मणप्पुरम गोल्ड लोन घोटाले की इनसाइड स्टोरी:मैनेजर लॉकर से असली सोना निकालकर नकली रखता था; उसी पर दोबारा लोन लेता था

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भोपाल में मणप्पुरम गोल्ड लोन फाइनेंस कंपनी का मैनेजर संजय सैनी पिछले एक साल से घोटाला कर रहा था। वो गिरवी रखे असली सोने की जगह नकली सोना रखता था। असली सोने को बाजार में गिरवी रखकर लोन लेता था और इन पैसों से जुआ खेलता था।

पुलिस की जांच में पता चला कि सैनी ने कंपनी के कर्मचारियों को 25 हजार रुपए कीमत के मोबाइल गिफ्ट कर अपने साथ काम करने के लिए राजी किया था।

दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। पुलिस जांच में अभी सिर्फ 1 करोड़ 17 लाख के घोटाले के बारे में पता चला है। पढ़िए ये रिपोर्ट..

सबसे पहले मैनेजर सैनी की सटोरिया बनने की कहानी
सैनी ने चार साल पहले जूनियर स्टाफ के तौर पर मासिक 10 हजार महीना तनख्वाह पर फाइनेंस कंपनी जॉइन की थी। सैनी के लिए ये पैसे नाकाफी थे, उसे तेजी से आगे बढ़ने की चाह थी। कंपनी में जल्दी प्रमोशन पाने के लिए उसने एमबीए कर लिया। एमबीए पूरा होते ही उसे इंद्रपुरी ब्रांच का मैनेजर बना दिया गया।

मैनेजर बनने के साथ सैनी की सैलरी में भी 150% का इंक्रीमेंट हुआ। इसी सैनी की करीबी भोपाल के गौतमनगर में रहने वाले अपने पड़ोसी रविशंकर राजपूत से बढ़ने लगी। रविशंकर हाई क्लास लिविंग स्टैंडर्ड मेंटेन कर रहा था। अक्सर उसके आगे-पीछे लोगों की भीड़ लगी होती। उसकी इस लाइफ स्टाइल से सैनी बेहद प्रभावित था।

रविशंकर ने ज्यादा पैसे कमाने और अपनी तरह स्टैंडर्ड मेंटेन करने के लिए सैनी को ऑनलाइन जुआ खेलने की सलाह दी। सैनी लालच में आकर पैसे लगाते चला गया। शुरुआत में फायदा मिला, लेकिन फिर सैनी के पैसे डूबने लगे। इन पैसों को वापस पाने के लिए उसने कंपनी से पैसे निकालने शुरू किए। इसके जरिए 25 लाख रुपए तक जीत हासिल की, लेकिन ज्यादा पैसे कमाने के लालच में उसने सब गंवा दिया।

अब समझिए एक साल तक कंपनी को कैसे चपत लगाते रहे कर्मचारी
संजय सैनी को बैंक से पैसा और सोना निकालने का आइडिया उसके सटोरिया दोस्तों ने ही दिया था, लेकिन मैनेजर होने के बावजूद ये काम सैनी के लिए आसान नहीं था। असल में बैंक के जिस लॉकर में सोना रखा था, उसकी दो अलग-अलग चाबियां थी। एक चाबी सैनी के पास और दूसरी चाबी डिप्टी मैनेजर अजय पाल सिंह राजपूत के पास थी। दोनों चाबियां एक साथ लॉकर में लगाने पर ही उसका ताला खुलता था।

सबसे पहले सैनी ने डिप्टी मैनेजर को अपने पाले में किया। उसे ऑनलाइन बैटिंग एप के बारे में बताया। उसने उसे एक लाख रुपए दिए और मामला सेट हो गया। इसके बाद दोनों ने मिलकर अपने मातहत कर्मचारियों को झांसा दिया। ऑडिटर धर्मेंद्र धोबी को 25 हजार रुपए नकद और इतने का ही एक स्मार्ट फोन गिफ्ट किया। वहीं, कैशियर निलेश सिर्फ एक स्मार्ट फोन में मान गया था।

सैनी ने इन दोनों से कहा था कि ऊपर तक के अधिकारी इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं। कुछ भी गड़बड़ हुई तो वो लोग देख लेंगे। हमें ज्यादा दिमाग नहीं लगाना है। इसके बाद सैनी ने कंपनी के ही लॉकर में रखे गोल्ड पर लोन लेना शुरू कर दिया। सैनी ने लोन लेने के लिए 95 लोगों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे।

लॉकर में डमी पैकेट रखना भूल गए, इसी से पकड़ में आए
कंपनी के लॉकर में दो रंग के पैकेट होते हैं। पहला नीले रंग का। इस पैकेट में उन लोगों का सोना गिरवी रखा जाता है, जिन्होंने ने हाल ही में लोन लिया हो। दूसरा लाल रंग का। इस पैकेट में उन लोगों को सोना गिरवी रखा जाता है, जिन्हें लोन लिए तीन महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। लाल रंग में रखे पैकेट का ऑडिट तीन महीने में एक ही बार किया जाता है।

सैनी और टीम ने इन लाल रंग के पैकेट में रखे सोने के साथ हेराफेरी करना शुरू की। सैनी इन लाल रंग के पैकेट में रखे सोने पर फर्जी दस्तावेज के जरिए लोन लेता, फिर इसी सोने को वापस लॉकर में रख देता। बाहर से आने वाले ऑडिटर को शक न हो, इसके लिए सैनी पैकेट से सोना निकालने के बाद उतने ही वजन वाला नकली सोने का पैकेट लॉकर में रख देता था।

सिर्फ 1 करोड़ 16 लाख का हिसाब मिल पाया
पूरे मामले में डीसीपी क्राइम श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि कंपनी ने 4 करोड़ से ज्यादा का घाटा बताया है, लेकिन हमें अब तक ऑनलाइन बैटिंग एप में 1 करोड़ 16 लाख लगाने का हिसाब मिला है। सैनी ने भी पूछताछ में इतनी ही रकम गायब करने की बात स्वीकार की है। कंपनी को नुकसान का रीऑडिट करने के लिए कहा है। उसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

मामले में पूछताछ जारी है। हो सकता है कि कंपनी के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ जाए। ये भी देख रहे हैं कि सैनी नकली जेवर कहां से बनवाता था।

भोपाल में मणप्पुरम की ब्रांच में 4.43 करोड़ का घोटाला

मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी लिमिटेड की इंद्रपुरी शाखा के निलंबित मैनेजर संजय सैनी और असिस्टेंट मैनेजर अजय पाल सिंह के तीन साथियों को भी क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। बीते एक साल में इस शातिर गैंग ने इंद्रपुरी शाखा के ग्राहकों के गिरवी जेवर और बैंक की रकम मिलाकर करीब 4.43 करोड़ रुपए का गबन किया है।

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