100 दिन खास, सुशासन की बात-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 100 दिन : बदलाव का साक्षी बना मध्य प्रदेश

मेरा विशेष लेख…
100 दिन खास, सुशासन की बात
– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 100 दिन : बदलाव का साक्षी बना मध्य प्रदेश
डॉ. दीपक राय, भोपाल (20 मार्च 2024)
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को कार्यभार संभाले आज 100 दिन पूरे हो गए। इन 100 दिनों में प्रदेश ने सुशासन की नई तस्वीर को सामने आते देखा है। हुकुमचंद मिल के 4 हजार 800 मजदूरों को अधिकार दिलाना हो या पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना का समझौता हो। यह बड़े निर्णय नई सरकार ने लिए हैं। इतने कम दिनों में प्रदेश के विकास को पंख भी लगे हैं। 10 हजार करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 हजार 500 करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया है। उज्जैन का रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, ग्वालियर एयरपोर्ट का शुभारंभ, पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत जैसे कई काम है, जो 100 दिन के कम समय में डॉ. मोहन यादव सरकार ने पूरे कर लिए हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री के लक्ष्य ‘4 वीआईपी और 4 जातियां’ संकल्प को पूरा करने का खाका भी तय किया है, जिसमें गरीब, किसान, युवा और नारी के कल्याण के लिए कार्य किए जाने हैं। इसके साथ ही सबसे बड़ा बदलाव जमीनी स्तर पर दिखाई दिया है। वह बदलाव राजस्व विभाग का है। याद कीजिए- जमीन जायदाद के काम हो, रजिस्ट्री करवाना हो या फिर नक्शा कटवाना हो। इन कामों को करवाने के लिए पहले नागरिकों की चप्पल घिस जाया करती थीं। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण करवाना बेहद सिर दर्द वाला काम था। इन सभी समस्याओं का समाधान अब ‘साइबर तहसील’ बन गई हैं। अब मध्य प्रदेश के संपूर्ण 55 जिलों में साइबर तहसील ने काम करना शुरू कर दिया है। बहुत कम समय में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। साइबर तहसील सुशासन की नई कहानी लिख रही है। नामांतरण सिर्फ 10 से 15 दिनों में ही होने लगे हैं, जबकि पहले इस काम को करवाने के लिए 60 दिन से भी ज्यादा का समय लगता था। लोगों को तहसील के कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते थे। भ्रष्टाचार से दो-चार अलग होना पड़ता था। लेकिन अब साइबर तहसील में पूरा काम डिजिटल और फेसलेस हो गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति रजिस्ट्री करवाता है, उसके साथ ही नामांतरण की फीस भी ले ली जाती है। रजिस्ट्री होते ही पूरी जानकारी अपने आप साइबर तहसील के पास पहुंच जाती है। इश्तिहार और पटवारी रिपोर्ट के लिए मेमो जारी हो जाता है। इसके बाद आदेश पारित कर भू अभिलेख को अपडेट कर दिया जाता है। 10 दिन में दावा आपत्ति न आने पर आवेदक को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से आदेश जारी कर दिया जाता है। मैं आपको बता दूं कि मध्य प्रदेश में 13 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले आदेश में ही प्रदेश में सुशासन का मॉडल लागू करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि सुशासन सिर्फ कहने की बात नहीं होना चाहिए, यह जमीन में दिखना भी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए साइबर तहसील के गठन का निर्देश भी दिया था। मुख्यमंत्री की शपथ लेने के 100 दिनों में ही सुशासन के परिणाम अब हम सबके सामने हैं। यहां मैं आपको बता दूं – मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में तहसीलों को साइबर तहसील के रूप में अपडेट किया गया है। यहां सारा काम ऑनलाइन हो रहा है, जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया भी पूरी हो रही है। नामांतरण के लिए अलग से आवेदन देने की जरूरत नहीं पड़ रही। रजिस्ट्री के बाद आवेदक के मोबाइल में 15 दिन के भीतर ही आदेश की कॉपी भेजी जा रही है। खसरा-नक्शा में भी तत्काल सुधार हो रहा है। अविवादित नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों में भी साइबर तहसील काम कर रही है। इस प्रक्रिया के ऑनलाइन, पेपरलेस और फेसलेस होने भ्रष्टाचार में भी लगाम लगी है और सुशासन की नई तस्वीर दिखने लगी है। मैं आपको बता दूं- साइबर तहसील परियोजना से नामांतरण, बंटवारा आदि विभिन्न राजस्व प्रकरणों का निराकरण करने वाला मध्य प्रदेश, देश का पहला राज्य है। साइबर तहसील योजना शुरुआत में 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी। 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘विकसित भारत, विकसित मध्य प्रदेश’ कार्यक्रम के पूरे 55 जिलों में साइबर तहसील परियोजना लागू किया। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर तहसील परियोजना की तारीफ करते हुए कहा था कि इससे नाम हस्तांतरण और रजिस्ट्री से संबंधित मुद्दों के लिए डिजिटल समाधान मिलेगा, जिससे लोगों का समय और खर्च बचेगा। मैं एक बात और बता दूं कि साल 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ का नारा भी दिया था। डिजिटल इंडिया भी ई गवर्नेंस की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम था। अब मध्य प्रदेश की साइबर तहसील भी सुशासन की दिशा में आगे बढ़ती हुई नई पहल के रूप में देखी जा रही है। आज भले ही मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 100 दिनों में सुशासन की नई तस्वीर पेश की हो, लेकिन वे रुके नहीं हैं। उन्होंने कई संकल्प तय किए हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए वह आगे बढ़ चुके हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
@followers Jansampark Madhya Pradesh DrLata Wankhede Dr Mohan Yadav
