पाक में शरीफ,बिलावल से ज्यादा pm मोदी लोकप्रिय,विश्वसनीय (श्याम चोरसिया )

भारतीय गैर सन्तात्नियो को भारत के दुश्मन माने जाने वाले पाकिस्तान की आम जनता, बुद्धिजीवियों,प्रेस, ने शर्मशार कर रखा है। वजह। पाकिस्तानियों का अपने पीएम शरीफ बंधु, राष्ट्पति आसिफ जरदारी,नेता बिलावल भुट्टो के मुकाबले भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के ज्यादा लोकप्रिय, विश्वसनीय मानना। पाकिस्तानी मोदी को पीर का दर्जा देते है। वे भारत की आर्थिक, सामाजिक, शेक्षणिक, ओधोगिक प्रगति और विश्व मे भारत के बढ़ते ग्राफ का जनक मोदी को ही मानते है। रमजान जैसे पवित्र महीने में आम जरूरतों की वस्तुओं के दाम भारत के मुकाबले 04 गुना से अधिक है। मंहगाई ने कमर तोड़ रखी है। पेट भरना,बच्चो को पढ़ाना हर किसी के बूते में नही बचा। भारत पिछले 05 सालों से 85 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दे रहा है। पाकिस्तानी अवाम आटे की लिए तरस रही है। आटा आने की भनक लगते ही आटा लूटने के लिए उतावले हो जाते है।
हर स्तर पर त्रस्त, परेशान,बेहाल पाकिस्तानी भारतीय गैर सनातनियो, कश्मीरियों की किस्मत को कोसते है।
गैर सनातनी भारत मे कितने सकूं ओर सुरक्षित,सम्मानित है। ये वे खुले आम बयान करके अपने हुक्कामो को कोसते है। तुलना करते हुए कहते है-pm मोदी अपने राष्ट की चिता करते है। जबकि पाक के हुक्काम देश की बजाय अपने परिवार,कुनबे का घर भरने में जुटे हुए है। मुल्क के बाहर संपत्तियों के अंबार लगा 07 पीढ़ियों का बन्दोबस कर लिया। हर हुक्काम पाक को लूटने में लगा है।
भारत मे आलू,प्याज, खाने का तेल,आटा आदि रोजमर्रा की घरेलू उपयोग की वस्तुएं बेहद सस्ती ओर आराम से मिल जाती है। जबकि पाकियो को आलू के लिए 150-170,प्याज 280-300 रुपये में मिल रही है।
पाक अवाम की मूल पीड़ा रमजान जैसे पवित्र महीने तक मे वस्तुएं सस्ती,सर्व सुलभ करने में हुक्काम का नाकाम होना है। उनका आरोप है।जमाखोरों पर हुक्कामो का कोई जोर न होने से वे बेलगाम हो जनता की मजबूरी को लूट में बदलने में लगे है।
जबकि भारत मे रमजान आम दिनों की तरह मस्त,बेफिक्री से बीत रहे है।
उसकी वजह pm मोदी। pm मोदी सरकार बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सबको सुरक्षा, सम्मान, सुविधाए, हक दे रही है। इसके बाबजूद यदि गैर सनातनी pm मोदी को नकारते है तो उन्हें बेशक पाकिस्तान का जायका लेना चाहिए।उनके सारे मुगालते दूर हो जाएंगे। यदि फितरत, कट्टरता के जाल से मुक्त नही हुए तो जैसे पाकिस्तान रो रहा है। वैसे ही भारत के गैर सनातनियो की हालत हो सकती है।
एक खास बात भारतीय गैर सनातनियो को शर्मसार करने योग्य है। अधिकांश पाक बुद्धिजीवी, धर्म के स्वत्रंत ठेकेदार गर्व से अपने पूर्वजों को सनातनी बताते है। जबकि भारत के गैर सनातनी इस इतिहासिक सत्य को कबूलने की बजाय कट्टरता की सितार बजाते है।दिलचस्प। अरब के शेख खुद को असल बताते हुए भारत,पाक,बंगलादेश के गैर सनातनियो को खालिस नही मानते है।
कितना अजीब।विडंबना पूर्ण है। जिसके लिए उधम मचा अमन,शांति में पलीता लगाने का मौका नही चूकते वही उन्हें अपना की बजाय गैर मानते है। यानी भारतीय गैर सनातनी अपनी जड़ें मजबूत करना ही नही चाहते है। यदि अधिकांश भारतीय गैर सनातनियो कीआंखों में बाल नही होता तो पाकिस्तानियों की तरह सत्य को कबूल लेते। पाकिस्तानियों को भारत से जुड़ने में सीमा बाधा है। मगर भारतीय गैर सनातनी सीमा बंधन से मुक्त है। उनके हक में मजबूत लोकतंत्र खड़ा है।
