अखबारों का अनोखा संग्रहालय, भारत ही नहीं विश्व में अनोखा है।Ashok manbani

अखबारों का अनोखा संग्रहालय, भारत ही नहीं विश्व में अनोखा है।
इस बौद्धिक संपदा का संग्रहण, संकलन आसान न था।
यात्रा शुरू होती है तो सह यात्री भी जुड़ते हैं लेकिन जिसने यात्रा शुरू की उसकी रचनात्मकता को शताब्दियां याद रखती हैं।
ऐसे ही व्यक्तित्व हैं परम आदरणीय पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर जी।
उनसे मेरी पीढ़ी के कलमकारों ने बहुत कुछ सीखा है और निरंतर सीख रहे हैं। कितने अवसरों पर कार्यक्रमों में साथ रहा ,भाई साहब के ,मुझे भी याद नहीं। मेरी शब्द यात्रा 1983 से प्रारंभ हुई है जब नवभारत के लिए भी कभी कभार लिखा करता था। आपका निर्देशन मिलता रहे, आपकी जन्म वर्षगांठ पर आपके अनुज वत पत्रकारों ,रचनाकारों की शुभकामनाएं हैं।
चित्र ,संग्रहालय स्थित श्रीधर भाई साहब के कक्ष का ही है और भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ओम प्रकाश रावत जी भी दृष्टव्य हैं।
