“सृजन” में बच्चों एवं पालकों ने जाने महिलाओं संबंधित कानून , कानूनी अधिकार और डालसा की भूमिका

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भोपाल पुलिस?

“सृजन” में बच्चों एवं पालकों ने जाने महिलाओं संबंधित कानून , कानूनी अधिकार और डालसा की भूमिका

महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता एवं स्वावलंबी बनाने हेतु भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की महत्वपूर्ण पहल “सृजन” अभियान के तहत आज दिनांक 2 जून 2025 क़ो इंडोर क्लास का विषय महिला संबंधित कानून था, जिसमें कुल 79 (20 बालक एवं 7 पालकों सहित ) किशोर –किशोरियों एवं ने भाग लिया । सर्वप्रथम पिछले सत्र का रिकेप लिया गया ।

संदर्भ व्यक्ति श्री अरविन्द कुमार सिंह, वकील डालसा ( डिफेंस कॉउनसिल- डिप्टी चीफ लीगल ) ने बताया कि संविधान ने महिलाओं एवं पुरुषों को बराबर अधिकार दिए है एवं आर्टिकल 14 एवं 15 महिलाओ को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करते है। कानूनी के समक्ष सभी बराबर है एवं कानून सभी को समान दृष्टि से देखता है । उन्होंने आगे घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 , मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, हिन्दू उतराधिकार अधिनियम 1956 (महिला /बेटियों के पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार सुनिश्चित करने हेतु ) महिलाओ को पुरुषों के समान संविधान ने वोट देने का अधिकार भी है।

उन्होंने आगे बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत, कोई भी व्यक्ति जिसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, वह कोर्ट में याचिका लगा सकता है। राज्य के नीति निर्देशक तत्व में समान काम के लिए समान वेतन, न्याय और आर्थिक स्वतंत्रता के सिद्धांत शामिल हैं। ये सिद्धांत भारत के संविधान के भाग चार में दिए गए हैं और सरकार को अपने कामकाज में इन सिद्धांतों का पालन करने का निर्देश देते हैं
उन्होंने निर्भय केस का जिक्र करते हुए उसके बाद आने वाले महिलाओं के लिए कानूनी बदलाव के बारे मे भी बताया ।

उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला सुरक्षा कानून जैसे दहेज प्रतिषेध अधिनियम , भारतीय न्याय संहिता , भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की मुख्य बातें जो महिला एवं बच्चों से संबंधित है बच्चों एवं पालकों को बताई । साथ ही उन्होंने परिवार न्यायालय एवं जिला विधिक प्राधिकरण की भूमिका के बारे में बताया ,उन्होंने कहा कि आज चार पारिवारिक कोर्ट भोपाल मे स्थापित किए गए है जिसके कारण महिलाओ के मामलों को सुनने मे आसानी हुई है ।

उन्होंने बताया बिना वेतन काटे मातृत्व अवकाश जो 6 माह का मिलता है, कार्यस्थल पर महिलाओ का यौन उत्पीड़न 2012 अधिनियम को भी बताया जिसमें यौन उत्पीड़न को गंभीर अपराध माना गया है । यह कानून महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है। यह यौन उत्पीड़न की रोकथाम और निवारण के लिए एक तंत्र स्थापित करता है, जिसमें शिकायत निवारण प्रक्रिया और आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) या स्थानीय शिकायत समितियों (LCC) की स्थापना शामिल है।

उन्होंने कई केस के निर्णय जिसके बाद कई सारे बदलाव हुए और महिलाओं के फ़ेवर मे निर्णय लिए गए सभी से शेयर किए । अंत में बच्चों एवं महिलाओ ने उनसे सवाल किए जिसके जवाब उन्होंने दिए और शंका का समाधान बखूबी किया । उन्होंने डालसा के कार्यों का उल्लेख भी किया और कहा कि घटना घटित होने के बाद वो क्या कर सकते है डालसा उनके मार्गदर्शन देंगे और यह निशुल्क कार्य करता है एवं जिनकी 2 लाख से कम आम जन है उनके लिए निशुल्क है साथ ही उन्होंने राज्य विधिक प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण की भी जानकारी दी और सभी बच्चों को डालसा आने का आमंत्रण दिया ।

आउट डोर क्लास में अंशु राजावत ने आज फिसिकल एक्सर्साइज़ हेंड मूव मेंट एवं आउट्डोर क्लास में USA ( unarmed combat six) पंच डबल पंच ,ट्रिपल पंच ,फोर एवं फाइव पंच का बच्चों को अभ्यास करवाया।

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