अवैध सिंचाई से हाहाकार मचने के आसार(श्याम चौरासिया )
राजगढ़ के ब्यावरा विकासखंड की मध्यम सिंचाई परियोजना शमशेरपुरा अवर्षा के चलते इस साल पोखर में बदल चुकी है। इस विशाल बांध के गर्भ में कुछ ढबरे भरे है। ये ढबरे चौपायों, वन्य जीवों, पक्षियों के अलावा आसपास के गांवों के कंठ तर करने में योग दे रहे है। मगर कुछ किसानों के इन डबरों के भी काल बन जाने से शमशेरपुरा सहित अन्य गांवों के निवासी हलकान है। उनकी सबसे बड़ी चिंता चौपायों,वन्य जीवों को प्यासे मरने से बचाने की है।
नाम न बताने की शर्त पर पीड़ितों ने बताया कि कुछ दबंगो ने इन पोखरों में 02-02 किमी लम्बी पाइप लाइन डाल दी। जिससे वे गर्मी की तीसरी फसल मूंग की सिचाई कर रहे है। मना या आपत्ति करने पर धमकाते है।
सनद रहे राजगढ़ जिला प्रशासन ने छोटे बड़े सभी जल स्त्रोतों को केवल पेयजल के लिए सरक्षित करके उनके अवैध दोहन को अपराध की कतार में रख दिया है। मगर दबंगो पर प्रशासन की ये मानवीय,कल्याणकारी हिदायत भी बेअसर लगती है।
ब्यावरा की एसडीएम मोहनी शर्मा ने ब्यावरा के कंठहार कुशलपुरा से अवैध सिचाई करने वालो के उपकरण जप्त करके पंचनामा बनाया था।
खरीब-रबी की सिंचाई करके बम्पर फसल ले चुके कुछ दबंग किसानों के प्रशासन की सख्त हिदायतों के बाबजूद मूंग की बोवनी हेतु अवैध सिंचाई बदस्तूर जारी रखे जाने की खबर है। अवैध सिंचाई के खिलाफ नप ब्यावरा ने भी आपत्ति दर्ज करा रखी है।
सनद रहे। इस साल इंद्र के धोखा देने के कारण 95% नदी,नाले,तालाब आदि रीते ही रह गए। फुल लेबल तो छोड़ो 25% भी भर नही पाए थे।नदिया तो बाढ़ का जायका लेने के लिए तरस गयी।खाली जलाशय मुह चिढ़ा भावी जल संकट के संकेत दे रहे है। यदि अवैध दोहन को सख्ती से नही रोका गया तो चौपायों,वन्य जीवों के संकट में फसना तय है।
