रमेश विश्वास कुमार जिंदा क्यों बच गया?-Madan Mohan samar

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मैं इस तरह की पोस्ट पर गुस्से में हूं कि रमेश विश्वास कुमार जिंदा क्यों बच गया? वह क्यों नहीं मरा?।
कुछ अविश्वसनीय उदाहरण रखता हूं।
याद करो देश को दहला देने वाले कवियों के एक्सीडेंट जिसका मैं स्वयं साक्षी हूं उस घटना में कवि जॉनी बैरागी जी को एक खरोंच भी नहीं आई थी। उन्होंने ही हाथ देकर पीछे आ रही मेरी मेरी गाड़ी रुकवाई थी जबकि उस दुर्घटना में पांच लोग मारे गए थे जिनके शव मैने निकाले थे। अभी 24 फरवरी को जिस भीषण हादसे में मैने मेरा छोटा भाई बंटी खोया है उसमें वर्षा पूर्ण सुरक्षित बाहर थी और उसे कोई चोट नहीं है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। प्लेन क्रेश में भी कई बार ऐसे भाग्यशाली लोग बचे हैं ऐसे अनेक उदाहरण दुनिया में हैं। यह दुर्लभ से भी दुर्लभतम संयोग होता है किसी का इतनी बड़ी घटना में जीवित बचना। मैने ऐसे अनेक प्रकरण देखे हैं मेरी पुलिस सेवा में जब कोई किसी घटना में चमत्कारिक रूप से बच गया हो। एक बार उफनती नर्मदा में बस गिरी और एक तीन साल की बच्ची बस के टायर पर अटकी जिंदा मिली वह भी पांच किलोमीटर दूर अब वह टायर कैसे निकला और डूबने से पहले उस बच्ची तक कैसे पहुंचा और उफनती नर्मदा में बच्ची उस पर कैसे पहुंची? किसी के पास कोई जवाब नहीं है इसका।
मैं अनेक बार कहता हूं जीवन-मृत्यु का खेल बहुत रहस्यमयी है। व्यक्ति सायकिल से गिरकर मर जाता है तो प्लेन क्रेश में सुरक्षित बच जाता है, यह घटना इस बात का उदाहरण है, जिसमें सब के काल कवलित होने पर केवल एक व्यक्ति रमेश विश्वास कुमार बचा। हम उसके बचने पर ईश्वरीय चमत्कार के स्थान पर साजिश की बू सूंघ रहे हैं। भला यह भी सोचिए उस सीट पर बैठकर वह क्या कर सकता था? क्या वह सारी सुरक्षा के बाद भी विस्फोटक लेकर गया था? क्या सीट नंबर 11A के नीचे उसने ड्रिल किया था ताकि विमान गिरकर वह बाहर आ जाए?क्या उसने इंजन बंद कर दिया था? क्या वह इतना शक्तिमान था कि अपने पैर से दबा कर उसने विमान गिरा दिया और खुद निकल गया? आपके अनुसार इसके अलावा वह क्या कर सकता था?
इस दुर्घटना की जांच के लिए विश्व स्तरीय जांच दल काम कर रहे हैं। कृपया अपने की–पेड दबाकर विशेषज्ञ होने का दावा न करें तो बेहतर होगा। हां व्यक्तिगत विचार आना स्वाभाविक है। वर्तमान वैश्विक उथल–पुथल को देखते हुए किसी साजिश अथवा चूक पर विमर्श अनुचित नहीं है। लेकिन एक व्यक्ति जिसे ईश्वर ने जीवन दिया उसे मौत से भी अधिक पीड़ा पहुंचाना तो अनुचित ही है। कुछ लोग तो बाकायदा गली के लोगों का इंटरव्यू बड़े एक्सपर्ट के रूप में पेश कर अपने व्यू बढ़ाने तक पर उतर आए हैं। इस घटना में 270 से अधिक लोगों की हंसती–खेलती दुनिया उजड़ी है। पल भर में अपनों की मुस्कुराती जाने गई हैं। पूरी दुनिया के लिए शोक का समय है। इसमें अपने अवसर मत तलाशिए। जो भी हुआ होगा वह सामने आएगा। कुछ पूर्वाग्रही भारतीय कहेंगे कुछ नहीं सामने लाया जाएगा, दबा दिया जाएगा आदि आदि तो उनकी संतुष्टि इसी बात में कही जा सकती है कि इसमें 53 ब्रिटिश,7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक भी शामिल है। ये देश भी जांच में शामिल हैं। ब्लैक बॉक्स भी है।थोड़ा सब्र करो। और ईश्वरीय चमत्कार की दिव्यता को समझो। प्रार्थना है ईश्वर के चमत्कार सदा होते रहें तथा किसी की असमय मृत्यु न हो।
सर्वे भवन्तु सुखिन:

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