384 उम्मीदवार उतरे तो क्या बैलेट पेपर से होगा चुनाव:दिग्विजय का दांव चला तो किताब जैसा बनेगा बैलेट पेपर, कैसे मिलेंगे इतने कैंडिडेट्स

‘मेरी लड़ाई तो बीजेपी के खिलाफ हैं। यहां जितने लोग बैठे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि बैलेट पेपर से चुनाव होना चाहिए या ईवीएम से। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग सुन नहीं रहा है। अब एक ही रास्ता बचा है। राजगढ़ लोकसभा में यदि 384 उम्मीदवार खड़े होंगे तब जाकर बैलेट पेपर से चुनाव होगा। बैलेट पेपर से चुनाव हो गया तो बीजेपी चुनाव नहीं जीत सकती।’
ये बयान राजगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का है। वे इन दिनों वादा निभाओ पदयात्रा पर हैं। जहां जा रहे हैं वहां इस बात को दोहरा रहे हैं। न केवल दिग्विजय सिंह बल्कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बैलेट पेपर यानी मतपत्र से चुनाव करवाने के लिए कुछ ऐसी ही दलील दे रहे हैं।
दिग्विजय सिंह की इस मुहिम पर प्रदेश कांग्रेस ने भी मुहर लगा दी है। कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि केवल राजगढ़ नहीं, बल्कि जहां संभव होगा वहां 400 उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएंगे। दैनिक भास्कर ने दिग्विजय और कांग्रेस के इस दावे की पड़ताल की। जाना कि हर सीट पर यदि 400 उम्मीदवार मैदान में डटे रहे तो चुनाव आयोग कैसे मुश्किल में पड़ जाएगा? क्यों ईवीएम छोड़कर मतपत्र से चुनाव कराने पड़ेंगे? क्या कहते हैं एक्सपर्ट और क्या कहना है चुनाव आयोग का। पढ़िए रिपोर्ट…

दिग्विजय की बात में कितना दम ?
चुनाव आयोग के किसी सर्कुलर में इस बात का उल्लेख नहीं है कि 384 से ज्यादा उम्मीदवार होने पर वोटिंग मतपत्र से होगी, लेकिन इस बात में दम है कि मौजूदा ईवीएम में 384 से ज्यादा उम्मीदवारों का उल्लेख नहीं हो सकता।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत कहते हैं कि ये सही है 384 से ज्यादा उम्मीदवार होने पर ईवीएम से चुनाव कराना मुश्किल होगा। आखिर क्यों? इसकी वजह बताते हुए रावत कहते हैं कि वर्तमान ईवीएम की एक बैलेट यूनिट में अधिकतम 16 नाम हो सकते हैं। अधिकतम 24 बैलेट यूनिट ही एक साथ जोड़ी जा सकती हैं। 16×24 के हिसाब से 384 उम्मीदवारों के नाम ही ईवीएम में हो सकते हैं।

384 से ज्यादा उम्मीदवार हुए तो क्या होगा ?
रावत कहते हैं कि चुनाव आयोग के पास फिर यही विकल्प है कि मतपत्र से वोटिंग कराए, लेकिन ये भी इतना आसान नहीं होगा। जब 400 उम्मीदवार होंगे तो बैलेट पेपर भी 30 से 40 पेज का बनेगा। इसके लिए मतपेटी भी नए सिरे से डिजाइन करनी होगी। जिसमें 30 से 40 पेज का एक बैलेट पेपर जा सके। उसी हिसाब से पोलिंग बूथ पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ेगी। मतगणना में भी तीन गुना कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी।

अब सवाल ये है कि 1952 से हो रहे आम चुनाव में ऐसा कब हुआ?
1952 से अब तक किसी सीट पर 400 उम्मीदवार नहीं हुए
हमने दिग्विजय सिंह के इस दावे की पड़ताल के लिए चुनाव आयोग में संपर्क किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन का कहना है कि इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब 400 उम्मीदवार चुनाव लड़े हों। प्रथम चरण के चुनाव के लिए एक लोकसभा सीट से अधिकतम 17 प्रत्याशी मैदान में हैं।
इसी आधार पर हम अपनी तैयारी कर रहे हैं। रावत कहते हैं कि जितना उन्हें याद है पिछले लोकसभा चुनाव में एक लोकसभा में अधिकतम साठ उम्मीदवार तक आ चुके हैं। इससे ज्यादा उम्मीदवारों की जानकारी कभी सामने नहीं आई।

अब समझते हैं कि 400 उम्मीदवार उतारने के लिए क्या करना होगा…
400 उम्मीदवारों को जमानत राशि 1 करोड़ रुपए देनी होगी
लोकसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय जमानत राशि के तौर पर 25 हजार रुपए जमा कराने होंगे। रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार के लिए जमानत राशि 12500 रुपए होगी। यदि सभी 400 उम्मीदवार सामान्य वर्ग के हों तो जमानत राशि के तौर पर 1 करोड़ रुपए जमा होंगे।
जबकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार होने पर न्यूनतम 50 लाख रुपए जमानत राशि के तौर पर जमा होंगे। 5 फीसदी से कम वोट हासिल करने पर जमानत राशि जब्त हो जाती है। यानी ये पैसे उम्मीदवार को वापस नहीं मिलते।
हालांकि, जानकार कहते हैं कि यदि दिग्विजय अपनी जिद पर आ गए तो उनके लिए ये मुश्किल नहीं है। वे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए भी ईवीएम को जिम्मेदार बता चुके हैं। ईवीएम के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की मुहिम में भी वे आगे रहे हैं। ऐसे में जब वे खुद चुनाव लड़ रहे हैं, तब वे ये पैंतरा चल सकते हैं।

राजगढ़ में 19 अप्रैल तक नामांकन, तब साफ होगी दिग्विजय की रणनीति
दिग्विजय राजगढ़ में जहां जा रहे हैं वहां 400 उम्मीदवार की बात जरूर दोहरा रहे हैं। ये कैसे होगा इसका जवाब भी देते हैं। वे कहते हैं कि हम तो सभी को आवेदन दे रहे हैं। देशभर के लोग यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। वे सभी लोग जो बैलेट पेपर से चुनाव चाहते हैं। उन सभी से मेरी प्रार्थना है कि जरा जुगाड़ देखो, जुगाड़ लग जाए जिससे 400 उम्मीदवार चुनाव लड़ सकें और राजगढ़ में मतपत्र से चुनाव हो।
राजगढ़ में तीसरे फेज में 7 मई को चुनाव होने हैं। यहां 12 से 19 अप्रैल तक नामांकन जमा किए जाएंगे। इसके बाद ही यहां तस्वीर साफ होगी कि कितने उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हैं। यदि 384 से ज्यादा उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए तो यहां मतपत्र से चुनाव की संभावना होगी। चुनाव आयोग को इसके लिए नए सिरे से तैयारियां करनी होंगी। दिग्विजय सिंह की रणनीति पर चुनाव आयोग की भी नजर है।

दिग्विजय के इस दावे के समर्थन में कौन-कौन…
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम ने कहा- ज्यादा से ज्यादा नामांकन दाखिल करें
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी वहां कांग्रेस की हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार बता चुके हैं। दो दिन पहले उन्होंने भी राजनांदगांव की एक चुनावी सभा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज्यादा से ज्यादा संख्या में नामांकन फॉर्म जमा करने की अपील की है।
बघेल ने इस सभा में ये भी कहा कि जो काम सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग नहीं कर सका, वो यहां की जनता कर सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उम्मीदवारों की संख्या इतनी हो कि चुनाव कराने के लिए मतपत्रों की जरूरत पड़े।

प्रदेश कांग्रेस ने भी लगाई दिग्विजय की मुहिम पर मुहर
दिग्विजय की इस मुहिम पर प्रदेश कांग्रेस ने भी मुहर लगा दी है। पीसीसी चीफ के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा भास्कर से कहते हैं कि सिर्फ राजगढ़ नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जहां-जहां संभव होगा, हम इतने उम्मीदवार उतारेंगे कि ईवीएम की जगह मतपत्र से वोटिंग हो।

दिग्विजय क्यों चाहते हैं बैलेट पेपर से चुनाव हो ?
दिग्विजय सिंह ईवीएम पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इसी साल 23 जनवरी को उन्होंने भोपाल में आईआईटीयन अतुल पटेल के जरिए ईवीएम में गड़बड़ी का डेमो भी करवाया था। आईआईटीयन अतुल पटेल ने मशीन की गड़बड़ी को दिखाने के लिए एक चिह्न तरबूज को दो वोट डाले।
पहले वोट पर तरबूज की पर्ची वीवीपैट में दिखी। दूसरी बार तरबूज का बटन दबाया तो सेब की पर्ची प्रिंट हुई। अतुल ने कहा, 2013 से चुनावी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हम बैलेट पेपर से वोटिंग की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस दौरान दिग्विजय ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, दबाव में है। आयोग से हम निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं। ईवीएम का सारा काम प्राइवेट लोगों के हाथ में है। जब सॉफ्टवेयर ही सब करता है तो वही तय करेगा सरकार किसकी बनेगी।’

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दिग्विजय ने बताया बैलेट पेपर से चुनाव का फॉर्मूला
मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फॉर्मूला बताया है। उन्होंने कहा कि 400 उम्मीदवार चुनाव लड़े तो बैलेट पेपर से चुनाव हो सकता है। दिग्विजय के बयान पर बीजेपी ने कहा- हार का डर इतना सता रहा तो दबाव में चुनाव लड़ क्यों रहे हो?

भूपेश बोले-बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तो कांग्रेस जीतेगी
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में एक सभा को संबोधित करते हुए अपने सभी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि, अगर एक सीट से 375 से अधिक प्रत्याशी हुए तो वहां चुनाव EVM की जगह बैलेट पेपर से होगा। ऐसे में कांग्रेस की जीत निश्चित है।

तरबूज का बटन दबाया, पर्ची सेब की निकली
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर ईवीएम, वीवीपैट और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। भोपाल में बुधवार को उन्होंने कहा, ‘मेरा आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, दबाव में है। आयोग से हम निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं।

