अनुपम खेर के सिनेमा की बात ही अलग है

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हिंदी सिनेमा में अनुपम खेर ने अनेक प्रयोग किए हैं। करीब 35 वर्ष पहले उनकी फिल्म पेस्टोन जी देखी थी, जो एकमात्र ऐसी फिल्म थी जिसमें अनुपम जी और उनकी पत्नी किरण जी ने साथ अभिनय किया था।
अनुपम जी की सारांश और कश्मीर फाइल की तो बात ही अलग है। आज भोपाल में फिल्म “तन्वी द ग्रेट” के विशेष प्रदर्शन के बाद लगा कि इस फिल्म की विशेषताओं को मित्रों से साझा किया जाए। यह फिल्म दो समानांतर कथाओं को लेकर चलती है जो एक मूल कथा के ही दो हिस्से हैं। आटिज्म जैसी समस्या से प्रभावित एक युवती तन्वी (शुभांगी दत्त) के जीवन और सियाचिन के पास स्थित भारतीय सीमा तक जाने के सपने को दिखाती है। वहीं ऑटिज्म पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में तन्वी की मां (पल्लवी जोशी) की भागीदारी साथ-साथ चलती है। परोक्ष रूप से यह फिल्म युवाओं को सेना में जाने की प्रेरणा भी देती है। फिल्म यह सिद्ध करती है कि जीवन में कितनी ही बाधाएं सामने आ जाएं, व्यक्तिगत जीवन कष्टप्रद हो , लेकिन अपना सपना पूरा करने का हौसला होना चाहिए। यह व्यक्ति का अधिकार भी है। युवाओं में राष्ट्र प्रेम की ललक हो तो सेना जुड़कर गर्व की अनुभूति अतुलनीय है। तन्वी ऐसे लाखों युवाओं की प्रेरणा बनी है। तन्वी सियाचिन जाने का और पिता की तरह देश के लिए जीवन अर्पित करने का स्वप्न देखती है। किसी का आटिस्टिक होना उसका अक्षम होना नहीं है। यह बताने वाली फिल्म “तन्वी द ग्रेट” कहानी की कसावट, अभिनय ,गीत संगीत की श्रेष्ठ का प्रमाण है। निर्देशन तो लाजवाब है ही। फिल्में बोमन ईरानी और अरविंद स्वामी जैसे मंझे हुए कलाकार भी हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने फिल्म को राज्य में कर मुक्त किया है। आज ही फिल्म का अनुपम खेर जी से व्यक्तिगत रूप से भी भेंट हुई। फिल्मकार बधाई के पात्र हैं।ashok manbani
