०प्रतिदिन विचार (15/03/2024)हरित हाइड्रोजन पर टिकी उम्मीदें -राकेश दुबे

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ऊर्जा बदलाव की यात्रा में हरित हाइड्रोजन बहुत बड़ी उम्मीद के रूप में उभर रही है। अपनी उच्च घनत्व ऊर्जा क्षमता के साथ हाइड्रोजन उन सभी उद्योगों में बहुत अच्छी तरह काम कर सकती है, जिनमें प्राकृतिक अथवा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस का इस्तेमाल होता है। इसमें विशेष बात यह है कि जब यह जलती है तो गंदे कार्बन उत्सर्जन के बजाय इससे शुद्ध पानी निकलता है।हाइड्रोजन को कार चलाने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। बशर्ते, इसके लिए प्रौद्योगिकी एवं हाइड्रोजन ईंधन सेल के अर्थशास्त्र के साथ-साथ हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशनों जैसा आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो।
वर्तमान समय में उत्पादित अधिकांश हाइड्रोजन कई मामलों में न तो हरित है और न ही स्वच्छ, लेकिन इसके जलने से मिलने वाला अंतिम उत्पाद निश्चित तौर पर शुद्ध पानी है। आज बड़ी मात्रा में पाई जाने वाली हाइड्रोजन ‘ग्रे’ हाइड्रोजन है जो मीथेन से बनती है, जिसे स्टीम मीथेन रिफॉर्मेशन प्रक्रिया के माध्यम से बनाया जाता है।
रसायन शास्त्र की भाषा में मीथेन एक हाइड्रोकार्बन है और स्टीम मीथेन रिफॉर्मेशन प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड पैदा होती है। कभी-कभी कार्बन डाइऑक्साइड का भंडारण कर लिया जाता है और इससे तैयार होने वाले हाइड्रोजन को ब्लू हाइड्रोजन कहते हैं। यह स्वच्छ गैस होती है, अलबत्ता बहुत महंगी पड़ती है। इसके अलावा काला और भूरा हाइड्रोजन भी होता है, जो काले कोयले और लिग्नाइट से तैयार किया जाता है।
स्वच्छ ऊर्जा के रूप में अकेली उम्मीद हरित हाइड्रोजन पर टिकी है, जो बड़े पैमाने पर उपलब्ध होने के साथ-साथ सस्ती भी है। हरित हाइड्रोजन का उत्पादन पानी में विद्युत अपघटन से रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इस रासायनिक प्रतिक्रिया के लिए सौर या वायु ऊर्जा संयंत्रों में अधिशेष हरित ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है।
पूरे विश्व में हरित हाइड्रोजन संयंत्रों पर अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है। जब इसका बड़े स्तर पर उत्पादन होने लगेगा तो यह लोगों के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा संयंत्रों में उपयोग के महत्त्व की ही नहीं होगी, बल्कि व्यापक स्तर पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद होगा। जापान, यूरोप और भारत हरित हाइड्रोजन पर भारी निवेश कर रहे हैं। भारत में गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी समेत कई बड़े उद्योगपतियों ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए अपनी योजनाओं का ऐलान किया है।
आने वाले समय में अपने देश में हरित हाइड्रोजन का महत्त्व बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि भविष्य में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में न केवल हम आत्मनिर्भर होंगे, बल्कि इस ईंधन का निर्यात भी कर सकेंगे। वर्ष 2030 तक देश में लगभग 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन होने लगेगा, जिसमें से 70 प्रतिशत का निर्यात किया जा सकेगा।
हाल ही में बड़े स्तर पर सफेद हाइड्रोजन की खोजों ने हलचल मचा दी है। समय के साथ यह हरित हाइड्रोजन की पूरी कहानी को बिगाड़ सकती है। सफेद हाइड्रोजन प्राकृतिक रूप से भूगा—-र्भिक हाइड्रोजन है, जो खदानों से निकलती है। इन खोजों ने कुछ लोगों को बहुत अधिक उत्साहित कर दिया है, जिन्होंने इसे स्वर्ण हाइड्रोजन का नाम दिया है। अभी तक सफेद हाइड्रोजन के भंडार अमेरिका, रूस, माली, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई और स्थानों पर पाए गए हैं।
सफेद हाइड्रोजन ने उसी तरह नई उम्मीदों को हवा दी है, जिस प्रकार कभी लीथियम के नए स्रोत मिलने से संभावनाएं जगी थीं। कुछ अनुमानों के मुताबिक पृथ्वी पर लगभग 5 लाख करोड़ टन से भी अधिक सफेद हाइड्रोजन के भंडार मौजूद हैं। इससे दुनिया की दशकों तक की ईंधन आवश्यकता की पूर्ति हो सकती है।
हरित हाइड्रोजन के मुकाबले सफेद हाइड्रोजन का सबसे बड़ा सैद्धांतिक लाभ यह है कि इसके अपेक्षाकृत सस्ता होने की संभावना है और इसके खनन में ऊर्जा की खपत भी कम होगी। सफेद हाइड्रोजन की बढ़ती संभावनाओं से हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं की अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत से सवाल खड़े हो रहे हैं।

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