वीडी शर्मा ने बताया- क्यों रुकी नाथ की ‘एंट्री’:मंत्री की पत्नी को टिकट पर बोले-कमलनाथ ने पत्नी-बेटे को सांसद बनाया, उनकी योग्यता क्या

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मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा नहीं मानते कि कांग्रेस के जो नेता पार्टी जॉइन कर रहे हैं वो कचरे की तरह हैं, या उनकी कोई उपयोगिता नहीं है। दैनिक भास्कर के न्यूज रूम पहुंचे वीडी शर्मा ने कहा- जो जीता हुआ जनप्रतिनिधि बीजेपी में आ रहा है वह कचरा नहीं है।

दरअसल, कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन करने वाले नेताओं की तुलना कचरे से की थी। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने ऐसे नेताओं को पका हुआ बेर बताया था। इसी को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से सवाल पूछा गया था।

वीडी शर्मा ने कमलनाथ की बीजेपी में एंट्री नहीं होने, छिंदवाड़ा को जीतने के प्लान और केंद्र और प्रदेश में अपनी अगली भूमिका को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। पढ़िए पूरी बातचीत…

सवाल- बीजेपी मजबूत है तो फिर कांग्रेसियों को शामिल कर भीड़ क्यों बढ़ा रहे हैं? जीतू पटवारी कह रहे हैं कि भाजपा उनका कचरा साफ कर रही है।

जवाब- कांग्रेस के अध्यक्ष अगर छिंदवाड़ा के महापौर को कचरा कहते हैं तो यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का घोर अपमान है। जीतू पटवारी इतने महान व्यक्तित्व भी नहीं हैं कि वे कचरा डिसाइड करेंगे। कचरा तो आप हैं, जिन्हें जनता ने हरा दिया। जिन छिंदवाड़ा महापौर को राहुल और प्रियंका गांधी इतना मानते हैं उन्हें जीतू पटवारी कचरा कैसे कह सकते हैं। उनको जो कचरा लग रहा है वे लोग देश को आगे ले जाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।

सवाल- आपकी सरकार के एक मंत्री ने भी भाजपा में शामिल हो रहे लोगों को लेकर 3 तरह के कचरे- गीला, सूखा और मेडिकल वेस्ट की बात कही है?

जवाब – कभी-कभी अपने मन के अनुसार लोग व्याख्या कर देते हैं। मैं ऐसा मानता हूं कि कोई भी व्यक्ति खराब नहीं होता। मनुष्य की तुलना इस प्रकार से करने को भी मैं अच्छा नहीं मानता।

मेरा यह मानना है कि हर व्यक्ति काम का है, हर व्यक्ति उपयोगी है। किसी की क्षमता कम ज्यादा हो सकती है। कोई देश के लिए कम सोचता है कोई अधिक सोचता है।

सवाल- नकुलनाथ और कमलनाथ की भाजपा में एंट्री की अटकलें चली थी। आखिर एंट्री कैसे रुक गई?

जवाब- कमलनाथ जी के ऊपर जिस तरह के चार्ज हैं, वह आईटी की रिपोर्ट में ऑन रिकॉर्ड हैं। मैंने वैसे ही नहीं उनको मिस्टर करप्शन नाथ कहना शुरू किया था, वह चरितार्थ साबित हो रहा है। यहां तो आईटी की रिपोर्ट में सब ऑन रिकॉर्ड है कि कांग्रेस कार्यालय से कमलनाथ के घर तक करप्शन से लबालब है। कमलनाथ ने आदिवासी समाज को अपमानित करने का काम किया है। उनका खून चूसा है।

कमलनाथ की वजह से ही कांग्रेस के विधायक कमलेश शाह का मन परिवर्तित हुआ है। आप खुद देखिए कि उनके बारे में किस प्रकार के शब्दों का उपयोग नकुलनाथ करते हैं। मुझे लगता है कि यही सब बातें रही होंगी, जिसके चलते कमलनाथ को भाजपा में एंट्री देने से मना कर दिया होगा।

सवाल- पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र व पूर्व मंत्री दीपक जोशी बीजेपी में आते-आते क्यों रह गए?

जवाब – दीपक जोशी के पिता कैलाश जोशी से लाखों कार्यकर्ताओं ने सीखा है। दीपक जोशी को पार्टी ने विधायक बनाया, मंत्री बनाया, कॉर्पोरेशन का चेयरमैन बनाया, लेकिन उन्हें लगता था कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उस समय जब मध्यप्रदेश में कहा जा रहा था कि भाजपा तो गई तो दीपक जोशी भी कांग्रेस में चले गए। उस समय मेरा भी मन आहत हुआ था।

रही बात भाजपा में लौटने की तो इसका फैसला वीडी शर्मा अकेले तो करते नहीं। इसके लिए एक टीम है। इसके लिए पार्टी में एक तंत्र है। हो सकता है पार्टी के इस तंत्र ने उन्हें एक्सेप्ट न किया हो।

सवाल- भाजपा के राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने पार्टी क्यों छोड़ दी?

जवाब- मनुष्य होने के नाते स्वार्थवश कभी-कभी ऐसे विचार मन में आ जाते हैं। अजय प्रताप सिंह मुझसे सीनियर हैं। पार्टी ने उनको 3 बार महासचिव बनाया। कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष रहे। राज्यसभा भेजा। भाजपा और क्या दे सकती है।

अब प्रदेश में 41 लाख कार्यकर्ता रजिस्टर हैं तो सभी को सांसद तो बनाया नहीं जा सकता। सांसद बनेंगे तो 29 लोग ही। कभी-कभी मनुष्य के मन में ऐसा आ जाता है। हो सकता है कि अजय भैया के मन भी ऐसा आ गया हो।

सवाल- कांग्रेस नेताओं के आने से भाजपा के सीनियर साथी असहज महसूस कर रहे हैं, उन्हें कैसे मनाएंगे?

जवाब – प्रदेश में बंटाधार और भ्रष्टाचार की सरकार को वापस आने से रोकने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिंधिया जी के साथ कांग्रेस से आए लोगों को भी स्वीकारा।

कांग्रेसियों के आने से अगर मोदी जी को ताकत मिल रही है तो भाजपा कार्यकर्ता बड़े मन से उनका भी स्वागत कर रहा है। देश के अंदर सर्वव्यापी बनना है तो इस तरह के निर्णय भी करने पड़ते हैं।

सवाल- गुना से केपी यादव का टिकट क्यों कट गया?

जवाब – केपी यादव हमारे वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। वे पार्टी के प्रवक्ता हैं। कार्यकर्ता के नाते उस समय वे चुनाव लड़े थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी हमारे सीनियर लीडर हैं। केपी यादव आज इस भूमिका में हैं, कल किसी और भूमिका में होंगे। केपी यादव पूरी ईमानदारी के साथ गुना-शिवपुरी में भी काम कर रहे हैं और उन्हें हमने बैतूल और नर्मदापुरम का इंचार्ज भी बनाया है।

सवाल- भाजपा परिवारवाद का विरोध करती है, रतलाम में वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनिता सिंह चौहान को कैसे टिकट दे दिया?

जवाब – अनिता सिंह चौहान केवल नागर सिंह चौहान की पत्नी नहीं हैं, वे भाजपा की कार्यकर्ता होने के नाते लगातार दूसरी बार जिला पंचायत की अध्यक्ष भी हैं।

उनको केवल नेता की पत्नी होने के आधार पर टिकट नहीं मिला है, बल्कि भाजपा कार्यकर्ता, सक्षम महिला और फ्रंटलाइन कार्यकर्ता होने के नाते मिला है। वे लीडर हैं।

किसी नेता का बेटा-बेटी होना अपराध नहीं है। अहम बात ये है कि वह भाजपा का कार्यकर्ता है कि नहीं। परिवारवाद को मोदी जी ने ब्लॉक किया है। यह विपक्षी दलों से बिल्कुल उलट है।

सवाल- क्या वीडी शर्मा इस बार भोपाल से चुनाव लड़ना चाहते थे?

जवाब– मेरा नाम भोपाल से भी था, मुरैना से भी और जबलपुर के कार्यकर्ता भी चाहते थे कि मैं वहां से लडूं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने खजुराहो जैसी सीट से उतारा। केवल 12 दिनाें के अंदर लोगों ने मुझे रिकॉर्ड 4.93 लाख वोटों से जिताया। तब मैंने कहा था कि कार्यकर्ता की मेहनत ही चुनाव जिताती है। हम तो निमित्त मात्र होते हैं।

भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ती है। अमित शाह जी ने कहा कि अभी खजुराहो में और काम करने की जरूरत है। मेरे मन में भी था कि फिर से खजुराहो की जनता का आशीर्वाद लेने जाऊं, इसलिए खजुराहो से ही उतरा हूं।

सवाल- आप प्रदेश अध्यक्ष भी हैं और लोकसभा चुनाव भी लड़ रहे हैं, कैसे मैनेज करेंगे?

जवाब – मैंने पिछले 5 सालों तक लगातार सक्रिय रहकर खजुराहो के लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ काम किया है। भाजपा में हम जो काम करते हैं वह टीम स्पिरिट के तौर पर करते हैं। सबके काम विभाजित हैं। सभी लोग मिलकर चुनाव के अच्छे प्रबंधन का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह कोई परेशानी नहीं होगी।

सवाल. चुनाव बाद आपकी भूमिका केंद्र में तय है या प्रदेश में ही रहेंगे?

जवाब – भाजपा नेतृत्व सभी कार्यकर्ताओं की भूमिका तय करता है। मुझे किस भूमिका में और कहां काम करना चाहिए यह नेतृत्व तय करता है। नेतृत्व जो काम देता है उसको अच्छे से, एक्यूरेसी के साथ कैसे किया जाए, यही हमारी कोशिश रहती है।

सवाल- क्या पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देने वाली है?

जवाब – नरोत्तम जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं। प्रदेश में जॉइनिंग अभियान के वे इंचार्ज हैं। उनके लिए पार्टी ने सिस्टम बनाया है, जिस पर हम काम कर रहे हैं।

सवाल- भोपाल में मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बेटे ने मारपीट की और दबाव बनाने के लिए मंत्री थाने पहुंच गए। क्या एक मंत्री का इस तरह का बर्ताव ठीक है?

जवाब- कोई भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। चाहे वह मंत्री पुत्र हों अथवा रेस्टोरेंट संचालक। हमें अपने मंत्री को जो कहने की जरूरत थी, वो हमने निश्चित तौर पर कहा होगा। कानून ने अपना काम किया है।

पुलिस प्रशासन ने मंत्री के बेटे के खिलाफ भी कार्रवाई की है रेस्टोरेंट के मालिक ने भी अगर गुंडागर्दी की है तो उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है।

यह भाजपा की सरकार है यहां गुंडागर्दी नहीं चलेगी। चाहे वह कोई भी हो। कोई गुंडागर्दी करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

सवाल- लाड़ली बहना को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि 3 हजार रुपए महीने तक मिलेंगे, लेकिन कब तक?

जवाब – लाड़ली बहना एक हजार रुपए से शुरू हुई थी। 1250 पर पहुंच गई। सरकार अपने बजट प्रावधान के साथ काम करती है। जो कहा है, उसे पूरा करने का प्रयास जरूर करेंगे।

सवाल. क्या शिवराज सिंह चौहान की सरकार में अफसरशाही हावी हो गई थी? क्या इसीलिए 100 से ज्यादा ब्यूरोक्रेट्स के तबादले हुए?

जवाब- प्रशासनिक परिवर्तन सरकार की अपनी व्यवस्था है। सरकार का नेतृत्व करने वाले लोग समय के अनुकूल जरूरत के मुताबिक परिवर्तन करते हैं। इसको पहले क्या था, आज क्या है जैसी चीज से नहीं जोड़ा जा सकता। यह भी नेचुरल है।

सवाल- शिवराज सरकार और मोहन सरकार में किस तरह का अंतर देखते हैं?

जवाब- मैं ऐसा मानता हूं कि गुड गवर्नेंस के साथ आगे कैसे बढ़ सकते हैं, ये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कम समय में करके दिखाया है। शिवराज सिंह चौहान के बारे में कहा जाता था कि ऐसा परिश्रमी मुख्यमंत्री शायद नहीं मिल सकता। डॉ. मोहन यादव भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह एक ही विचार की सरकार है, एक ही दल की सरकार है। ऐसे में इनको अलग-अलग नहीं कहा जा सकता।

सवाल- शिवराज बढ़िया काम कर रहे थे तो परिवर्तन की क्या आवश्यकता थी?

जवाब- भाजपा अपने वर्किंग सिस्टम से चलती है, किसी व्यक्ति से नहीं चलती। यह उसी कार्यपद्धति का हिस्सा है कि नया नेतृत्व कैसे समाज में लाया जाए। सोसाइटी के अंदर यह तो नेचुरल है। शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल जितने भी हमारे नेता हैं, वे लगातार इस विचार में लगे रहते हैं कि नए और आज के समय के अनुकूल लोगों को कहां लाया जा सकता है। यह केवल राजनीति में ही नहीं होता, यह घर-परिवार में भी होता है।

सवाल- दिग्विजय सिंह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात कह रहे हैं, आपको क्या लगता है?

जवाब- दिग्विजय सिंह को इलेक्शन कमीशन में अप्लाय करना चाहिए। ये काम इलेक्शन कमीशन का है। यह कोई हमारा काम है क्या? अब इलेक्शन कमीशन किसी व्यवस्था में परिवर्तन करता है तो देश के सभी राजनीतिक दलों से विचार विमर्श करता है।

दिग्विजय सिंह को ध्यान रखना चाहिए कि जब कांग्रेस के प्रतिनिधि गए होंगे तो उन्हें कहना चाहिए था। कर्नाटक, हिमाचल में कांग्रेस जीती तो क्या ईवीएम की वजह से जीती? हमने तो नहीं कहा ये। हमने स्वीकार किया कि हम फिर लड़ेंगे।

सवाल- इलेक्टोरल बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बता दिया उसके बाद भी एसबीआई छिपाती रही। फिर ट्रांसपेरैंसी कैसे हुई ?

जवाब – नहीं, 12 हजार करोड़ का डिटेल आया है, लेकिन इलेक्टोरल बॉन्ड के अंदर जो डोनेशन आया है वह करीब-करीब 20 हजार करोड़ का है। यह उसका डेटा है।

समाज में व्यवस्थाएं बनती हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय को लगा कि देश को इसकी जरूरत है तो एसबीआई ने भी माना और उसको सामने रखा, इसलिए समय-समय पर इस प्रकार की व्यवस्थाएं बनती रहती हैं।

सवाल- इलेक्टोरल बॉन्ड के डेटा से पता चला है कि कई कंपनियों ने ईडी-आईटी की रेड के बाद भाजपा को चंदा दिया। क्या ये गलत नहीं है?

जवाब– कोई भी सामाजिक संस्था अथवा राजनीतिक दल समाज के सहयोग से ही चलता है। यह चंदा, सहयोग के रूप में होता है। भाजपा ही एक ऐसा दल है जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड की व्यवस्था बनाई। इलेक्शन कमीशन के साथ मिलकर इसे खड़ा किया। देश के अंदर भाजपा के 303 सांसद हैं भाजपा को तो इलेक्टोरल बॉन्ड में करीब 6500 करोड़ मिला, लेकिन विपक्ष में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों को 1400 करोड़ मिले हैं। जिनके 20 सांसद हैं उनको 450 करोड़ मिलता है, तो कैसे मिलता है?

सवाल- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का दांव क्या भाजपा को उल्टा तो नहीं पड़ जाएगा?

जवाब – जनता की सहानुभूति उन लोगों को मिलती है जाे उसके लायक होते हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को जनता की सहानुभूति नहीं मिलती। अरविंद केजरीवाल हों या उनकी टीम, कानून जब काम करता है वह अपनी चीजों को देखकर करता है। ऐसे लोगों के बारे में जनता और गहराई से समझती है।

सवाल. कांग्रेस कहती है कि बीजेपी के पास ऐसी वाशिंग मशीन है जो सब तरह के दाग धो देती है। ईडी, सीबीआई के माध्यम से बीजेपी विपक्षियों पर दबाव बनाती है?

जवाब – कांग्रेस जब सत्ता में रही तो उन्होंने इन संस्थाओं के दुरुपयोग का प्रयास किया है। इसी वजह से उनको ऐसा लगता है। वे तो आज के समय में न्यायालय को भी नहीं मानते। कांग्रेस केवल अपने को बचाने के लिए इस प्रकार के वक्तव्य देती है। जो लोग गहराई से जानते हैं कि उन्हें मालूम है कि कांग्रेस ने पहले क्या किया है।

 

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