मोहब्बत को रुस्वाह करता लिविंग रिलेशन।
मोहब्बत नाम है दिलों को दिलों से जोड़ने का,मोहब्बत पत्थर दिलों को पिघला कर मोम की तरहा बना देती है,माँ से मोहब्बत जन्नत बन जाती है, अगर मोहब्बत बाप से हो तो जन्नत का द्वार बन जाती है, मोहब्बत कोई जात या धर्म नही देखती, आज के युवाओं ने मोहब्बत को रुस्वाही की ओर धकेल दिया है, ओर इस रुस्वाहि को वेस्टर्न कल्चर के स्वरूप नाम दिया गया लिविंग रिलेशनशिप,
आखिर क्या है लिविंग रिलेशनशि❓
इस भाग दौड़ भारी ज़िंदगी मैं युवा इतने व्यस्त है कि उनके पास अपने लिए सही जीवन साथी चुनने के लिए भी वक्त नहीं है, इस ही व्यस्तता चलते युवाओ ने अपनी संस्कृति छोड़ वेस्टर्न कल्चर अपना लिया है, बड़ी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों मैं काम करने वाले युवा लिविंग रिलेशनशिप को अपनाते हैं, जिसमे युवक युवती एक दूसरे के साथ एक छत के नीचे पति पत्नी की तरहा एग्रीमेंट के साथ रहते है, जिसमे जिस्मानी रिश्ते तो बनते है, मगर रूह से रूह का रिश्ता कभी नही बन पाता, इस नापाक रिश्ते के चलते जब दिल चाहे पार्टनर बदल दीए जाते है, अब यह लिविंग रिलेशनशिप का कल्चर युवाओं के दिलो में दीमक की तरहा घर करता जा रहा है, जिसके परिणाम अंत में काफी भयावय रूप में नजर आते हैं, वक्त रहते इस नाजायज वेस्टर्न कल्चर पर रोक नहीं लगाई गई तो, देश के युवक युवतियों गुमराही की ओर इस ही तरह बढ़ते रहेंगे और इस वेस्टर्न कल्चर के चलते कई गोदें सुनी रह जाएंगई, और सुनी हो जाएगी, यह नापाक रिश्ता कई जुर्मों को भी जन्म देता है, भ्रूण हत्या जैसे अपराध इस नापाक रिश्ते में शामिल है, कई बार तो युवतियों को इस नापाक रिश्ते में अपनी जान तक गवना पड़ जाती है, गुज़रे दिनों में हम इस तरह के कई वाक्य सुन चुके हैं लिविंग रिलेशनशिप पार्टनर ने ली अपने पार्टनर की जान, ज्यादा दूर अपनी सोच ना ले जाते हुए राजधनी भोपाल के ही वाक्ये को ही ले लीजिये जो 27 जुलाई को बजरिया थाना क्षेत्र में अंजाम दिया गया, जिसमें देखा गया की इस नापाक बदबूदार रिश्ते का अंजाम भी बदबूदार हुआ, इस नापाक रिश्ते का खामियाजा युवती को अपनी जान गवा कर भुगतना पड़ा, युवती की लाश 3 दिन बाद लिविंग पार्टनर के घर से बरामद की गई, यह घटना गवाही देती है कि नापाक रिश्ते का अंजाम काफी बुरा होता है, इतिहास गवाह है किसी भी धर्म की किताब उठा कर देखलो माँ बाप का दिल दुखाने वाला कभी सुखी नहीं रहता, मां बाप कड़ी मेहनत मशक्कत कर औलाद को पालते पोसते हैं, उनके विवाह को लेकर अनेको सपने संजोते हैं, वही औलाद अपने मां-बाप के सपनों को अपने पैरों तले रौंद वेस्टर्न कल्चर अपनाने के लिए दौड़ जाती हैं, जिसके परिणाम बत से बत्तर होते हैं,
सीख उन युवाओं के लिए जो वेस्टर्न कल्चर को अपनाए हुए है
माँ, बाप उस वृक्ष की तरह है जो सदैव ठंडी छाया देता है, इतिहास गवाह इस छत्रछाया से जो बाहर निकला उसको तपती धूप में जलाया है,
