राजगढ़,गुना,भिंड : वर्ग संघर्ष के घाव ताजा (श्याम चौरासिया )

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तीसरे दौर की 09 सीटों में से 07 मई को प्रस्तावित मुरैना, भिंड,गुना-शिवपुरी

राजगढ़ में भी मतदान के लिए बीजेपी कांग्रेस जबरजस्त जोर लगा रही है। बीजेपी के पास भारत को मजबूत,आत्म निर्भर, पांचवी बड़ी आर्थिक शक्ति में बदलने की उपलब्द्धि है तो इंडी गठबंधन अपने ही जाल में फस भरम,दिशा हीनता, विचारों से दीन हीनता का शिकार हो जनमत खोती दिख रही है।

भिंड,मुरैना,गुना,राजगढ़ सीटो पर 2001-2003 में लगाए हरिजन एक्ट से छिड़े वर्ग संघर्ष का जिंन्न फिर निकल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा रहा है। सबसे ज्यादा इस एक्ट का दुरुपयोग इन्ही जिलों में हुआ था। आलम था कि की गई झूठी,फर्जी रिपोर्ट से बचने के लिए लोग घर छोड़ जंगलों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए थे। न कोई अपील। न कोई दलील। एक्ट ने पुलिस के भी हाथ बांध दिए थे।

बिजली,पानी, की तंगी ,बदहाल सड़को से त्रस्त प्रदेश के विकास, निर्माण,रचना का बंटाधार हो गया था। उद्योग धंधों की बलि पानी बिजली की तंगी ने ले ली थी।

त्रस्त प्रदेश ने मौका मिलते ही राजा दिग्गी के 10 साला कुशासन का अंत 2003-04 मे करके बीजेपी की उमा भारती को cm बनाया।तब से प्रदेश की तस्वीर,तकदीर बदलने की क्रांति का श्री गणेश हुआ।

प्रदेश उन काले दिनों को भुला नही है। गुना से बीजेपी प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की दुरंगी, सांस्कृतिक राष्टवाद में बत्ती देने वाली तुष्टिकरण की नीतियों, पुश्तेनी 55% संपति को कांग्रेस के कब्जाने की नीति नियत पर जबरजस्त हमलावर है। पूर्व cm शिवराज सिंह चौहान, यूपी के cm योगी, गृह मंत्री शाह सहित अन्य नेता भी हमलावर है। बचाव में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी मंगल सूत्र का तराना गा सहानुभूति लूटने की नाकाम कोशिश मुरैना में कर चुकी है।

वार दर वार का सिलसिले का अंत 05 मई शाम 05 बजे हो जाएगा।

मुरैना,भिंड,राजगढ़ में बीजेपी की जीत का अंतर 2019 की तुलना में कम हो सकता है। गुना में अंतर छलांग लगा बढ़ सकता है।

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