गुलदस्ता संस्कृति-खबर ही रही मोदी की मंशा..?

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार को दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रियों से मिले तो गुलदस्ता देने के साथ फोटो खिंचवाना और इसे प्रदेश के अख़बारों में छपवाना नहीं भूले.वो ही क्यों,पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज भी जब प्रधानमंत्री और मंत्रियों से मिलते थे तो गुलदस्ते की भेंट और फोटो सेशन नहीं भूलते थे.उनके आगमन पर स्वागत में विज्ञापन छपवाए जाते हैं और महामहिम और हिज एक्सीलेंसी संबोधनों का खूब इस्तेमाल होता है.राष्ट्रपति और प्रधानंत्री के आगमन पर भोपाल की जनता इसकी फूहड़ नुमाइश देखती रहती है.पिछले साल प्रधानमंत्री भोपाल पधारे थे तब मोहन यादव ने उनके प्रवास के लिए क्या शाही बंदोबस्त किया था..!
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने पहल कर राजभवन को लोकभावन नाम दे दिया है.इसका अनुसरण मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने किया है.यहाँ मुझे प्रधानमंत्री मोदी की आठ दस साल पहले की अपील याद हो आई.तब उन्होंने ट्विट किया की उन्हें गुलदस्तों के बजाए पुस्तकें भेंट की जाएँ.ट्विट के बाद गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर प्रधानमंत्री को गुलदस्ता देने पर रोक लगा दी थी.यह आदेश प्रदेशों के मुख्य सचिवों आदि को भी भेजा गया.
लगता यही है की खुद मोदीजी अपनी अपील को लेकर गंभीर नहीं हैं और जब राष्ट्रपति मुर्मू से मिले तब गुलदस्ता ही भेंट किया था.तभी उनके अनुयायी सत्ताधीशों ने अपील को गंभीरता से नहीं लिया और यह सामंती रिवाज जारी है.वर्ना मुख्यमंत्रियों आदि की क्या बिसात जो उनके आदेश की अनदेखी करते..!कहने को हमारा लोकतंत्र 70 बरस पुराना हो गया है पर राजसी ठाठबाठ और रस्मों रिवाज के प्रति मंतरी-संतरी की श्रद्धा और आसक्ति जब तब फनफना कर हिलोरें लेने लगती है.(टाइम्स ऑफ़ इंडिया/दैनिक भास्कर की खबरें )

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