूहिक याचिका न करते हुए इंडिविजुअल पिटिशन दायर की हैं। हाईकोर्ट ने पहले मामले में अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है। आरक्षक ट्रेड कैडर से भर्ती हुए ये पुलिसकर्मी तकरीबन 5 साल की सेवा पूरी कर जिला पुलिस के सहयोगी बनने के पात्र हो गए हैं। दस साल से इनके जीडी में संविलियन पर रोक लगी है। पड़ोसी राज्यों में संविलियन कर बल की कमी पूरी की जा रही है।
नतीजा ये है कि ट्रेड में भर्ती हुए इन पुलिसकर्मियों को प्रमोशन तो मिल रहा है, लेकिन उन्हें काम कुक, नाई, धोबी, मोची, स्वीपर के ही करने पड़ रहे हैं। इनमें कई तो ऐसे भी हैं, जो पदोन्नति पाकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक पहुंच गए, लेकिन काम अफसरों के घर पर ही कर रहे हैं।
भास्कर सबसे पहले…
सबसे पहले दैनिक भास्कर ने ट्रेड कैडर के पुलिसकर्मियों के जीडी में संविलियन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। बीती 6 फरवरी को ‘चाकरी’ पर हर माह 24.75 करोड़ खर्च शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद ही आरक्षकों ने हाईकोर्ट में पिटिशन फाइल करनी शुरू कीं। दो महीने के भीतर ही ट्रेड आरक्षक कैडर के 270 पुलिसकर्मी हाईकोर्ट जा पहुंचे हैं।
