पत्रकारो पर होते राजनीतिक हमले औऱ गहरी नींद सोता पत्रकार?
दुनिया भर में, पत्रकारों को उत्पीड़न, कारावास, हिंसा या मौत का सामना करना पड़ता है – केवल अपना काम करने के लिए।
पत्रकारिता एक घातक पेशा बना हुआ है – और दस में से नौ बार पत्रकारों की हत्या का मामला अनसुलझा रह जाता है। पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन और ऑफलाइन अन्य खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। पत्रकारों की जेलों में जाने की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जबकि ऑनलाइन हिंसा और उत्पीड़न के कारण आत्म-सेंसरशिप और कुछ मामलों में शारीरिक हमले भी बढ़ रहे हैं।
अगर आंकड़ों पर नज़र दौड़ाई जाए तो भारत मे सबसे ज्यादा मामले सामने आए है ? 2016 से 2024 के अंत तक विश्व भर में 600 पत्रकारों की हत्याएं दर्ज कीं , जो पिछले आठ साल की अवधि से लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा है। 2020 से ये सील सील भारत मे ज्यादा बढ़ता नज़र आया भारत मे अब तक 68 पत्रकारों की हत्या हुई। औऱ 100 से अधिक पर जानलेवा हमला 1000 से ऊपर को धमिकया मिली 500 से ऊपर पत्रकारो पर आपराधिक मामले दर्ज हुए जिनमे अधिकतर मामले राजनीतिका हमले के तौर पर महिला कानून का इस्तेमाल कर दर्ज किए गए । 200 से ऊपर पत्रकार जिला बदर किये गए । ये सभी आंकड़े खास कर भाजपा शासित राज्यो में देखने को मिले ?
फिर भी, पत्रकारों की हत्या के लिए दंड से मुक्ति की वैश्विक दर चिंताजनक रूप से उच्च है: दस में से नौ बार, मामला अनसुलझा रहता है। जहाँ पत्रकारों की हत्याओं की संख्या अधिक है, वहाँ इन हत्याओं के लिए दंड से मुक्ति भी अधिक है, जिससे हिंसा का चक्र निरंतर चलता रहता है?
दुनिया भर के 900 से ज़्यादा पत्रकारों से ऑनलाइन हिंसा के अपने अनुभवों के बारे में एक सर्वेक्षण करवाया था । इस सवाल का जवाब देने वाली 625 महिला पत्रकारों में से 73 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें अपने काम के दौरान ऑनलाइन हिंसा का सामना करना पड़ा है?
मार्च 2020 और फरवरी 2022 के बीच कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद कम से कम 1,967 पत्रकारों की मृत्यु हो गई ?
