प्रधानमंत्री का पहला रोड शो यहां 7 अप्रैल को:नड्डा के बाद मोदी का दौरा तय होने से भाजपा में बढ़ी गर्मी, कांग्रेस का संघर्ष और मुश्किल हुआ

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मंत्री राकेश सिंह और कैलाश विजयवर्गीय ने मोदी के दौरे को लेकर तैयारियों का जायजा लिया। - Dainik Bhaskar

जबलपुर में भाजपा के आशीष दुबे और कांग्रेस के दिनेश यादव के बीच मुकाबला है। यह भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती है, जबकि कांग्रेस 28 साल का सूखा खत्म करने की जद्दोजहद में है।

पहले चरण की 6 सीटों में शामिल जबलपुर लोकसभा का चुनाव अभी तक ठंडा जा रहा था, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के दौरे के बाद अब 7 अप्रैल को होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड-शो से प्रचार में एकाएक गर्मी आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम विधानसभा में या बड़े फुहारे से मिलौनी गंज तक, इन दोनों जगहों में से एक जगह रोड-शो करने वाले हैं।

साफ है कि भाजपा के स्थानीय नेताओं को मिलने वाला यह बूस्टर डोज और तेजी से काम कर रहा है, जबकि कांग्रेस का संघर्ष इन वजहों से और मुश्किल होना तय है। वैसे भी भाजपा की परंपरागत सीट रही जबलपुर को वह लगातार 8वीं बार जीतने की रणनीति बना चुकी है। जबकि कांग्रेस 28 साल का सूखा खत्म करने की जद्दोजहद में है।

क्लस्टर प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व सांसद व पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस चुनावी मैदान में कहीं है ही नहीं। पूर्व मंत्री व 2023 के विधानसभा चुनाव में जबलपुर की एकमात्र पूर्व सीट जीतने वाले कांग्रेस के लखन घनघोरिया कहते हैं कि पार्टी पूरी ताकत से मैदान में है। पूर्व मंत्री तरुण भनोत, सौरभ शर्मा के साथ तमाम नेता प्रचार में जुटे हैं।

मतदाता… ब्राह्मण ज्यादा, मुस्लिम भी काफी

अभी प्रचार ठंडा-बहरहाल, जनजीवन रोज की तरह ही चल रहा है। खोवा मंडी में साड़ी व्यापारी जतिन जैन कहते हैं कि प्रचार के मामले में अभी तक तो सब ठंडा ही दिख रहा है। दोनों उम्मीदवार नए हैं। जब वोट डालने जाएंगे तो पार्टी का चुनाव चिह्न सामने रहेगा। सब्जी मंडी में निजी व्यवसायी ऋषि सेन का भी कुछ ऐसा ही कहना है।

लगातार बढ़ा भाजपा का वोट और जीत का अंतर

चुनावी गणित पर नजर

विधानसभा चुनाव में जबलपुर की 8 में से 7 सीटें भाजपा जीती 2018 के विधानसभा चुनाव में लोकसभा की आठ विधानसभा सीटों में चार कांग्रेस के और इतनी ही सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जबकि ठीक चार महीने बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में जबलपुर की सभी 8 विधानसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली। हाल ही में हुए 2023 के विधानसभा चुनाव का आंकड़ा इस बार भाजपा के पक्ष में 7 और कांग्रेस के पक्ष में एक सीट रहा है। इस हिसाब से 2024 लोकसभा चुनाव का गणित अभी भाजपा के पक्ष में दिख रहा है।

20 साल बाद फिर ब्राह्मण
भाजपा ने 20 साल बाद फिर ब्राह्मण चेहरा दिया है। 2004 से पहले जयश्री बनर्जी और बाबूराव परांजपे जबलपुर सीट से उम्मीदवार रहे। ये दोनों ब्राह्मण हैं। इसके बाद राकेश सिंह लगातार चार बार जीते।

दलबदल से भी कांग्रेस का संघर्ष
कांग्रेस से महापौर का चुनाव जीते जगत बहादुर अन्नू ने हाल में भाजपा ज्वाइन की है। उनके साथ कुछ स्थानीय नेता भी चले गए। कांग्रेस उम्मीदवार यादव को दलबदल के साथ भाजपा की बूथ की रणनीति से भी मुकाबला करना है।

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