बीना विधायक के खिलाफ कांग्रेस दायर करेगी याचिका

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सागर जिले की एकमात्र कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई को राहतगढ़ में सीएम के सामने बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस कार्यक्रम में निर्मला ने सीएम के हाथों बीजेपी का गमछा गले में डाला था। निर्मला को दलबदल किए आज 84 दिन हो चुके हैं। लेकिन उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। अब कांग्रेस निर्मला की सदस्यता खत्म कराने को लेकर हाईकोर्ट में अगले चार-पांच दिनों में याचिका दायर करने जा रही है।

5 मई को विधायक निर्मला सप्रे को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।
5 मई को विधायक निर्मला सप्रे को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।

निर्मला ने विधानसभा को दिया जवाब-कांग्रेस से मोहभंग

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से दैनिक भास्कर ने पूछा कि आपने निर्मला सप्रे को बीजेपी में शामिल किया है तो अब उन्हें बीजेपी और कांग्रेस के बीच क्यों लटका कर रखा है? इसके जवाब में उन्होंने कहा- मुझे जो जानकारी है उन्होंने शायद विधानसभा को लिखकर दिया कि मेरा कांग्रेस से मोहभंग हुआ है। मैं विधायक हूं। जनता की सेवा के लिए चुनकर आई हूं। जनता के लिए मेरा अधिकार है कि मुख्यमंत्री से मिलूं।

जीतू बोले- निर्मला का इस्तीफा देकर चुनाव लड़वाएं सीएम

निर्मला सप्रे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- मैं मोहन यादव को चुनौती दे रहा हूं कि आप इतने लोकप्रिय मुख्यमंत्री हो तो आप निर्मला सप्रे को इधर से उधर क्यों घुमा रहे हो। आप में दम होगा तो आप जीतोगे, हम जनता के बीच में जाएंगे हम में दम होगा तो हम जीतेंगे। जनता के ऊपर छोड़ो, वह क्या करना चाहती है। आप पहले लोकसभा चुनाव में उन्हें ले गए। और हाथ ऊंचा करा दिया ये हमारी पार्टी में आईं। और अब डर क्यों? क्या कारण है कि आप इस्तीफा नहीं दिलवा रहे हो अगर आपकी बहादुरी है तो इस्तीफा दिलवाओ।

हम कोर्ट से हटवाएंगे

दिसंबर के सत्र में विधानसभा में बैठने को लेकर जीतू पटवारी ने कहा हम तो चाहते हैं वह सदन में बैठें। अगर बीजेपी में गई है तो इस्तीफा दे। हम तो उन्हें कोर्ट जाकर हटवाएंगे ही और फिर जनता के जहां पर ऊपर जाकर छोड़ेंगे कि वह क्या चाहती है। लेकिन मोहन यादव और जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है उनका इस्तीफा क्यों नहीं करवा रही है? निर्मला सप्रे तो डरेगी क्योंकि उसको हारना है लेकिन बीजेपी तो बहादुर है इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ।

करीब महीने पहले भोपाल में भाजपा की कार्यशाला में पहुंचीं बीना विधानसभा से विधायक निर्मला सप्रे ने कहा था कि मैं बीजेपी की सदस्य नहीं हूं।
करीब महीने पहले भोपाल में भाजपा की कार्यशाला में पहुंचीं बीना विधानसभा से विधायक निर्मला सप्रे ने कहा था कि मैं बीजेपी की सदस्य नहीं हूं।

सप्रे के खिलाफ इसी हफ्ते कोर्ट जाएगी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भी की थी। लेकिन, अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में अब कांग्रेस हाईकोर्ट जाने वाली है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार याचिका पर लीगल एक्सपर्ट के साथ काम करवा रहे हैं। संभव है कि इसी हफ्ते भर के अंदर कांग्रेस सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी।

विजयपुर के रिजल्ट से सप्रे टेंशन में

उपचुनाव में कांग्रेस ने मंत्री रामनिवास रावत को हराकर विजयपुर सीट जीती है। वहीं, बुधनी सीट पर 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले उप चुनाव में बीजेपी की लीड 91000 तक घटाने में कामयाबी मिली है कांग्रेस इसे बड़ी सफलता मानकर चल रही है। पार्टी उत्साहित है। ऐसे में कांग्रेस निर्मला सप्रे को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे रही है। वहीं, विजयपुर के रिजल्ट के बाद अब निर्मला सप्रे टेंशन में है।

रावत छह बार के विधायक होने के बावजूद अपनी ही सीट पर सत्ताधारी दल की टिकट पर चुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे पहली बार विधायक बनी हैं, ऐसे में उन्हें डर है कि उपचुनाव में यदि भाजपाइयों ने साथ ना दिया तो उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।

विजयपुर विधानसभा सीट पर मंत्री रामनिवास रावत को कांग्रेस कैंडिडेट्स मुकेश मल्होत्रा से 7142 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है।
विजयपुर विधानसभा सीट पर मंत्री रामनिवास रावत को कांग्रेस कैंडिडेट्स मुकेश मल्होत्रा से 7142 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है।

जिला बनाने के चक्कर में की थी बीजेपी जॉइन

सागर जिले की एकमात्र कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने जब लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी जॉइन की तो उन्होंने यह कहा था कि वह बीना को जिला बनवाने और क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा में शामिल हुई हैं। हालांकि, तीन-चार महीने तक जिले को लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब बीना के दौरे पर जाने वाले थे। उसके दो दिन पहले खुरई जिला बनाओ आंदोलन ने जोर पकड़ लिया और खुरई वासियों ने पूरा शहर बंद करने की ऐलान कर दिया।

इसके बाद सरकार बैक फुट पर आई और बीना जाने से पहले मुख्यमंत्री ने यह ऐलान किया कि पूर्व में जिला बनाने में कई विसंगतियां रही हैं उन्हें दूर करने के लिए नई सिरे से तहसीलों ब्लॉक जिलों और संभागों की सीमाओं का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग का गठन करने का ऐलान किया था।

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