शर्मिष्ठा पनोली : टीएमसी के ताबूत की कील ( श्याम चोरसिया)

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भारतीय संस्कृति,सनातन के गौरव देवी देवताओं, भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले गैर सनातनियो, गैर भारतीय बनाम पाकिस्तानियों, बंग्लादेशसियो को खुश करने में बंगाल की cm ममता बैनर्जी ने लोकतंत्र, संविधान को खूंटी टांग 22 साला युवती शर्मिष्ठा पलोनी को अलीपुर जेल में ठूँस दिया। पलोनी का कसूर इतना था कि सोशल साइड पर भारत के खिलाफ जहर उगलने,नफरत की खेती करने वालो की जमकर खिंचाई करके सनातन की प्राचीरों को मजबूत किया।
पनलोनी का ये पवित्र कर्तव्य ममता के एक गैर सनातनी छर्रे को नागवार गुजरा ।उसने बंगाल में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। और ममता की पुलिस पलोनी को हरियाणा से उठा ले गयी।
इस साजिस की तह में पाक का एक कथित एनजीओ बताया जा रहा है। उक्त एनजीओ की शे पर एक गैर सनातनी बंगाली कट्टर जिहादी,अपराधी ने पलोनी पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा, रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
मुर्शिदाबाद सहित समूचे बंगाल में टीएमसी के नेता, कुछ महिला सांसद, कुछ विधायक और बंगाल को पाक में तब्दील करने में लगे ममता के गुर्गे आए दिन सनातनी देवी देवताओं को अपमानित,विकृत करते रहते है। भड़काऊ बयानबाजी करके सनातनियो की आस्था, विश्वास को चोट पहुचाने का दुष्कर्म करते रहते है।मगर ममता की पुलिस उन्हें पचा, उनके गुनाह पर पर्दा डालती रहती है। ममता शासन/प्रशासन के इस भेदभाव, दोगले पन के खिलाफ नीदरलैंड के एक सांसद पलोनी की तरफदारी में कूद ममता सरकार को आड़े हाथ लिया। अभिव्यक्ति की आजादी का चीरहरण बताया। पलोनीकी तरफदारी में सकल सनातन समाज, सांसद कंगना रनोत, आंध्र के उप मुख्यमंत्री, सैकड़ों राजनेता, बुद्धिजीवि, पत्रकार,वकील, विद्यार्थी आदि एक जुट हो टीएमसी के हिटलर पने को कोस रहे है।उबल रहे है। बेगुनाह पलोनी को दूसरी नूपुर शर्मा के रूप में प्रतिष्ठा, संम्मान दिया मिल रही है। मिले क्यो न? भारत को गलियाने वालो को ही तो पलोनी ने जबाब देकर कट्टर,जिहादियों, के हिमायतियों को बेपर्दा किया। आप्रेशन सिंधुर की अपील भी यही है।
बेबाक जबाब देना पलोनी का राष्ट्रीय धर्म, कर्तव्य था।
पलोनी की बेतुकी एक तरफा गिरफ्तारी से न्याय पालिका पर भी सवाल खड़े हो रहे है। आंतकवादियो,रोहिग्यो,घुसपैठियों पर संज्ञान लेने वाले मिलार्ड बंगाल की cm के आगे असहाय? दूध पिलाते दिखते है। लगता न्याय सड़ चुका है। यदि केंसर के इलाज में देरी कर दी तो पाक, चीन की याचिकाएं भी कबूल करके सेना को बंधक बनाने में भी शायद पीछे न हटेंगे।
केंद्रीय सरकार को भी कानून के छेदों को बंद करना होगा। पेंचों का समाधान करके बंगाल या बंगाल जैसे अन्य सुबो की मनमानी पर लगाम लगानी होगी।
ये महसूस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा भी है। मगर कहने से ममता सरकार पर यदि जू रेंगती होती तो बंगाल प्रचंड अराजकता में न धधक रहा होता। शाह बंगाल की टीएमसी सरकार पर हमलावर है। पिछले 10 सालों में टीएमसी सरकार ने बंगाल को कुचलने , तनाव भड़काने, नारी अपराधों, शोषण को मगरी पर बैठाने के सिवा कुछ नही किया।बंगाल में न कानून,न्याय का राज है। न सविधान में आस्था है। न लोकतंत्र में।
पिछले 10 सालों में 02 राज्यपाल, केन्द्रीय जांच एजेंसियां संदेश खाली, मुर्शिदाबाद सहित अनेक कांड में टीएमसी के गुर्गों को बेपर्दा कर चुकी है। पुलिस की संदिग्ध भूमिका पा चुकी है। रिपोर्ट केंद्र को सौप चुके। मगर केंद्र लाचार। बेबस।
शर्मिष्ठा पलोनी का मामला ममता की टीएमसी की दादागिरी के खिलाफ कील साबित होना तय है। पलोनी को हर भारतीय ही नही बल्कि विश्व भर का समर्थन मिल रहा है। ममता सरकार की थू थू हो रही है। बतौर cm ममता वेनर्जी विदेश तक मे लताड़ी जा चुकी है। ममता सरकार जन विश्वास खो लोकप्रिय हो चुकी है।
ममता की टीएमसी सरकार को भंग करके राष्ट्रपति शासन लगाने की पुरजोर मांग संदेश खाली की उत्पीड़ित महिलाओं सहित हर भारतीय कर रहा है। बंगाल के बीजेपी,कांग्रेस नेता अत्याचारी ममता सरकार की बेदखली के पक्ष में एकमत है। वे मानते है। बंगाल को बचाने का एक मात्र विकल्प राष्ट्रपति शासन ही है। देर करने से ममता सरकार को और ज्यादा जुल्म, ज्यादती, पक्षपात,भेदभाव करने का मौका मिलेगा। लोकतंत्र,संविधान की मूल प्रकृति के एकदम खिलाफ है। प्राकृतिक न्याय की हत्या हो रही है।

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