भारत जोड़ो न्याय यात्रा:कांग्रेस की तबाही का मंजर(श्याम चौरसिया )

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राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ती जा रही है। वैसे वैसे कांग्रेस खुद को टूटने,फूटने,कटने से नही बचा पा रही है।ताजा करारा झटका महाराष्ट्र के पूर्व cm अशोक चौहान ओर उनके सेकड़ो समर्थकों ने कांग्रेस ने नाता तोड़ बीजेपी की चौखट पर दस्तक दे, दिया। चौहान के पूर्व भी कुछ अन्य कांग्रेसियो ने पाला बदल लिया था। भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के पोते रालोद को इंडी गठबंधन से टाटा करके एनडीए में समाने का फैसला ले,कांग्रेस के मंसूबो पर पानी फेर दिया।नतीजन अब राहुल की यात्रा रालोद के प्रभाव क्षेत्र पश्चमी up से नही निकलेगी। वजह। जाट बाहुल्य अंचल में राहुल को माला पहनाने वाला नही बचा।

नाक कटने के भय से बचने के लिए सोनिया गांधी सपने पुश्तेनी लोकसभा सीट रायबरेली से जंग में कूदने की बजाय पिछले रास्ते राज सभा से सदन में दिखेंगी।हलाकि सोनिया को तेलंगाना की वारंगल सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की जा चुकी है।

इसी तरह से मप्र में भी कांग्रेस को झटके दर झटके लग रहे है।जबलपुर के मेयर अपने साथियों सहित बीजेपी का दामन थाम चुके है। यदि बीजेपी तमाम कड़वाहट भूल कपाट खोल दे तो पूर्व cm कमलनाथ,सांसद मुकुलनाथ सहित 22 विधायक,02 जिला पंचायत अध्यक्ष, 07 पूर्व काबीना मन्त्री तैयार बैठे है।

महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता संजय निरुपम के अशोक चौहान के कांग्रेस से टाटा करने पर दिए बयानों का मंथन करने से लगता है कि कांग्रेस में जनाधार, लोकप्रिय नेताओँ की बजाय चाटुकारों,थूक झेलने वालो की तूती बोलती है। निरुपम के बयानों की पुष्टि सीनियर नेता सांसद विवेक तंखा ने भी करते हुए कहाकि चौहान के खिलाफ किसी तरह का न कोई आरोप है। न कोई जांच चल रही है। वे बेदाग है। यदि जयराम रमेश जैसे पारखी नेता चौहान को दागी बताते है तो वे अपनी नाकामी,हताशा छुपाते है।

चौहान और आचार्य कृष्णन में थोड़ा सा फर्क है। आचार्य खुल कर कांग्रेस की मौजूदा तुष्टिकरण की नीतियों,सनातन के अंध विरोध, श्री राम सहित अन्य देवी देवताओं के अपमान के खिलाफ बोलते रहे। ये खरी खरी कांग्रेस को नागवार गुजरी।ओर कांग्रेस ने अपने मे सुधार करने की बजाय आचार्य का पत्ता काट दिया।चौहान हलाहल पीते रहे।पीते रहे। मगर गले से ऊपर होते ही एक ही झटके में डूबते जहाज से कूद कांग्रेस को सकते में डाल गए।इसी कतार में पचासों कांग्रेसी खडे होकर सही वक्त का इंतजार कर रहे है। इसकी पुष्टि महाराष्ट्र के उपमुख्य मन्त्री देशमुख ने भी की है।उनमें मप्र से विवेक तंखा

भी लगते है।

यात्रा की इति श्री 20 फरवरी को महाराष्ट्र में प्रस्तावित है। उठती सुनामियों को देखते हुए लगता है कि यात्रा अधबीच में ही दम तोड़ सकती है। वैसे भी यात्रा खास जनसमर्थन नही जुटा पा रही है।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तो अनेक नामचीन नेता ही किनारा कर गए।

यात्रा को सबसे करारा झटका बंगाल में ममता के बाद बिहार में नीतीश,केजरीवाल की आप, रालोद सहित अन्य दलो/दिग्गज नेताओं ने दिया है। अभी राजस्थान,मप्र,उत्तरप्रदेश,हरियाणा महाराष्ट्र सहित अन्य सूबे बाकी है। बाकी हे- इति श्री होने में 06 दिन।

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